उत्तराखंड समाचार

‘अग्निपथ’ योजना को लेकर विरोध शुरू, युवाओं ने किया हंगामा

पिथौरागढ़ में युवाओं ने सिल्थाम में लगाया जाम

देहरादून। अग्निपथ योजना लागू करने के विरोध में बेरोजगार संगठनों के पदाधिकारियों, युवाओं ने राजधानी सहित प्रदेश के अलग-अलग जिलों में जमकर हंगामा किया। युवाओं ने भाजपा की ओर से शहर के विभिन्न इलाकों में लगाए गए पोस्टरों, बैनरों को फाड़ डाला और केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। वहीं पिथौरागढ़ में युवाओं ने सिल्थाम में जाम लगाया, जिस कारण यहां हजारों लोग जाम में फंस गए। हंगामा कर रहे युवाओं ने अग्निपथ योजना को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की मांग की। युवाओं का आरोप हैं की अग्निपथ योजना युवाओं के साथ धोखा है।

सेना में भर्ती के लिए लागू की गई नई योजना अग्निपथ का दून के युवाओं ने भी विरोध शुरू कर दिया है। गुरुवार को भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं ने घंटाघर और लैंसडाउन चौक पर इसके खिलाफ प्रदर्शन किया। युवाओं ने फौजी अंदाज में डिप्स मारकर भी इस योजना का विरोध किया और कहा कि ये रोजगार नहीं युवाओं को बहला-फुसलाकर बेरोजगार करने की योजना है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार रोजगार देना चाहती है तो सेना में तमाम खाली पड़े पदों को स्थाई तौर पर भरे। उन्होंने सेना का निजीकरण बताया और कहा कि तैयारी कर रहे युवा इसके लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं है। उन्होंने लैंसडाउन व रानीखेत सहित तमाम जगहों पर निकाली गई भर्तियां करने पर भी रोष जताया।

वहीं दूसरी और उत्तराखंड राज्य के पूर्व मुख़्यमंत्री हरीश रावत ने आज अपने फेसबुक एकाउंट मे एक पोस्ट करते हुये लिखा की भारतीय रक्षा सेनाओं में विशेष तौर पर थल सेना में दो लाख से ज्यादा पद रिक्त पड़े हुए हैं। देश के लाखों युवा जो सेना में भर्ती होने का सपना पाले हुए हैं, इसके लिए वर्षों से तैयारी कर रहे हैं। सरकार ने आलोचना से बचने के लिए उनको एक झुनझुना थमा दिया है कि आप भर्ती नहीं कर रहे हैं! वह अग्निपथ भी नाम तो बहुत जबरदस्त रखा, वह वीर जरूर होंगे। मगर सरकार ने उनको अग्निपथ का राही बना दिया है, क्योंकि 4 साल के बाद उनके जीवन की क्या कार्य योजना होगी उसके विषय में कोई स्थिति स्पष्ट नहीं है और सेना के साथ एक बार उनके सपने को जोड़ने के बाद आप 4 साल बाद उनके सपनों को तोड़ेंगे, इसका हमारी युवा शक्ति पर बहुत दुष्प्रभाव पड़ेगा और साथ-साथ आप हमारे उच्च दक्षता प्राप्त सेना के साथ जो है आधी-अधूरी ट्रेनिंग के आधार पर लोगों को यदि समाहित करेंगे, तो इससे सेना की क्वालिटी पर क्या असर पड़ेगा? उस पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए। मुझे तो यह अग्निपथ वीर जो है, केवल एक चुनावी योजना मात्र लगती है और किसी भी तरीके से न नौजवानों के हित में है, न देश की रक्षा के हित में दिखाई देती है!

 

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