उत्तराखंड समाचार

गाय को समझने वाला ही वास्तविक ज्ञानी

वेदों में गाय को माना गया सगुण ब्रह्म का प्रतिनिधि

हरिद्वार। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष एव माँ मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट हरिद्वार के अध्यक्ष महंत रविंद्र पूरी ने कहा की भगवान श्री कृष्ण ने गीता में लिखा है गाय को समझने वाला ही वास्तविक ज्ञानी है, जिसको ब्रह्मज्ञान का आनंद प्राप्त होता है। गाय की रक्षा करना हमारा धर्म है, क्योंकि वह तीनों लोकों में सुरक्षितता प्रदान करती है। गाय हमारी माता है और गौ हत्या को महापाप माना जाता है। भारतीय संस्कृति में गाय को पवित्रता, प्रेम, और सम्मान का प्रतीक माना जाता है। गाय को गौ माता कहकर सम्मान दिया जाता है, जिससे उसकी रक्षा और संरक्षण को गर्व के साथ किया जाता है। वेदों में गाय को सगुण ब्रह्म का प्रतिनिधि माना गया है। गाय के दुग्ध से बनी दही, घी, उपासनीय आहुति, इत्यादि यज्ञों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। पुराणों में भी गाय को देवी का रूप माना गया है और उसकी सेवा और संरक्षण को महत्व दिया गया है। हिंदू धर्म के शास्त्रों में गौ हत्या को महापाप के रूप में वर्णित किया गया है। गौ हत्या को करने वाले को अत्यंत दंड और प्रायश्चित का सामना करना पड़ता है। गौ हत्या की निंदा और उसके प्रति कठोरता का संकेत हिंदू धर्म के शास्त्रों में मिलता है। गाय का सम्मान और संरक्षण करना हमारा धर्मिक और मानवीय दायित्व है। गाय का अपमान और हत्या करने से हम न केवल धार्मिक उतार-चढ़ाव में पड़ते हैं, बल्कि प्राकृतिक संतुलन को भी प्रभावित करते हैं। इसलिए, हमें गाय का सम्मान करते हुए उसकी हत्या को रोकने के लिए कठोर कदम उठाने की आवश्यकता है। गाय को माता कहकर सम्मानित करने का अर्थ है कि हमें उसकी संरक्षण की जिम्मेदारी लेनी चाहिए और उसके साथ उत्तम व्यवहार करना चाहिए। इससे हम न केवल धार्मिक नैतिकता को बढ़ावा देते हैं, बल्कि प्राकृतिक संतुलन को भी बनाए रखने में सहायक होते हैं।

 

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