पहला स्वदेशी डिस्पोजेबल टर्बो जेट इंजन सफलतापूर्वक विकसित
परिकल्पना को एक ऐतिहासिक मील के पत्थर में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

देहरादून, 24 जुलाई। डीआरडीओ के गैस टरबाइन अनुसंधान प्रतिष्ठान (जीटीआरई) द्वारा डिजाइन किया गया 350 किलोग्राम थ्रस्ट श्रेणी का पहला स्वदेशी डिस्पोजेबल टर्बो जेट इंजन सफलतापूर्वक विकसित कर लिया गया है। जीटीआरई ने इंजन के निर्माण और असेंबली के लिए हैदराबाद स्थित आजाद इंजीनियरिंग को अपना उद्योग भागीदार चुना था। आजाद इंजीनियरिंग द्वारा इंजन का सफल निर्माण किया गया और जीटीआरई को सौंप दिया गया, जो भारत के एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। यह डिलीवरी वर्षों की सटीक इंजीनियरिंग, उन्नत विनिर्माण और भारत के वैज्ञानिक एवं औद्योगिक समुदायों के बीच घनिष्ठ साझेदारी की परिणति का प्रतीक है। जेट इंजन प्रौद्योगिकी पर कुछ ही देशों का अधिकार है और इसे विश्व के सबसे परिष्कृत इंजीनियरिंग विषयों में से एक माना जाता है, जिसमें असाधारण सटीकता, उन्नत धातु विज्ञान और उच्च स्तरीय विनिर्माण मानकों की आवश्यकता होती है। डीआरडीओ के डिजाइन पर आधारित इस जटिल प्रणाली की डिलीवरी भारतीय रक्षा उद्योग की बढ़ती तकनीकी क्षमताओं को दर्शाती है। इस इंजन को विशिष्ट वैज्ञानिक एवं महानिदेशक (एरोनॉटिकल सिस्टम्स) डॉ. के. राजलक्ष्मी मेनन और उत्कृष्ट वैज्ञानिक एवं निदेशक जीटीआरई डॉ. एस.वी. रामनामूर्ति को आजाद इंजीनियरिंग के सीईओ श्री राकेश चोपड़ा द्वारा सौंपा गया। रक्षा सचिव और रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष श्री राजेश कुमार सिंह ने जीटीआरई और उद्योग जगत की साझेदारी की सराहना की, जो इस परिकल्पना को एक ऐतिहासिक मील के पत्थर में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।




