उत्तराखंड समाचार

एयरोसोल एक्सपोज़र से मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों पर प्रशिक्षण

एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग तकनीक वायु प्रदूषण मापने में सहायक : डॉक्टर श्रीधर

देहरादून। दून विश्वविद्यालय में भारत सरकार द्वारा समर्थित ‘सिनर्जिस्टिक ट्रेनिंग प्रोग्राम यूटिलाइज़िंग द साइंटिफिक एंड टेक्नोलॉजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर’ (स्तुति) योजना कार्यक्रम के तहत रसायन विज्ञान, भौतिकी और पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन विभाग में ” एडवांस्ड इंस्ट्रुमेंटल टेक्निक्स ऑफ़ सिंथेसिस एंड फैसिकोकेमिकल एनालिसिस ऑफ़ ननोमाटेरिअलस ” पर सात दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार की पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ में स्तुति की परियोजना प्रबंधन इकाई के सौजन्य से 2 फरवरी तक चलेगा। आज इस कार्यक्रम के छठवें दिन दून यूनिवर्सिटी के पर्यावरण विज्ञान विभाग के डॉ विजय श्रीधर ने प्रतिभागियों को पार्टिकल साइज अनलयसेर के उपयोगों के बारे में बताया। उन्होंने इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग ले रहे देश के विभिन्न राज्यों से आये पीएचडी के छात्र -छात्राओं को इस तकनीक के मूल सिधान्तो के बारे में बताते हुए कहा के इस तकनीक के माद्यम से एयर क्वालिटी की मोइनटीरिंग करने में काफी मदद मिलती है। आजकल वायु प्रदूषण की गंभीर परिणामो के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि मइक्रोप्लास्टिक्स एंड कार्बन सूट अब ह्यूमन प्लेसेंटा में भी पाया गया है, इस प्रकार की मटेरियल ह्यूमन रिप्रोडक्शन सिस्टम को भी प्रभावित कर सकते हैं। डॉ श्रीधर ने बताया की उनके रिसर्च टीम ने दून यूनिवर्सिटी परिसर तथा आस पास दिवाली की दौरान हुए वायु प्रदूषण को मापा और पाया की पर्यावरण में एयरोसोल की मात्रा को सामान्य होने में एक सप्ताह का समय लग गया। डॉ श्रीधर ने प्रतिभागिओं को अवगत कराया की किस प्रकर से देश की उड्डयन इंडस्ट्री, एग्रीकल्चरल इंडस्ट्री, रेलवेज आदि हर साल एयरोसोल एवं उससे जनित फोग की वजह से घाटा उठा रहे है। डॉ श्रीधर एवं सौरभ शोधार्थी ने प्रतिभागियों को पार्टिकल एनालाइजर तकनीक पर प्रशिक्षण देते हुए कहा कि इस कार्यक्रम के प्रतिभागी कभी भी इस तकनीक का प्रयोग अपने रिसर्च कार्यों के लिए दून यूनिवर्सिटी में कर सकते हैं। कार्यक्रम में भौतिक विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉक्टर हिमानी शर्मा, रसायन विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ अरुण कुमार, कार्यक्रम की संयोजक डॉ चारू द्विवेदी, उप संयोजक डॉ विपिन सैनी सहित शिक्षक एवं समस्त शोधार्थी उपस्थित रहे।

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