ऑपरेशन सदर्न रेडीनेस 26-2 का समापन
चार दिवसीय सहभागिता के परिणामस्वरूप 3,800 प्रशिक्षण घंटे प्राप्त हुए।

देहरादून, 24 जुलाई। दक्षिणी नौसेना कमान, कोच्चि में चार दिवसीय बहुराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम , ऑपरेशन सदर्न रेडीनेस 26-2 का समापन हुआ। दक्षिणी नौसेना कमान और भारतीय नौसेना के नेतृत्व वाली संयुक्त कार्य बल 154 के तत्वावधान में संयुक्त समुद्री बलों (सीएमएफ) के साथ साझेदारी में भारतीय नौसेना द्वारा संचालित इस कार्यक्रम में 27 देशों के 276 कर्मियों ने भाग लिया , जिन्हें 76 प्रशिक्षकों और विषय विशेषज्ञों का सहयोग प्राप्त था, और इसमें चार अंतरराष्ट्रीय संगठनों की भागीदारी भी शामिल थी।
इस कार्यक्रम का उद्घाटनदक्षिणी नौसेना कमान मुख्यालय के मुख्य स्टाफ अधिकारी (प्रशिक्षण) रियर एडमिरल दीपक सिंघल ने संयुक्त समुद्री बलों के उप कमांडर कमोडोर डैन थॉमस, वरिष्ठ अधिकारियों और भाग लेने वाले देशों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में किया। समापन समारोह आयोजित किया गया,जिसमें सीटीएफ 154 के कमांडर कमोडोर मिलिंद एम मोकाशी ने समापन भाषण दिया, प्रशिक्षकों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए और मुख्य स्टाफ अधिकारी (प्रशिक्षण) ने विदाई भाषण दिया। इस कार्यक्रम में पेशेवर चर्चाओं, सिम्युलेटर-आधारित निर्देशों और व्यावहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से समुद्री सुरक्षा, कानूनी और परिचालन संबंधी दृष्टिकोणों को एक साथ लाया गया। सत्रों में समुद्री क्षेत्र जागरूकता और सूचना साझाकरण, समुद्री कानून, मादक पदार्थों की रोकथाम, बल सुरक्षा उपाय, असममित खतरे, समुद्री मानवरहित प्रणालियाँ और परिचालन समुद्री प्रशिक्षण जैसे विषयों पर चर्चा की गई। इस विशिष्ट क्षेत्र के प्रशिक्षण को भारतीय नौसेना, जिसमें सूचना संलयन केंद्र – हिंद महासागर क्षेत्र (आईएफसी-आईओआर), सीएमएफ के तत्व जैसे संयुक्त समुद्री सूचना केंद्र (जेएमआईसी), और संयुक्त राष्ट्र ड्रग्स एंड क्राइम कार्यालय (यूएनओडीसी) और आईएमओ अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानून संस्थान (आईएमओ आईएमएलआई) जैसे विशेषज्ञ अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के सहयोग से सुगम बनाया गया। प्रतिभागियों ने भारतीय नौसेना के जहाजों पर समुद्री प्रशिक्षण के अलावा, क्षति नियंत्रण और अग्निशमन, समुद्री संचार, समुद्र में उत्तरजीविता और जहाज पर चढ़ने की प्रक्रियाओं में व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्राप्त किया। इन गतिविधियों ने प्रतिभागियों को अनुभवों और सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान करने के अवसर प्रदान किए, जिससे समुद्री सेवाओं और संगठनों के बीच बेहतर समझ विकसित करने में योगदान मिला। इस सहभागिता ने सहभागी देशों के बीच अंतरसंचालनीयता, पेशेवर नेटवर्क और परिचालन संबंधी आत्मविश्वास को मजबूत किया। इसने सैद्धांतिक समझ को व्यावहारिक प्रशिक्षण के साथ जोड़कर क्षेत्रीय क्षमता निर्माण और सामूहिक समुद्री सुरक्षा में भी योगदान दिया। चार दिवसीय सहभागिता के परिणामस्वरूप 3,800 प्रशिक्षण घंटे प्राप्त हुए। ऑपरेशन सदर्न रेडीनेस 26-2 ने भारतीय नौसेना के आधुनिक प्रशिक्षण अवसंरचना, अत्याधुनिक सिमुलेटर, उन्नत शिक्षण पद्धतियों और पेशेवर विशेषज्ञता का प्रदर्शन किया । अभ्यास के सफल संचालन ने भारतीय नौसेना-सीएमएफ साझेदारी को सुदृढ़ किया है और सीटीएफ 154 के भारतीय नौसेना के नेतृत्व को रेखांकित करते हुए दक्षिणी नौसेना कमान की एक प्रमुख प्रशिक्षण केंद्र और पेशेवर समुद्री प्रशिक्षण के लिए पसंदीदा गंतव्य के रूप मंर भूमिका को उजागर किया है।




