उत्तराखंड समाचार

सच्चे मन से की साधना होती है सफल: डा. पंड्या

भगवान के साथ सच्चे मन से साझेदारी निभाने वाला कभी घाटे में नहीं रहता।

हरिद्वार: नवरात्र साधना के अंतिम दिन गायत्री तीर्थ शांतिकुंज और देवसंस्कृति विश्वविद्यालय में साधकों ने अपने-अपने अनुष्ठान की पूर्णाहुति की। महिला मंडल की बहिनों ने हवन के बाद कन्या भोज के साथ नवरात्र साधना का समापन किया। इस अवसर पर शांतिकुंज परिसर में बहिनों ने 27 कुंडीय तथा देसंविवि परिसर में छात्रों ने नौ कुंडीय गायत्री महायज्ञ संपन्न कराया, जिसमें साधकों ने कई पारियों में हवन कर प्राप्त ऊर्जा को जनहित में लगाने का संकल्प लिया।

वहीं नवरात्र साधना के दौरान आयोजित विशेष व्याख्यानमाला के आखिरी दिन साधकों को संबोधित करते हुए गायत्री परिवार प्रमुख डा. प्रणव पंड्या ने कहा कि नवरात्र के दिनों में सच्चे मन से की गई साधना निश्चित रूप से सफल होती है। नियमित साधना एवं स्वाध्याय से वैचारिक क्षमता बढ़ती है जो भविष्य को संवारने में अहम भूमिका निभाता है। डा. पंड्या ने रामचरित मानस के विभिन्न चौपाइयों के माध्यम से साधकों को प्रभु की भक्ति पाने एवं उनके कार्य करने से मिलने वाली उपलब्धियों को विस्तार से बताया। उन्होंने नल, नील, रीछ वानर से लेकर हनुमान, विभीषण आदि के प्रभु श्रीराम के प्रति समर्पण करने से मिली सफलता का उल्लेख किया। कहा कि साधारण से दिखने वाले वानर जब प्रभु श्रीराम के बताये कार्यों में निस्वार्थ भाव से जुट गए तो उसका कायाकल्प हो गया। कहा कि भगवान के साथ सच्चे मन से साझेदारी निभाने वाला कभी घाटे में नहीं रहता।

इस अवसर पर संगीत विभाग के भाइयों ने ‘श्रीराम भक्ति ऐसी श्रद्धा उभारती है’ सुगम संगीत से साधकों को साधनात्मक जीवनचर्या अपनाने के लिए उल्लसित किया। इसके साथ ही दो अप्रैल से प्रारंभ हुए श्रीरामचरित मानस में श्रीरामवचनामृत विषय पर आयोजित विशेष व्याख्यानमाला का समापन हो गया। इस अवसर पर अनेक युवाओं ने इस चैत्र नवरात्रि को अपने जीवन के सबसे अमूल्य क्षण बताते हुए डा. पंड्या से मिले मार्गदर्शन को जीवनभर अपनाने की बात कही। तो वहीं अनेक गायत्री साधकों ने इसे बहुमूल्य धरोहर बताया। उधर शांतिकुंज के मुख्य सत्संग हाल में आयोजित साधकों को संबोधित करते हुए देवसंस्कृति विवि के कुलपति शरद पारधी ने साधना से प्राप्त ऊर्जा को समाज के हित में लगाने कर आह्वान किया। इस अवसर नवरात्रि अनुष्ठान में आए साधकों ने गायत्री परिवार की ओर से संचालित हो रहे विभिन्न रचनात्मक कार्यक्रम को गति देने का संकल्प लिया। इस दौरान देश-विदेश से आये नर-नारी उपस्थित रहे।

 

 

 

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