एनसीवीईटी में रिसर्च डिवीजन की स्थापना से साक्ष्य-आधारित स्किलिंग इकोसिस्टम को मिलेगी मजबूती
एनसीवीईटी ने की रिसर्च एडवाइजरी कमेटी की पहली बैठक आयोजित

देहरादून। कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण परिषद (एनसीवीईटी) ने, कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय की सचिव और एनसीवीईटी की चेयरपर्सन देवश्री मुखर्जी की अध्यक्षता में, अपनी रिसर्च एडवाइजरी कमेटी (आरएसी) की पहली बैठक आयोजित की। यह बैठक व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण के क्षेत्र में अनुसंधान तथा साक्ष्य-आधारित नीति-निर्माण को संस्थागत रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इस बैठक में सरकार, शिक्षा जगत, उद्योग, थिंक टैंक और अनुसंधान संगठनों के जाने-माने विशेषज्ञ और प्रतिनिधि एक साथ आए। इनमें नीति आयोग, श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय, प्रशिक्षण महानिदेशालय (डीजीटी), भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई), भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) कलकत्ता, राष्ट्रीय अनुप्रयुक्त आर्थिक अनुसंधान परिषद (एनसीएईआर), टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टीआईएसएस), अशोका विश्वविद्यालय, राष्ट्रीय शैक्षिक योजना एवं प्रशासन संस्थान (एनआईईपीए), यंग लाइव्स इंडिया इत्यादि शामिल हुए।
कमेटी ने अपने भविष्य के कार्यों को दिशा देने के लिए अल्पकालिक, मध्यमकालिक और दीर्घकालिक प्राथमिकताओं को तय करने पर विचार-विमर्श किया। चर्चा के मुख्य क्षेत्रों में संस्थागत सहयोग को मज़बूत करना, विभिन्न संगठनों के बीच अनुसंधान प्रयासों को एकीकृत करना, विनियामक प्रभावशीलता को बढ़ाना और जर्नल, कॉन्फ्रेंस, लेक्चर सीरीज़ और इससे जुड़ी पहलों के माध्यम से नॉलेज-शेयरिंग को बढ़ावा देना शामिल था। कमेटी ने ऐसे मंचों पर राज्यों की अधिक भागीदारी के महत्व पर भी ज़ोर दिया। चर्चा में आगे स्किल गैप एनालिसिस, नई टेक्नोलॉजी और इंटीग्रेटेड सॉल्यूशन को अपनाने, तथा कौशल विकास एजेंडा में युवाओं के नजरिए को अधिक शामिल करने के लिए बड़े गाइडिंग फ्रेमवर्क की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला गया। प्रगति की समीक्षा करने और भविष्य की प्राथमिकताएं निर्धारित करने के लिए कमेटी की बैठक हर तीन महीने में होगी।
एनसीवीईटी के भीतर एक समर्पित रिसर्च डिवीजन की स्थापना और उसे संचालित करने के लिए मार्गदर्शन देने के लिए एक रिसर्च एडवाइजरी कमेटी का गठन किया गया है। इस प्रस्तावित डिवीजन का उद्देश्य व्यावसायिक शिक्षा और कौशल विकास के लिए एक नेशनल नॉलेज और रिसर्च हब के रूप में कार्य करना है, जो विश्वसनीय और डेटा-आधारित रिसर्च के माध्यम से नीति निर्माण, रेगुलेटरी सुधार, क्वालिटी एश्योरेंस, लेबर मार्केट एनालिसिस और असेसमेंट सिस्टम में सहायता प्रदान करेगा।
एनसीवीईटी की चेयरपर्सन, देवश्री मुखर्जी ने साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण की आवश्यकता को दोहराया और कहा, “जैसे-जैसे भारत एक ग्लोबल स्किल कैपिटल बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, रिसर्च और डेटा-ड्रिवन इनसाइट्स रिस्पॉन्सिव और फ्यूचर-रेडी स्किलिंग पॉलिसी बनाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। एनसीवीईटी के रिसर्च डिवीजन को वीईटी इकोसिस्टम में इनोवेशन, क्वालिटी एश्योरेंस और लॉन्ग-टर्म स्ट्रेटेजिक प्लानिंग को सपोर्ट करने के लिए एक जरूरी इंस्टीट्यूशनल सिस्टम के तौर पर देखा जा रहा है।
इस अवसर पर बोलते हुए, एनसीवीईटी के एग्जीक्यूटिव मेंबर, प्रो. (डॉ.) अशोक कुमार गाबा ने कहा, रिसर्च एडवाइजरी कमेटी की स्थापना भारत के स्किलिंग इकोसिस्टम के लिए एक मजबूत सबूत बेस बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। एनीसीवीईटी के अंदर एक समर्पित रिसर्च फ्रेमवर्क सोच-समझकर नीतिगत निर्णय लेने, रेगुलेटरी सिस्टम को मजबूत करने और ग्लोबल बेंचमार्क वाले वोकेशनल एजुकेशन सिस्टम बनाने में मदद करेगा।
रिसर्च डिवीज़न की स्थापना को जनवरी 2026 में हुई एनसीवीईटी काउंसिल की 12वीं बैठक में सैद्धांतिक रूप से मंजूरी दी गई थी और बाद में एनसीवीईटी की जनरल बॉडी ने इसकी पुष्टि की थी। रिसर्च एडवाइजरी कमेटी, डिवीजन को रिसर्च प्रायोरिटी तय करने, सहयोग को मज़बूत करने और राष्ट्रीय और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के साथ तालमेल सुनिश्चित करने में रणनीतिक मार्गदर्शन प्रदान करेगी। यह पहल, इंस्टीट्यूशनल रिसर्च और साक्ष्य-आधारित गवर्नेंस के माध्यम से भारत के भारत की व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण प्रणाली की गुणवत्ता, विश्वसनीयता और जवाबदेही को सुदृढ़ करने के प्रति एनसीवीईटी की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।




