उत्तराखंड समाचार

हरीश रावत से मिलने पहुंचे नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष

संगठनात्मक मजबूती में जुटे रहने का तोहफा मिल गया।

देहरादून। उत्तराखंड कांग्रेस के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा अपनी नई पारी शुरू करने से पहले पूर्व मुख्‍यमंत्री हरीश रावत से मिलने पहुंचे। सोमवार को माहरा हरीश रावत के आवास पर पहुंचे। इस दौरान करन माहरा ने पूर्व मुख्यमंत्री का आशीर्वाद लिया। कांग्रेस के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष माहरा ने कहां कि वह पार्टी के सभी नेताओं को साथ लेकर चलेंगे। वह पार्टी के जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं में जोश भरने का करेंगे काम।

विधानसभा चुनाव में जीत का सिलसिला दोहराने से चूके पूर्व विधायक करन सिंह माहरा को गुटबाजी के इतर संगठनात्मक मजबूती में जुटे रहने का तोहफा मिल गया। करीब दो दशक के अपने सियासी सफर में दो बार विधायक रह चुके माहरा पार्टी में बड़ा पद लेने के लिए खेमेबाजी से दूर रहे। यही वजह रही कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए माहरा के दावा पेश करने पर संगठन के क्षत्रपों ने आपत्ति के बजाय मौन सहमति दे दी। माहरा को कांग्रेस के प्रदेश मुखिया बनाए जाने से हार से हताश कार्यकर्ताओं को कुछ बल भी मिला है। 2017 के विस चुनाव में तब नेताप्रतिपक्ष व भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे अजय भट्ट को हराने के बाद से ही पार्टी में करन माहरा का कद बढ़ गया था। उन्हें संगठन तेजतर्रार युवा नेता के रूप में महत्व देने लगा था। वहीं सदन में उपनेता प्रतिपक्ष के रूप में मित्र विपक्ष के इतर आक्रामक रुख व प्रश्नकाल में सरकार और उनके मंत्रियों की घेराबंदी की शैली भी माहरा के लिए प्रदेश व शीर्ष नेतृत्व तक पहचान दिलाने में मददगार बनी। नतीजतन, अबकी विस चुनाव में भाजपा प्रत्याशी प्रमोद नैनवाल से 2480 मतों से हारे कांगे्रसी नेता करन माहरा को संगठन ने प्रदेश अध्यक्ष की बड़ी जिम्मेदारी देकर पार्टी को युवा बनाने का संकेत भी दिया है। उत्तर प्रदेश सरकार में वन एवं पर्यावरण मंत्री रहे गोविंद सिंह माहरा के पुत्र करन सिंह माहरा को राजनीति विरासत में मिली है। उनके बड़े भाई पूरन सिंह माहरा भी रानीखेत सीट से विधायक थे। विद्यार्थी जीवन में पृथक पर्वतीय प्रदेश के पैरोकार, जल, जंगल व जमीन के लिए चल रहे संघर्ष के दौरान माहरा राज्य गठन से पूर्व क्षेत्रीय दल उत्तराखंड क्रांति दल में शामिल हो गए। उक्रांद के थिंक टैंक बिपिन त्रिपाठी उर्फ बिपिनदा की अगुआई में उन्होंने राज्य आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। वर्ष 2003 ताड़ीखेत के सबसे युवा ब्लॉक प्रमुख चुने जाने के बाद उन्हें कांग्रेस में शामिल कर लिया गया।

 

 

 

 

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