उत्तराखंड समाचार

वर्ष 2025 तक भारत को टीबीमुक्त बनाने का लक्ष्य

जिसमें टीबी कार्यक्रम से जुड़े चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कर्मियों को सम्मानित किया गया।

रुड़की : शहर के एक होटल में टीबी मुक्ति एवं जागरूकता पर सीएमआइ (कंटीन्यूइंग मेडिकल एजूकेशन) का आयोजन किया गया। जिसमें टीबी कार्यक्रम से जुड़े चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कर्मियों को सम्मानित किया गया। साथ ही विशेषज्ञ चिकित्सकों ने टीबी बीमारी से जुड़ी विभिन्न जानकारियां दी।

कार्यक्रम की शुरुआत वरिष्ठ जिला क्षयरोग अधिकारी डा. पंकज जैन व इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डा. रामसुभग सैनी ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया। जिला क्षय रोग अधिकारी डा. पंकज जैन ने कहा कि टीबी रोग अन्य बीमारियों की अपेक्षा अधिक संक्रामक होता है। इसी कारण इसके फैलने की आशंका ज्यादा रहती है। दुनियाभर में टीबी के कारण मरने वालों की संख्या किसी भी अन्य संक्रामक बीमारी से मरने वालों की तुलना में काफी अधिक हैं। यह सामान्य तौर पर मनुष्य के फेफड़ों को प्रभावित करती है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने वर्ष 2025 तक भारत को टीबीमुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने बताया कि यदि टीबी पर काबू पाना है तो इस पर अंकुश लगाना होगा। एम्स ऋषिकेश से आए वरिष्ठ चिकित्सक डा. महेंद्र ने एक्टिव टीबी व लेटेंट टीबी के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि एक्टिव टीबी में मरीज को लक्षण आने शुरू हो जाते हैं। जिससे जल्द ही यह बीमारी पकड़ में आ जाती है। जबकि लेटेंट टीबी में शुरूआती दौर में कोई लक्षण मरीज को नहीं आता है। जिस कारण मरीज उपचार को नहीं जाता है। एक्टिव टीबी के मुकाबले लेटेंट टीबी ज्यादा घातक है। इसमें बैक्टिरिया बहुत धीमी गति से बढ़ता है। धीरे-धीरे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को समाप्त करता रहता है। जब बीमारी काफी बढ़ जाती है तब यह सामने आती है। डा. चेतक राणा ने बताया कि प्रत्येक पल्मोनरी टीबी वाले मरीजों के नजदीकी संपर्क में आए हर व्यक्ति की लेटेंट टीबी की जांच स्कीन टेस्ट से करनी चाहिए। यदि जांच पाजिटिव आती है तो टीपीटी यानी टीबी प्रिवेंटिव थेरेपी शुरू कर देनी चाहिए। यदि किसी को लेटेंट टीबी है तो उसे नियमित रूप से चिकित्सक की दवा लेनी चाहिए। इस मौके पर सिविल अस्पताल रुड़की के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. संजय कंसल, डब्ल्यूएचओ कंसटेंट डा. मीरा भाटिया, डा. शादाब, डा. अनुभव, डा. दिली रमन, डा. अरुण कुमार, अनिल नेगी, मोहम्मद सलीम, जगजीवन राम, आशीष शर्मा, योगेश, अरविद, नितिश कुमार, चेतन, विनोद, जगदीश आदि मौजूद रहे।

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