उत्तराखंड समाचार

संविधान प्रस्तावना वाचन कार्यक्रम आयोजित

प्राचार्य मनचंदा ने कहा कि भारतीय संविधान की प्रस्तावना, संविधान का एक महत्वपूर्ण भाग है

फरीदाबाद। शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार राजकीय आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय फरीदाबाद में प्राचार्य रविन्द्र कुमार मनचन्दा की अध्यक्षता में जूनियर रेडक्रॉस, सैंट जॉन एम्बुलेंस ब्रिगेड और गाइडस द्वारा संविधान प्रस्तावना वाचन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्राचार्य मनचंदा ने कहा कि भारतीय संविधान की प्रस्तावना, संविधान का एक महत्वपूर्ण भाग है। यह संविधान के उद्देश्यों और सिद्धांतों को बताती है। प्रस्तावना में भारत के भविष्य के लिए लक्ष्यों का वर्णन होता है। यह संविधान के मौलिक मूल्यों और दर्शन का प्रतीक है। प्रस्तावना के अनुरूप भारत एक संप्रभु, समाजवादी, पंथ निरपेक्ष, लोकतांत्रिक, गणराज्य है। भारत के नागरिकों को न्याय, स्वतंत्रता, और समानता का अधिकार है। भारत के नागरिकों को भाईचारे का भाव रखना चाहिए और राष्ट्रीय एकता और अखंडता को बढ़ावा देना चाहिए। व्यक्ति की गरिमा को सुनिश्चित किया जाना चाहिए। भारत के संविधान को 26 नवंबर, 1949 को अपनाया गया था। संविधान की प्रस्तावना को संविधान संशोधन के माध्यम से संशोधित किया जा सकता है। प्रस्तावना को संविधान की आत्मा और संविधान की पहचान कहा जाता है। प्रस्तावना, संविधान निर्माताओं के सपनों और आकांक्षाओं को दर्शाती है यह सर्वोच्च न्यायालय का मार्गदर्शन करती है। जूनियर रेडक्रॉस और सैंट जॉन एंबुलेंस ब्रिगेड प्रभारी प्राचार्य रविंद्र कुमार मनचन्दा ने कहा कि संविधान और संवैधानिक मूल्यों के प्रति नागरिकों में सम्मान की भावना को बढ़ाने के लिए इस का ज्ञान होना अत्यावश्यक है। भारतीय संविधान में प्रस्तावना का विचार अमेरिका के संविधान से लिया गया है प्रस्तावना की भाषा को ऑस्ट्रेलिया के संविधान से लिया गया है प्रस्तावना का प्रारंभ हम भारत के लोग से शुरू होता है और 26 नवंबर 1949 अंगीकृत पर समाप्त होता है। 1976 में 42 वें संविधान संशोधन अधिनियम के द्वारा प्रस्तावना में संशोधन किया गया था जिसमें तीन नए शब्द समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और अखंडता को जोड़ा गया। अब तक प्रस्तावना में यद्यपि एक ही बार संशोधन हुआ है। प्राचार्य रविंद्र कुमार मनचंदा, स्टाफ सदस्यों एवं सभी अध्यापकों ने वाचन कार्यक्रम की प्रशंसा की। कार्यक्रम संयोजन में सभी स्टाफ सदस्यों का विशेष सहयोग रहा। प्राचार्य मनचंदा ने बताया कि संविधान में देश के नागरिकों के मौलिक अधिकारों, कर्तव्यों, सरकार की भूमिका, प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के निहित अधिकारों का वर्णन स्पष्टता से किया गया है। प्राचार्य मनचंदा और स्टाफ  सदस्यों ने सभी से संविधान के बारे में अधिक से अधिक ज्ञान प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया।

 

 

 

 

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