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‘उत्तराखंड बचाओ सनातन जगाओ यात्रा’ तय करेगी 18 हजार किलोमीटर से अधिक का सफर

तैयार किए जाएंगे सनातन और हिमालयी सरोकारों की समझ रखने वाले निर्भीक स्वयंसेवक

देहरादून 27 मई। “वृक्षाबंधन अभियान” के संस्थापक एवं विचारक “सैनिक शिरोमणि” मनोज ध्यान की बहु प्रतीक्षित “उत्तराखंड बचाव सनातन जगाओ यात्रा” का प्रथम चरण कार्यक्रम का शुभारंभ आज एकादशी के अवसर पर हो चला है। सनातन युवा वाहिनी के बैनर तले यह यात्रा उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा करेगी और आम जनता से संवाद स्थापित कर सनातन के मूल भावना एवं विचारों को प्रतिस्थापित करने के लिए अथक प्रयास करेगी ऐसा “सैनिक शिरोमणि” मनोज ध्यानी द्वारा कथन किया गया है।
“सैनिक शिरोमणि” मनोज ध्यानी द्वारा “उत्तराखंड बचाओ सनातन जगाओ यात्रा” के बारे में बताते हुए कहा गया कि उत्तराखंड की भूमि, वह पवित्र पावन भूमि है, जहां से माँ गंगा अवतरण से मां पार्वती के कारण शाक्त एवं भोलेनाथ जी के कारण शैव संस्कृति, माँ यमुना के अवतरण से श्री राधा कृष्ण की पवित्र सांस्कृतिक धारा, सरयू के उद्गम के कारण प्रभु श्री राम एवं माता सीता, वेद व्यास (वेदनी) गुफाओं से गणपतय की सांस्कृतिक धारा, कणव (वाल्मीकी) आश्रम से श्री लव कुश (उत्तर रामायण) और माँ द्रौपदी – पंच पाण्डवों से देव संस्कृति आदि का सृजन हुआ है। उन्होंने कहा कि इसी सनातन सांस्कृतिक विचार के विषय में स्वामी विवेकानंद ने ‘सनातन’ को अंतर्राष्ट्रीय धर्म संसद में ‘सर्व धर्मों की मां’ कह कर पुकारा डाला था। उनसे पूर्व परम पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य जी ने अल्प आयु में अभूतपूर्व चमत्कार करते हुय भारत भूमि में सनातन के कुशल संचालन हेतु मठ और नियमन के सिद्धांत रोपित किए थे। अनेकों पंथ और संप्रदाय सनातन के ही परम अंग रहे हैं, और इस ज्ञान गंगा को समझाने हेतु 70 वर्ष की आयु में सनातन और श्रीमद्भगवद्गीता का अभिप्रसार श्रील प्रभुपाद जी ने विदेशी भूमि में किया वह अनोखा रहा है। सनातन की धारा में देव देवियों की पूजा पद्धति और उससे गहन जुड़ाव, उत्तराखंड को देवभूमि बनाती है। अतः नितांत आवश्यक है कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि का रक्षण किया जाना चाहिए। सनातन को मूल भावना से समझने की आज सर्वाधिक आवश्यकता आ गई है।
“सैनिक शिरोमणि” मनोज ध्यानी का कथन है कि “उत्तराखंड बचाओ, सनातन जगाओ यात्रा” के अंतर्गत 18 हजार किलोमीटर से अधिक का सफर तय किया जाएगा। सनातन और हिमालयी सरोकारों की समझ रखने वाले निर्भीक स्वयंसेवक तैयार किए जाएंगे। उत्तराखंड के पर्वतीय समाज को आर्थिक व सामाजिक रूप से सबल बनाने हेतु ठोस निर्णायक कदम उठाए जाएंगे, और पलायन जैसी समस्या का समूल नाश किया जाएगा। उन्होंने बताया कि “उत्तराखंड बचाओ सनातन जगाओ यात्रा” के माध्यम से अनेकों चिकित्सा शिविर आयोजित किए जाना प्रस्तावित किया गया है, ताकि पहाड़ों की माताओं बहनों, बुजुर्गों को यथावत स्थानीय क्षेत्र में उच्च स्तरीय चिकित्सा उपलब्ध कराई जा सके। बेरोजगारी निवारण हेतु ऐसे रोजगार सृजन कार्यक्रम रचे जाएंगे, जिनसे अन्य सामाजिक इकाइयां भी सीख प्राप्त करेंगी। इस पूरी यात्रा के माध्यम से 2,00,000 वृक्ष रोपण का लक्ष्य “वृक्षाबंधन अभियान” अंतर्गत किया जाना भी मुख्य लक्ष्य रहेगा। बकौल” सैनिक शिरोमणि” मनोज ध्यानी यह यात्रा कलियुग उपरांत सतयुग के शुभारंभ की प्रथम दस्तक है।

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