मजदूरों को लड़ाई के साथा विधिक सहायता देगा सीटू : लेखराज
सेलकुई के श्रमिकों को निडर हो कर शोषण के खिलाफ एक साथ खडा हों जाना चाहिए।

देहरादून 14 मई। सेंटर ऑफ़ इंडियन ट्रेड यूनियंस (सीटू) ने श्रम की लूट के खिलाफ हो रहे आंदोलन में मजदूरों के साथ कंधे से कंधा मिला कर संघर्ष के साथ -साथ विधिक सहायता भी देगा। उक्त आशय की जानकारी देते हुए सीटू के जिला महामंत्री लेखराज ने कहा की सेलकुई सहित उत्तराखण्ड में जहाँ भी श्रमिक आंदोलन करेगा सीटू उनके इस आनोलन में दृड़ता से खड़ा होगा उन्होंने कहा की 26000/= रु न्यूनतम वेतन सरकार को घोषित करना चाहिए। उन्होंने कहा की फैक्ट्रीयों में यूनियन बनाना तो जैसे अपराध हो गया है क्योंकि यूनियन बनने से श्रमिकों का शोषण करना आसान नहीं होता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में दिया जाने वाला न्यूनतम वेतन बहुत ही कम है जिससे मजदूरों को आर्थिक दिक्क़तो का सामना करना पड़ता है किन्तु फैक्ट्रीयों में इस न्यूतम वेतन को भी नहीं दिया जाता है और 13 घंटे काम कराये जाते है किन्तु अतिकाल का भुगतान भी नहीं किया जाता है। उन्होंने कहा कि सरकार कि श्रमिक विरोधी नीतियों के कारण श्रम बिभाग पंगु हो गया है यदि श्रमिक अपनी फरियाद ले कर जाते है उनकी कोई सुनवाई नहीं होती है जिससे श्रमिक निराश हो जाता है। उन्होंने कहा कि सीटू सरकार से मांग कर रही है कि वे श्रम कानूनों कि बहाली करें क्योंकि 20 ननवंबर 2025से आज तक कोई भी श्रम कानून लागु ही नहीं है जिसमे मजदूरी भुगतान अधिनियम, उपादान (ग्रेजवेटी) भुगतान अधिनियम, बोनस भुगतान अधिनियम सभी अधिनियम समाप्त कर दिये गये है।
जिससे इन अधिनियमों के तहत जो सुरक्षा कवच मजदूर के पास था वह अब नहीं है जिससे मजदूर के मेहनत कि लूट बढ़ गयी है। उन्होंने कहा कि मेहनत कि इस लूट के खिलाफ मजदूर लड़ेगा जो पूंजी वादी सरकारों को बदल देगा। उन्होंने सेलकुई के श्रमिकों को निडर हो कर शोषण के खिलाफ एक साथ खडा हों जाना चाहिए।




