श्री बदरीनाथ धाम के समीप कंचनगंगा के गैर आबादी क्षेत्र में हिमस्खलन
वहीं प्रदेश में एवलॉन्च के चलते पहले भी कई दुखद घटनाएं हो चुकी हैं।

देहरादून। बदरीनाथ धाम के निकट कंचनगंगा क्षेत्र में ग्लेशियर टूटने की घटना हुई है। हालांकि राहत की बात यह है कि इस घटना में किसी भी प्रकार के नुकसान की सूचना नहीं है। पर्वतीय अंचलों में तेज धूप और रात में तापमान गिरने से ग्लेशियरों में दरारें पड़ने और बर्फ के हिस्से खिसकने से ऐसी घटनाएं सामने आती हैं। हिमालयी क्षेत्रों में इस तरह की घटनाएं अक्सर सामने आती रहती हैं। स्थानीय प्रशासन और पुलिस विभाग ने स्थिति पर नजर बनाए रखी है। बताया जा रहा है कि गर्मी बढ़ने के साथ ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ग्लेशियर तेजी से पिघलने लगते हैं, जिसके चलते इस प्रकार की घटनाएं सामने आती रहती हैं।
चमोली पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार ने बताया कि कंचनगंगा क्षेत्र में ग्लेशियर टूटने से किसी प्रकार की क्षति नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि हर वर्ष यह ग्लेशियर धीरे-धीरे नीचे की ओर खिसकता है और आगे चलकर कंचनगंगा क्षेत्र में आकर रुक जाता है। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और संवेदनशील क्षेत्रों में सतर्कता बरतने की अपील की है।
विगत अक्टूबर 2025 में बदरीनाथ धाम में कंचन गंगा के पास ग्लेशियर टूटा था। राहत की बात ये रही कि इस एवलांच वाली घटना में किसी भी तरह के जान-माल के नुकसान नहीं हुआ था। वहीं चमोली पुलिस ने ग्लेशियर टूटने की पुष्टि की थी। फरवरी 2025 में चमोली के बदरीनाथ धाम से आगे चीन सीमा के पास माणा में हिमस्खलन की घटना घटित हुई थी। इस घटना में काम कर रहे 54 मजदूर दब गए थे, जिममें से 46 लोगों को भारतीय सेना और भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के जवानों ने रेस्क्यू किया था। इस घटना में 8 लोगों की मौत हो गई थी। वहीं प्रदेश में एवलॉन्च के चलते पहले भी कई दुखद घटनाएं हो चुकी हैं। जिसमें कई लोगों की जान तक जा चुकी है। ऐसे में हिमालयी क्षेत्रों में इस तरह की हलचल पर आपदा विभाग और प्रशासन पैनी नजर रखता है।




