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बिगड़ती कानून व्यवस्था सुधारने की मांग, सीएम को भेजा ज्ञापन

देहरादून। बिगड़ती कानून व्यवस्था सुधारने व शिक्षा निदेशक व कर्मचारियों पर हमला करने वालों को गिरफ्तार करने की मांग को लेकर जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन। आज विभिन्न राजनैतिक दलों एवं जनसंगठनों के प्रतिनिधियों ने आज बिगड़ती कानून व्यवस्था तथा निदेशक पर हमले में लिप्त सभी आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया ।ज्ञापन उपजिलाधिकारी मुख्यालय श्रीमती अपूर्वा सिंह ने लिया ,उन्होंने आवश्यक कार्यवाही का आश्वासन दिया। उत्तराखण्ड के मुख्यमन्त्री को सम्बोधित ज्ञापन में देहरादून में 21 फरवरी 2026 को प्रारंभिक शिक्षा निदेशक अजय कुमार नौडियाल पर हुए जानलेवा हमले ने पूरे प्रदेश में आमजन में असुरक्षा एवं भय का वातावरण बना हुआ जब शिक्षा निदेशक की सुरक्षित नहीं है तो आम आदमी की सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं है , इससे पहले भी महीनों देहरादून में इस घटना ने न सिर्फ शिक्षा विभाग व राज्य कर्मचारियों व आमजन में आक्रोश पैदा कर दिया है, बल्कि प्रदेश की बिगड़ती कानून व्यवस्था पर भी पुनः गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं ।यह उल्लेखनीय है कि इन तमाम घटनाओं में सत्ता से जुड़े विधायक व नेता यातो शामिल हैं या फिर अपराधियों को वे संरक्षण दे रहे हैं। ज्ञापन में सवाल उठाया गया,गत 21 फरवरी 026 ननूरखेड़ा स्थित प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय में शनिवार दोपहर की है, जहां रायपुर ब्लॉक के अस्थल स्थित एक प्राथमिक विद्यालय के नामकरण के विवाद को लेकर कुछ लोग विधायक रायपुर श्री उमेश काऊ के नेतृत्व में निदेशक से मिलने पहुंचे थे। इसी दौरान वहां मौजूद रायपुर के विधायक उमेश शर्मा काऊ के साथ बातचीत के दौरान बहस इतनी बढ़ गई कि हमलावरों ने निदेशक नौडियाल पर जानलेवा हमला कर दिया। इस हमले में निदेशक के सिर में गंभीर चोटें आईं, जिनमें चार टांके लगे और उनका चश्मा भी टूट गया ,यह भी खेद का बिषय है कि रिपोर्ट दर्ज होने के बावजूद प्रभावशाली लोगों को अभी तक गिरफ्तारी न होना कानून व्यवस्था के साथ मजाक है जो कि चिन्ता का बिषय है इससे पहले वर्तमान कैबिनेट मन्त्रि गण़ेश जोशी, पूर्व विधायक प्रवण सिंह आदि में अधिकारियों के साथ मारपीट व गालिगलौज में शामिल रहे हैं। ज्ञापन में कहा गया गत दिनों हुई घटना में पीड़ित निदेशक अजय कुमार नौडियाल ने स्पष्ट रूप से आरोप लगाया है कि विधायक के कहने पर ही कार्यालय का दरवाजा बंद कर उन पर हमला किया गया। उन्होंने बताया कि वह विद्यालय के नाम परिवर्तन संबंधी फाइल शासन को भेजे जाने की जानकारी पहले ही दे चुके थे, फिर भी उनके साथ यह नियोजित हमला हुआ। इस घटना ने शिक्षक संगठनों को एकजुट कर दिया है। राजकीय शिक्षक संघ ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि अगर हमलावरों की तत्काल गिरफ्तारी नहीं हुई, तो उत्तराखंड बोर्ड की परीक्षाओं का बहिष्कार किया जाएगा। टिहरी के शिक्षकों ने इसे “सम्पूर्ण शिक्षक समाज का अपमान” बताते हुए अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी दी है ,यह अपमान केवल शिक्षा निदेशक का ही नहीं हुआ है, यह सम्पूर्ण शिक्षक समाज का अपमान है।
ज्ञापन में अपराधिक घटना में विधायक उमेश शर्मा काऊ द्वारा खेद जताना मामले में लीपापोती के सिवाय कुछ नहीं है उनका कहना कि वह हमेशा अधिकारियों और कर्मचारियों का सहयोग करते रहे हैं और मुख्यमंत्री कानून व्यवस्था को लेकर गंभीर हैं,जो कि हास्यास्पद है । इस घटना ने फिर से प्रदेश की कानून व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं घटना सरकारी कार्यालय, यानी शिक्षा निदेशालय में घटी, जहां एक वरिष्ठ अधिकारी को सुरक्षा नहीं मिल सकी ,एक जनप्रतिनिधि की मौजूदगी में सरकारी कार्यालय में तोड़फोड़ और हमले ने लोकतांत्रिक मर्यादाओं को गंभीर चोट पहुंचाई है। प्रशासनिक भय का माहौल: शिक्षक संघ के नेताओं ने सवाल उठाया है कि जब शीर्ष अधिकारी ही सुरक्षित नहीं हैं, तो एक आम शिक्षक की क्या स्थिति होगी। ज्ञापन में कहा गया है कि पुलिस ने निदेशक नौडियाल की तहरीर पर विधायक समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। हालांकि, अभी तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी न होना पुलिस पर सत्तापक्ष का दबाव स्पष्ट परिलक्षित होता है। प्रदेश भाजपा ने इस पूरे घटनाक्रम को दुर्भाग्यपूर्ण बताना प्रर्याप्त नहीं है। ज्ञापन में आरोपियों की गिरफ्तारी व राज्य में कानून व्यवस्था सुधारने की मांग प्रमुखता से उठाई गई। इस अवसर पर सचिव अनन्त आकाश ,सीआईटीयू महामन्त्रि लेखराज,उत्तराखण्ङ आन्दोलनकारि संयुक्त परिषद के संरक्षक नवनीत गुसांई, राष्ट्रीय उत्तराखण्ड पार्टी के महामंत्री बालेश बबानिया, नेताजी संघर्ष समिति के केन्द्रीय अध्यक्ष प्रभात डण्डरियाल, यूकेडी की नेत्री प्रमिला रावत,सीआईटीयू के उपाध्यक्ष भगवन्त पयाल,सचिव अभिषेक भण्डारी, संयुक्त परिषद के अध्यक्ष सुरेश कुमार, राजेश शर्मा एआईएलयू के एडवोकेट शान्ति प्रसाद, हिमान्शु चौहान, नितिन आदि मौजूद थे।

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