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उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारी मंच का सचिवालय मार्च

उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारी मंच ने किया सचिवालय मार्च

एस.के.एम. न्यूज़ सर्विस
देहरादून, 18 मार्च। आज उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारी मंच द्वारा राज्य आंदोलनकारियों के मामलों मॆं मुख्यमन्त्री की घोषणा एवं शासनादेशों व एक्ट का सही से पालन नहीं किये जाने को लेकर गांधी पार्क के मुख्य द्वार से सचिवालय मार्च किया। पुलिस प्रशासन द्वारा सभी को पुलिस मुख्यालय से पहले बेरियर लगाकर रोक दिया गया, इससे राज्य आंदोलनकारी वहीं धरने देकर बैठ गये और नारेबाजी करने लगे। प्रदर्शन कर रहें आंदोलनकारियों को सचिवालय से गृह सचिव से वार्ता हेतु नगर मजिस्ट्रेट प्रत्यूष कुमार द्वारा एव गृह सचिव के निजी सचिव ने वार्ता हेतु बुलाया गया। वार्ता मॆं प्रदेश प्रवक्ता, जिला अध्यक्ष प्रदीप कुकरेती, प्रदेश महासचिव रामलाल खंडूड़ी, पूर्व राज्य मन्त्री धीरेन्द्र प्रताप, खटीमा से विक्रम सिंह धामी एवं चमोली से आनन्द सिंह राणा रहें। जिसमें सचिव गृह शैलेश बगोलीं के साथ बिंदुवार चर्चा हुई, इसमें विभाग के अधिकारी व कर्मचारी व नगर मजिस्ट्रेट भी मौजूद रहें और जल्द इसका निस्तारण करने की दिशा मॆं कार्य करने का आश्वासन दिया। सुभाष रोड़ सचिवालय से पहले ही धरने मॆं बैठे आंदोलनकारियों मॆं प्रदेश अध्यक्ष जगमोहन सिंह नेगी एवं विक्रम सिंह धामी के साथ आनन्द सिंह राणा ने कहा क़ि आयोग द्वारा परीक्षा पास होने के बाद भी चक्कर कटाये जा रहें हैं। राज्य आंदोलनकारी आयोग व शासन के बीच फुटबाल बना हुआ हैं। पूर्व राज्य मन्त्री धीरेन्द्र प्रताप एवं प्रदेश प्रवक्ता के साथ महासचिव रामलाल खंडूड़ी ने कहा क़ि जहां सरकार व शासन ने क्षैतिज आरक्षण का एक्ट बनाया तों वहीं कुछ कर्मचारी अधिकारियों ने उस आदेश मॆं चीरफाड़ कर राज्य आंदोलनकारी को बाँटने का कार्य कर रहें हैं। आज भी ना तों उम्र सीमा बढ़ाई गई साथ ही समूह ग और पुलिस भर्ती के साथ फार्मा के बेरोजगार दर दर विधायकों और मंत्रियों के चक्कर काटने को मजबूर हैं और उनके माता पिता अलग परेशान हैं। स्थापना दिवस पर मुख्यमन्त्री की घोषणा के बावजूद आज तक वह अमल नहीं हो पाये रहें हैं। वर्ष 2004/5 के शासनादेश के अनुसार सरकार ने राज्य आंदोलनकारियों को सीधे रोजगार मॆं निहित किया गया था लेकिन आज भी कई राज्य आंदोलनकारियों को पेंशन सुविधा से वंचित किया गया हैं। इससे उनके आक्रोश व्याप्त हैं। सुलोचना भट्ट एवं द्वारिका बिष्ट के साथ रामेश्वरी नेगी ने कहा क़ि राज्य बनाने के बाद भी हमें आज भी सड़कों पर आने को विवश होना पड़ रहा हैं। चिन्हीकरण के मामलों मॆं हर जिले मॆं अपने हिसाब से मानकों को तय कर रहें हैं और परिणाम फिर भी शून्य अतः पांचवें मानक मॆं लचीला रुक अपनाया जायं ताकि उस दौर के लोगो का चिन्हीकरण आसानी से किया जा सकें।
आज मार्च मॆं केशव उनियाल, विक्रम सिंह धामी, आनन्द सिंह राणा, जगमोहन सिंह नेगी, धीरेन्द्र प्रताप, रामलाल खंडूड़ी, प्रदीप कुकरेती, विशम्भर दत्त बौंठियांल, पूरण सिंह लिंगवाल, रामेश्वरी नेगी, सुलोचना भट्ट, राधा तिवारी, द्वारिका बिष्ट, अरुणा थपलियाल, दुर्गा ध्यानी, विमला रावत, साबी नेगी, संगीता रावत, आशा डंगवाल, कल्पेश्वरी नेगी, सरोज, सुलोचना मैन्दोला, मोनिका लखेड़ा, केशव उनियाल, युद्धवीर सिंह चौहान, हरीश सिंह, जगदीश कुकरेती, विकास राणा, कमलेश नौटियाल, गुड्डू सिंह, कमला जुयाल, सुशील चमोली, गणेश डंगवाल, संजय बलूनी, गोविन्द सिंह गुसांई, राकेश काण्डपाल, विवेक बलोंदी, सोबन सिंह सजवाण, देवेश्वर काला, चन्द्रकिरण राणा, मोहन खत्री, महेन्द्र, अखिलेश भट्ट, राजेन्द्र बहुगुणा, बलबीर सिंह नेगी, पुरषोत्तम सेमवाल, यशोदा रावत, आशा नौटियाल, शकुन्तला लखेड़ा, सुबोधनी भट्ट आदि मुख्य रूप से मौजूद रहें।

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