उत्तराखंड समाचार

संगठन ने शिक्षकों की निगरानी पर उठाए सवाल, कहा-यह काम अधिकारियों का, न कि प्रधानाचार्य या प्रवक्ताओं का

उप शिक्षाधिकारी के आदेश के बाद निरीक्षण का दौर शुरू हुआ।

हल्द्वानी : ओखलकांडा ब्लाक के कुछ दूरस्थ स्कूलों में शिक्षकों के अनुपस्थित रहने की शिकायत के बाद उपशिक्षा अधिकारी की ओर से बनाया गया निगरानी तंत्र शिक्षक संगठन को नागवार गुजरा है। शिक्षक नेताओं का तर्क है कि निरीक्षण का अधिकार बीईओ, उपशिक्षा अधिकारी व उससे ऊपर के अधिकारियों को है। प्रधानाचार्य या प्रवक्ताओं की ओर से स्कूलों का निरीक्षण करना शिक्षकों का उत्पीड़न है।उप शिक्षाधिकारी ओखलकांडा कमलेश्वरी मेहता की ओर से 21 मार्च को जारी दो अलग-अलग आदेश के बाद यह मामला चर्चा में आया। प्राथमिक विद्यालय पटरानी व म्यूड़ी के संबंध में जीआइसी पटरानी के प्रधानाचार्य के नाम जारी आदेश में दोनों स्कूलों की अग्रिम आदेश तक नियमित निगरानी कर सुबह-शाम की उपस्थिति वाट्सएप पर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।दोनों स्कूलों में प्रधानाध्यापक महिलाएं हैं व रोजाना हल्द्वानी से आना-जाना करते हैं। उप शिक्षाधिकारी के आदेश के बाद निरीक्षण का दौर शुरू हुआ। उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष मनोज तिवारी ने सीईओ को पत्र लिखकर मामले का समाधान कराने की मांग की है। इंटरनेट मीडिया में शिक्षक संगठनों के ग्रुप में भी यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।उपशिक्षाधिकारी के निर्देश पर 22 मार्च को मो. सलीम, किशन बिष्ट प्रवक्ता ने प्राथमिक विद्यालय म्यूड़ी का औचक निरीक्षण किया। प्रधानाध्यापिका कविता गौड़ सीआरसी में बैठक में गई थीं। इससे पहले 11 मार्च को उप शिक्षाधिकारी के निरीक्षण में भी शिक्षिका स्कूल में मिली थीं। विद्यालय प्रबंध समिति ने उपशिक्षाधिकारी को तीन पृष्ठों का पत्र भेजकर नियमित निगरानी आदेश रद करने का आग्रह किया है।

 

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