उत्तराखंड समाचार

रिस्पना व बिन्दाल पर ऐलिवेटेड रोड बनाना होगा विनाशकारी

सरकार बताए एलिवेटेड रोड के पर्यावरणीय प्रभावों का अध्ययन करवाया

देहरादून। प्रदेश कांग्रेस ने उत्तराखंड सरकार के देहरादून की रिसना व बिंदल नदियों पर एलिवेटेड रोड बनाने के निर्णय को देहरादून घाटी के लिए विनाशकारी निर्णय बताया। श्री धस्माना ने कहा कि देहरादून की विषम भौगोलिक परिस्थितियों में प्रकृति ने पूरब दिशा में रिसना और पश्चिम दिशा में बिंदल नदी सौगात में दी जिसमें पूरे कैचमेंट छेत्र का पानी व बरसात का पानी समा जाता है और देहरादून की जनता को बाढ़ का प्रकोप नहीं झेलना पड़ता । श्री धस्माना ने कहा कि राज्य बनने से पूर्व देहरादून में पूर्व दिशा में ईस्ट कैनाल व पश्चिम दिशा में वेस्ट कैनाल थीं जिनमें बरसात का शहर के अंदरूनी क्षेत्रों का पानी समा जाता था किंतु राज्य निर्माण के बाद ट्रैफिक का भार झेलने के लिए सड़कों के चौड़ीकरण के कारण यह दोनों नहरें भूमिगत कर दी गई जिसके कारण अब शहर के अंदरूनी हिस्सों का पानी इन नहरों में ना जा कर सड़कों पर बहता है और पूरी बरसात देहरादून शहर को जल भराव की समस्या से जूझना पड़ता है। श्री धस्माना ने कहा कि अब जो एलिवेटेड रोड का शोर हो रहा है और लोग खुश हो रहे हैं उनको इस बात का अंदाजा नहीं है कि इसके क्या दुष्परिणाम झेलने पड़ेंगे। श्री धस्माना ने कहा कि एक तो रिसना व बिंदल दोनों जीवित व बहती हुई नदियां हैं और इसके जल स्रोत अभी भी जीवित हैं ऐसे में इन नदियों के बीचों बीच एलिवेटेड रोड बनाने के लिए नदियों में कंक्रीट के पिलर डालने पड़ेंगे जिससे नदी में बहने वाले पानी के लिए प्राकृतिक रास्ता बाधित होगा व उससे शहर में बाढ़ आने का खतरा बढ़ेगा व दूसरा पानी रिचार्ज का जरिए भी बहुत सिकुड़ जाएगा और भू जल स्तर जो पहले ही बहुत घर गया है बुरी तरह प्रभावित होगा। श्री धस्माना ने कहा कि पूरे एलिवेटेड रोड जो लगभग २५ से ३० किलोमीटर बनेगी उससे शहर का तापमान जो पहले ही ४५ डिग्री पार कर चुका है और बढ़ेगा। श्री धस्माना ने कहा कि इसके अलावा इस पूरी परियोजना के बनाने के लिए लगभग ढाई से तीन हजार मकानों व इमारतों को तोड़ा जाएगा उसके लिए सरकार ने अभी तक कोई पुनर्वास योजना तैयार नहीं की। कुल मिलाकर यह योजना देहरादून की जनता पर भरी पड़ने वाली है जबकि लोगों को।स्मार्ट सिटी की तरह सब्जबाग दिखाए जा रहे हैं जिसकी हकीकत अब जनता के सामने उजागर हो चुकी है जिसमें हजारों करोड़ रुपए खर्च करने के बाद भी शहर कितना स्मार्ट बना यह सब के सामने है।

 

 

 

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