उत्तराखंड समाचार

मलिन बस्तियों के नियमितीकरण की मांग

राज्य के जन संगठनों ने उठाए राज्य सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल

देहरादून। राज्य के विभिन्न विपक्षी दलों के पदाधिकारियों ने उत्तराखंड राज्य सरकार से मांग करी की मलिन बस्तियों का जल्द से जल्द नियमितीकरण किया जाये।
आज प्रातः 11 :15 बजे उत्तरांचल प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में माकपा के सुरेंद्र सिंह सजवाण समेत अन्य वक्ताओं ने सरकार से मलिन बस्तियों के नियमितीकरण की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने अतिक्रमण हटाने के नाम पर गरीब जनता को परेशान किया तो वह आंदोलन करने के लिए मजबूर हो जाएंगे। राज्य के जन संगठनों एवं विपक्षी दलों ने एक प्रेस वार्ता द्वारा राज्य सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए। हाल में खबर आ रही है कि राज्य में अवैध निर्माण हटाने के नाम पर कुछ मलिन बस्तियों को भी उजाडा जा रहा है। प्रेस वार्ता द्वारा वक्ताओं ने सरकार को याद दिलाया कि सत्ताधारी दल और राज्य सरकार ने जुलाई 2021 में राजधानी भर विज्ञापन लगा कर घोषित किया था कि उन्होंने अध्यादेश का नवीनीकरण कर राज्य में सारे मलिन बस्तियों को सुरक्षा दिया। वक्ताओं ने इस बात को भी उठाया कि 2018 से लगातार मांग उठ रही है कि अतिक्रमण हटाने के नाम पर किसी भी परिवार को बेघर नहीं किया जाना चाहिए। इस पर सरकार अपनी राय स्पष्ट करे। 2018 में उच्च न्यायलय ने आदेश दिया था कि देहरादून की कई मलिन बस्तियों को हटाया जाये। जन आंदोलन होने के बाद सरकार द्वारा अध्यादेश लाया गया, जिसके अंतर्गत तीन साल के लिए बेदखली की प्रक्रिया निलंबित की थी। मार्च 2021 में फिर आंदोलन होने के बाद सरकार ने घोषित किया कि अध्यादेश तीन साल और के लिए एक्सटेंड किया जा रहा है। लेकिन कुछ सप्ताहों से खबर आ रही है कि हल्द्वानी, देहरादून, रुद्रपुर, और अन्य जगहों में मलिन बस्तियों को उजाडा जा रहा है। जब तक अध्यादेश है, इस कारवाई पर रोक क्यों नहीं है? वक्ताओं ने कहा कि आश्रय का अधिकार सरकार की ज़िम्मेदारी है। अतिक्रमण हटाने के नाम पर किसी भी परिवार को बेघर नहीं किया जाना चाहिए। किसी भी परिवार को बेघर करना बच्चों, बुज़ुर्गों, गरीबों और बीमार व्यक्तियों के लिए घातक हो सकता है। इसलिए इसपर क़ानूनी रोक होना चाहिए। इसके अतिरिक्त मज़दूर और गरीब वर्ग को किफायती आवास न मिलना, यह सरकार की गलत नीतियों का नतीजा है। जैसे मार्च 2021 में ही संयुक्त जन आंदोलन द्वारा मांग उठायी गयी थी, सरकार पारदर्शिता के साथ बस्तियों का नियमितीकरण करना चाहिए। जहाँ पर सरकार को लगता है कि बस्ती को पुनर्वास करने की ज़रूरत है, प्रभावितों की सहमति से ही पुनर्वास की योजना बने और पुनर्वास स्थल की दूरी पांच किलोमीटर से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। निर्माण मज़दूर कल्याण कोष द्वारा सरक़ार मज़दूर हॉस्टलों की स्थापना करे,जहां पर मजदूर निशुल्क रह सकें। सरकार बस्तियों के निकट कम किराये पर भी आवास उपलब्ध कराये, जहाँ पर मज़दूर रह सकें। इस योजना के निर्माण का काम निर्माण मज़दूरों के सहकारी समितियों या प्रोड्यूसर कम्पनियों द्वारा किया जाय, जिससे व्यय भी कम होगा और लोगों को रोज़गार भी मिलेगा। कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता हीरा सिंह बिष्ट, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव समर भंडारी, चेतना आंदोलन के शंकर गोपाल, और आल इंडिया किसान सभा के राज्य सचिव सुरेंद्र सजवाण ने प्रेस वार्ता को संबोधित किया। राज्य के और जन संगठनों ने भी मांगों को समर्थन किया। कांग्रेस पार्टी के प्रदेश महामंत्री शोभा राम और प्रदेश सचिव पुनीत त्यागी भी मंच पर रहे। विनोद बडोनी ने कार्यक्रम का संचालन किया।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button