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भारत परमाणु अनुसंधान के क्षेत्र में और अधिक मजबूती से उभरा: उपराष्ट्रपति

यह देश के परमाणु अनुसंधान के लिए एक बड़ा झटका था। हा

नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज भुवनेश्वर स्थित राष्ट्रीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (नाइसर) के 15वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए युवा वैज्ञानिकों से राष्ट्र निर्माण में विज्ञान एवं नवाचार का प्रभावी उपयोग करने तथा अपने कार्यों में सत्यनिष्ठा और सामाजिक उत्तरदायित्व के उच्चतम मानकों का पालन करने का आह्वान किया। नाइसर को विज्ञान, नवाचार और बौद्धिक नेतृत्व के क्षेत्र में भारत की आकांक्षाओं का प्रतीक बताते हुए श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि मौलिक विज्ञानों को समर्पित संस्थान ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने, प्रौद्योगिकी उन्नयन, राष्ट्रीय सुरक्षा तथा दीर्घकालिक विकास को आगे बढ़ाने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि नाइसर वैज्ञानिक शिक्षा एवं अनुसंधान के एक अग्रणी केन्द्र के रूप में उभरा है और देश के लिए उच्च कौशलयुक्त वैज्ञानिक मानव संसाधन तैयार करने में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि वर्तमान समय में विश्व जलवायु परिवर्तन, उभरती बीमारियों तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), क्वांटम कंप्यूटिंग और उन्नत सामग्रियों के क्षेत्र में तीव्र प्रगति जैसी अभूतपूर्व संभावनाओं और जटिल चुनौतियों का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में विज्ञान का दायित्व केवल ज्ञान का सृजन करना ही नहीं, बल्कि नीति-निर्माण का मार्गदर्शन करना और दीर्घकालिक विकास सुनिश्चित करना भी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत जैसे विशाल जनसांख्यिकीय क्षमता और विकास की आकांक्षाओं वाले देश के लिए वैज्ञानिक क्षमता कोई विकल्प नहीं, बल्कि ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की प्राप्ति का आधार है।
अलग-अलग पृष्ठभूमि वाले विशेषज्ञों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने का आह्वान करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि वर्तमान समय की जटिल चुनौतियों का समाधान किसी एक विषय की सीमाओं में रहकर नहीं किया जा सकता। उन्होंने स्नातक होने वाले विद्यार्थियों से जिज्ञासा की भावना को निरंतर विकसित करने, सत्यनिष्ठा बनाए रखने, चुनौतियों को अवसर के रूप में स्वीकार करने तथा अपने ज्ञान का उपयोग समाज के व्यापक हित में करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विज्ञान केवल उत्तर खोजने का माध्यम नहीं है, बल्कि सही प्रश्न पूछने की क्षमता विकसित करने का भी आधार है।
विज्ञान एवं नवाचार के क्षेत्र में भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि अंतरिक्ष अभियानों, टीका विकसित करने, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना तथा नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों ने देश को वैश्विक स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाई है। उन्होंने स्नातकों से महत्वाकांक्षा और उत्तरदायित्व तथा प्रगति और संवेदनशीलता के बीच संतुलन बनाए रखने का आग्रह करते हुए कहा कि उनका अनुसंधान, उनके विचार और उनकी सत्यनिष्ठा ही समाज के भविष्य को दिशा देंगे।
डॉ. होमी भाभा की विरासत को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि नाइसर जैसे संस्थान प्रतिभाशाली वैज्ञानिक तैयार करके, भारत की समृद्ध वैज्ञानिक परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं जो, प्राथमिक विज्ञान, परमाणु ऊर्जा, स्वास्थ्य भौतिकी तथा उभरते हुए अन्य अलग-अलग क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उन्होंने नाइसर के पूर्व छात्रों की भी सराहना करते हुए कहा कि वे भारत और विदेशों में अनुसंधान तथा शैक्षणिक उत्कृष्टता के माध्यम से भारत की वैज्ञानिक पहचान को और सुदृढ़ कर रहे हैं।
डॉ. होमी भाभा के निधन का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें आज भी वह दिन याद है, जब उनके पिता ने उन्हें डॉ. होमी भाभा के निधन का समाचार दिया था। उन्होंने कहा कि यह देश के परमाणु अनुसंधान के लिए एक बड़ा झटका था। हालांकि, भारत ने उस दु:खद घटना से मजबूती से उबरा और आज परमाणु अनुसंधान के क्षेत्र में उसने विश्व के सबसे सक्षम और अग्रणी देशों में अपना स्थान बनाया है। उपराष्ट्रपति ने आशा व्यक्त की कि नाइसर से स्नातक होने वाले अनेक विद्यार्थी भविष्य के डॉ. होमी भाभा बनकर भारत की वैज्ञानिक एवं तकनीकी प्रगति में उल्लेखनीय योगदान देंगे।
इस समारोह में ओडिशा के राज्यपाल श्री हरि बाबू कंभमपति, ओडिशा के मुख्यमंत्री श्री मोहन चरण माझी, केन्द्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेन्द्र प्रधान, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा तथा अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह, परमाणु ऊर्जा विभाग के सचिव एवं नाइसर के अध्यक्ष डॉ. अजीत कुमार मोहंती, नाइसर के निदेशक एवं शैक्षणिक परिषद के अध्यक्ष प्रो. एच. एन. घोष, वरिष्ठ अधिकारी, विभाग के सदस्यों, स्नातक विद्यार्थियों, उनके अभिभावकों तथा अनेक गणमान्य अतिथियों ने हिस्सा लिया।

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