शिव सेना ने उठाई इंद्रमणि बडोनी को भारत रत्न और दिवाकर भट्ट के नाम पर एस्लेहॉल चौक का नाम रखने की मांग
अपनों ने नहीं गैरों ने उठाई सम्मान देने की मांग

एस.के. एम. न्यूज़ सर्विस
देहरादून, 13 मार्च। जो मांग उत्तराखंड राज्य के क्षेत्रीय दलों को करनी चाहिए थी वो मांग आज शिव सेना उठा रही हैं। बात चाहे पहाड़ के गाँधी इंद्रमणि बडोनी को भारत रत्न देने की हो या फिर फिल्ड मार्शल दिवाकर भट्ट के नाम पर देहरादून मे चौक का नाम रखने की। दोनों मांगो को लेकर शिव सेना ने आवाज़ बुलंद की हैं।
गौरतलब हैं की इंद्रमणि बडोनी उत्तराखंड के एक प्रमुख गांधीवादी नेता और राज्य आंदोलनकारी थे, जिन्हें ‘पहाड़ का गांधी’ कहा जाता है। उन्होंने 105 दिनों की पदयात्रा और 1994 के आमरण अनशन (पौड़ी) के माध्यम से अलग उत्तराखंड राज्य के लिए संघर्ष किया, और 1979 में उत्तराखंड क्रांति दल के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बडोनी 1967, 1974, और 1977 में देवप्रयाग से तीन बार उत्तर प्रदेश विधानसभा के विधायक चुने गए। वाशिंगटन पोस्ट ने उन्हें “माउंटेन गांधी” (पहाड़ का गांधी) कहा था, क्योंकि वे अहिंसा के मार्ग पर चलते थे। वे अपनी सादगी और निस्वार्थ सेवा के लिए जाने जाते थे, और उन्होंने गैरसैंण को उत्तराखंड की राजधानी घोषित किया था। वे उत्तराखंड के विकास, शिक्षा, और स्वास्थ्य को लेकर बहुत सजग थे और 18 अगस्त 1999 को उनका देहावसान हो गया। आज उत्तराखंड क्रांति दल सहित अन्य क्षेत्रीय दल गैरसैंण को प्रदेश की स्थाई राजधानी बनाने की मांग को लेकर आंदोलन तो कर रहीं हैं, लेकिन इन्होंने एक बार भी पहाड़ के गाँधी इंद्रमणि बडोनी को भारत रत्न देने की मांग नहीं उठाई। कुछ ऐसा ही फिल्ड मार्शल दिवाकर भट्ट के साथ भी हैं। दिवाकर भट्ट उत्तराखंड के एक भारतीय राजनीतिज्ञ थे और उन्होंने क्षेत्रीय पार्टी उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) के केंद्रीय अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। भट्ट 2007 से 2012 तक देवप्रयाग निर्वाचन क्षेत्र से उत्तराखंड विधानसभा के सदस्य रहे और उन्होंने 2002 और 2022 में यूकेडी से, 2012 में भाजपा से और 2017 में स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। वे यूकेडी के संस्थापक सदस्यों में से एक थे और उन्होंने उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भट्ट का निधन 25 नवंबर 2025 को हरिद्वार स्थित उनके आवास पर लंबी बीमारी के कारण 79 वर्ष की आयु में हुआ। उत्तराखंड राज्य आंदोलन में फील्ड मार्शल दिवाकर भट्ट का अहम योगदान था। युवावस्था से ही आंदोलन में सक्रिय, वे उत्तराखंड क्रांति दल के संस्थापक सदस्य थे। ये दोनों ही नेता उत्तराखंड मे अपना विशेष स्थान रखते हैं. लेकिन दुख की बात हैं की जिस उत्तराखंड क्रांति दल के लिए इन्होंने अपना पूरा जीवन लगा दिया उसी दल ने इनके सम्मान के लिए कोई कदम तक नहीं उठाया, जो मांग इन्हे करनी चाहिए थी वो शिव सेना कर रहीं हैं। शिव सेना का उत्तराखंड से दूर-दूर तक का कोई नाता नहीं हैं, लेकिन ये उसकी भावना ही तो हैं, जो उनके सम्मान की मांग उठा रहीं हैं। आज जब एसकेएम न्यूज़ सर्विस के ब्यूरो प्रभारी संदीप गोयल ने शिव सेना (शिंदे गुट) उत्तराखंड के मुख्य राज्य उप प्रमुख पंडित राकेश सकलानी से वार्ता की तो उन्होंने कहा की इंद्रमणि बडोनी उत्तराखंड के एक प्रमुख गांधीवादी नेता और राज्य आंदोलनकारी थे, जिन्हें ‘पहाड़ का गांधी’ कहा जाता है। उत्तराखंड राज्य निर्माण मे उनका सघर्ष कभी भुलाया नहीं जा सकता, वह उत्तराखंड वासियो के सदैव मार्ग दर्शक रहेगे। इंद्रमणि बडोनी को भारत रत्न मिलना चाहिए। शिव सेना इसकी पुरजोर मांग करती हैं। इसके लिये आवश्यकता पड़ने पर आंदोलन भी किया जायेगा। उन्होंने यह भी कहा की राज्य आंदोलन में फील्ड मार्शल दिवाकर भट्ट का अहम योगदान था। उनके नाम पर देहरादून मे चौक का नाम होना चाहिए. शिव सेना मांग करती हैं देहरादून के एस्लेहॉल चौक का नाम दिवाकर भट्ट के नाम पर किया जाये। इसके लिये शिव सेना ने देहरादून के डीएम और मेयर को ज्ञापन भी दिया हैं। इसके साथ ही एस्लेहॉल चौक पर स्वर्गीय दिवाकर भट्ट चौक का बोर्ड भी लगाया हैं। अब बड़ी बात यह हैं की जो मांग शिव सेना उठा रहीं हैं क्या वह उत्तराखंड क्रांति दल सहित अन्य क्षेत्रीय दल उठायेगे या नहीं।




