निराकार परमात्मा के पांच साकार स्वरूप
निराकार ईश्वर जब विष्णु स्वरूप धारण करके ब्रह्मांड की रचना करते है तो उस समय की लीला का वर्णन विष्णु पुराण करती है

देहरादून। निराकार परमात्मा के पांच साकार स्वरूप है गणेश, शिव, दुर्गा, विष्णु, और सूर्य पांचो मे कोई अन्तर नहीं है। बस स्वरूप का भेद है।कोई भी व्यक्ती इन पांचों मे से किसी भी एक स्वरूप की अनन्य भक्ति कर के अपने मनोरथ व मोक्ष प्राप्त कर सकता है। जिस व्यक्ति का जिस स्वरूप मे आकर्षण होता है, वो उस स्वरूप की उपासना करता है। इसी को ध्यान मे रखते हुए वेद व्यास जी ने अलग-अलग स्वरूप के अलग-अलग पुराण लिखे है। तत्व से सब एक ही है इसमे कोई छोटा बड़ा नहीं है। अब कई लोगों के मन में ये प्रश्न उठता है कि विष्णु पुराण पढ़ो तो उसमे लिखा है कि सृष्टि विष्णु ने बनाई, शिव पुराण पढो तो शिव ने देवी भागवत पढ़ो तो देवी ने इसमे से सही कौन है?
इसका उत्तर ये है ये सभी सही है। कल्प भेद से सभी बाते व घटनाएँ सही है। आसान शब्दों मे कहे तो ये ब्रह्मांड पहले बार नहीं बना है इसके पहले भी बहुत ब्रह्मांड बने और भविष्य मे भी बनेंगे। निराकार ईश्वर जब विष्णु स्वरूप धारण करके ब्रह्मांड की रचना करते है तो उस समय की लीला का वर्णन विष्णु पुराण करती है तथा जब निराकार ईश्वर दुर्गा या शिव स्वरूप धारण कर के ब्रह्मांड की रचना करते है तो उस समय की लीला का वर्णन शिव पुराण और देवी भागवत करते है इस तरह से सभी पुराण सही है।




