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गृह मंत्रालय ने देश में कानून-व्यस्था को और सुदृढ़ करने के अनेक परिवर्तन किए : अमित शाह

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने आज़ादी के 75 से 100 साल के बीच के कालखंड को अमृतकाल का नाम दिया है।

देहरादून। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज उत्तराखंड के देहरादून में 49वीं अखिल भारतीय पुलिस विज्ञान कांग्रेस को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित किया। इस अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी, केन्द्रीय गृह सचिव और BPR&D के महानिदेशक सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। अपने संबोधन में श्री अमित शाह ने कहा कि ये 49वीं अखिल भारतीय पुलिस विज्ञान कांग्रेस बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि ये सम्मेलन अमृतकाल में हो रही पहली पुलिस विज्ञान कांग्रेस है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने आज़ादी के 75 से 100 साल के बीच के कालखंड को अमृतकाल का नाम दिया है। ये अमृत काल की यात्रा भारत के हर नागरिक के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रधानमंत्री जी ने इस काल को हम सबके सामने संकल्प और उसे सिद्ध करने के काल के रूप में रखा है। श्री शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने देशवासियों के सामने ये लक्ष्य रखा है कि जब देश की आज़ादी की शताब्दी मनाई जाएगी, उस वक्त विश्व में हर क्षेत्र में भारत सर्वप्रथम हो, ऐसे भारत का निर्माण करना है। उन्होंने कहा कि ऐसा करने के लिए हर क्षेत्र में परिश्रम की पराकाष्ठा करनी होगी और इसकी पहली शर्त है कि देश की कानून-व्यवस्था, आंतरिक सुरक्षा और सीमाओं की सुरक्षा चाक-चौबंद हों। उन्होंने कहा कि कोई भी देश जब तक अपनी आंतरिक सुरक्षा और सीमाओं की सुरक्षा चाक-चौबंद नहीं करता, तब तक विकास नहीं हो सकता। कानून-व्यवस्था की अच्छी स्थिति ही विकास के लिए पहली शर्त है और इसके लिए आज़ादी के अमृत महोत्सव के वर्ष में गृह मंत्रालय ने देश में कानून-व्यस्था को और सुदृढ़ करने के अनेक परिवर्तन किए हैं, अमृतकाल में इन परिवर्तनों को जमीन पर उतार कर इनका सुफल देश को देने का समय है। केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में 2019 से 2023 तक देश में हर क्षेत्र में कई बदलाव किए गए हैं। उन्होंने कहा कि भारत सरकार के गृह मंत्रालय से लेकर देश के अंतिम पुलिस थाने तक इन परिवर्तनों को ज़मीन पर उतारने का पूरा खाका इस पुलिस विज्ञान कांग्रेस के दौरान रखा जाएगा। श्री शाह ने कहा कि इस पुलिस विज्ञान कांग्रेस के दौरान छह विषयों पर विचार विमर्श होगा- 5जी युग में पुलिसिंग, नारकोटिक्स- एक गेम चेंजिंग दृष्टिकोण, सोशल मीडिया की चुनौतियां, सामुदायिक पुलिसिंग, आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियां और पुलिस और CAPFs के बीच समन्वय-सीमाओं की सुरक्षा। उन्होने कहा कि ये सभी विषय आंतरिक सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और सीमाओं की सुरक्षा को In-toto कवर करने वाले विषय हैं। उन्होंने कहा कि Police Reform और Police Reforms, दोनों की अलग परिभाषा है।श्री अमित शाह ने जम्मू और कश्मीर में धारा 370 खत्म होने का जिक्र करते हुए कहा कि आज वहां की स्थिति को देखकर देश का हर नागरिक चैन की सांस ले सकता है कि ये अब हमेशा के लिए भारत का हिस्सा बन चुका है और इसे अब कोई हमसे नहीं छीन सकता। उन्होंने कहा कि वामपंथी उग्रवाद वाले क्षेत्रों में भी हिंसा में आई कमी के कारण अब विकास हर गांव औऱ व्यक्ति तक पहुंच रहा है और हर जगह स्वास्थ्य, शिक्षा और इन्फ्रास्ट्रक्चर के नए युग का आग़ाज़ हुआ है। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि आज 49वीं अखिल भारतीय पुलिस विज्ञान कांग्रेस का कम्पेन्डियम, BPR&D की प्रतिष्ठित हिन्दी पत्रिका (पुलिस विज्ञान) और उत्तराखंड पुलिस- मार्चिंग विद द टाइम्स पत्रिका का विमोचन हुआ है। उन्होंने कहा कि BPR&D को मज़बूत करने के लिए विगत 5 सालों में केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने कई कदम उठाए हैं। BPR&D के चार्टर में समुद्री सीमा प्रबंधन और CAPF का क्षमता निर्माण, आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियां, पुलिस की छवि और पुलिस समुदाय इंटरफेस के साथ और कई चीजों को जोड़ा गया है। स्वदेशी उपकरणों को विकसित करने के लिए एक अलग वर्टिकल खड़ा किया गया है और इसके लिए शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों, प्रोफेसर, छात्रों और इंडस्ट्रीज के साथ एक सार्थक संवाद किया गया है। श्री शाह ने कहा कि मोदी जी के नेतृत्व में आंतरिक सुरक्षा के लिए आवश्यक संसाधनों और साधनों के क्षेत्र में भारत आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि ब्यूरो के आधुनिकीकरण प्रभाग के अंतर्गत साइबर सुरक्षा, साइबर अपराध रोकथाम, ड्रोन फॉरेंसिक, साइबर कानूनों की उभरती हुई चुनौतियां जैसे विषयों पर वेबिनार और कार्यशालाएं आयोजित की गई हैं।

श्री अमित शाह ने कहा कि हाल ही में भारत सरकार ने संसद में तीन नए विधेयक पेश किए हैं जो फिलहाल गृह मंत्रालय की स्टैंडिंग कमेटी के पास विचाराधीन हैं। उन्होंने कहा कि यह तीनों नए विधेयक IPC, CrPC और Evidence Act को रिप्लेस करेंगे, जो अंग्रेजों द्वारा बनाए गए कानून थे। उन्होंने कहा कि 1860 से 2023 तक इन कानूनों में कोई परिवर्तन नहीं किया गया था। उन्होंने कहा कि जब समाज में बदलाव आते हैं तो कानूनों में बदलाव आने चाहिएं क्योंकि अपराध का स्केल औऱ तरीका बदल गए हैं और अब तकनीक के उपयोग से भी अपराध होने लगे हैं। उन्होंने कहा कि हमारे पुराने कानूनों में बदलाव ना होने के कारण अदालतों में मामलों का जमावड़ा देखना पड़ता था और हमारा क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम देरी के लिए बदनाम हो चुका था। श्री शाह ने कहा कि अब इन तीन ऩए कानूनों के पारित होने के बाद देश की जनता को न्याय मिलने में होने वाली देरी से निजात मिल जाएगी। उन्होंने कहा कि तीन नए क्रिमिनल लॉ में आतंकवाद और संगठित अपराध की व्याख्या कर मोदी सरकार ने देश को इनसे सुरक्षित करने का काम किया है। अंतरराज्यीय गिरोहों के लिए इन कानूनों में कड़े प्रावधान किए गए हैं, डायरेक्टर प्रॉसीक्यूशन के ऑफिस की कैपेसिटी बिल्डिंग पर बहुत बल दिया गया है, फॉरेंसिक साइंस का उपयोग बढ़ाने के लिए भी 6 साल से अधिक सज़ा वाले अपराधों में फॉरेंसिक साइंस के ऑफिसर्स की विजिट को कंपलसरी किया गया है और दोष सिद्धि के प्रमाण को बढ़ाने के लिए भी समयबद्ध योजना बनाई गई है। केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि फॉरेंसिक साइंस के उपयोग, CCTNS व ICJS की भूमिका और IPC, CrPC तथा Evidence Act को बदलने वाले तीन नए कानूनों से भारत का क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम अमृतकाल में एक नए युग में प्रवेश करने जा रहा है, जो देश के हर नागरिक को सुरक्षा भी प्रदान करेंगे और आंतरिक सुरक्षा को भी सुनिश्चित करेंगे। उन्होंने कहा कि तकनीक का उपयोग किए बिना ये संभव ही नहीं है। ICJS के तहत देश के 99.9%, यानी, 16733 पुलिस स्टेशनों को कंप्यूटराइज कर CCTNS के साथ जोड़ने का काम हो चुका है, ई- कोर्ट के साथ 22000 अदालतों को जोड़ा जा चुका है, ई-प्रिजन से दो करोड़ से ज्यादा कैदियों का डाटा उपलब्ध है, ई- प्रॉसीक्यूशन से एक करोड़ से ज्यादा प्रॉसीक्यूशन का डाटा उपलब्ध है और ई-फोरेंसिक के माध्यम से 17 लाख से अधिक फॉरेंसिक डाटा भी उपलब्ध है। नफीस के माध्यम से 90 लाख से ज्यादा फिंगरप्रिंट रिकॉर्ड्स उपलब्ध हैं, iMOT के माध्यम से UAPA के अंतर्गत रजिस्टर्ड सभी 22000 मामलों का डाटा भी उपलब्ध है और निदान के माध्यम से नार्को में 5 लाख से ज्यादा नार्को ऑफेंडर्स का डाटा भी हमारे पास उपलब्ध है। इसके अलावा मानव तस्करी के लिए NDHTO के तहत लगभग एक लाख मानव तस्करों का डाटा भी उपलब्ध है। CRIMAC में 14 लाख से अधिक अलर्ट्स का डाटा उपलब्ध है, नेशनल क्राईम रिर्पोटिंग पोर्टल में 28 लाख से अधिक कंप्लीट कंप्लेंट्स का डाटा उपलब्ध है और प्रिजन का भी पूर्ण कंप्यूटराइजेशन हम करने जा रहे हैं। श्री शाह ने कहा कि इतने बड़े डेटाबेस के आधार पर हमारे क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम को हमें पुख्ता करना होगा। श्री अमित शाह ने कहा कि इन तीनों नए कानूनों में सभी प्रकार के डॉक्यूमेंट्स को इलेक्ट्रॉनिक तरीके से कोर्ट के सामने पेश करना, समन, वारंट और प्रिजन से गवाही को ऑनलाइन करने की व्यवस्था हमने कानूनी प्रावधानों के तहत की है, जिसके कारण अब न्याय मिलने में देरी नहीं होगी। उन्होंने कहा कि इन सभी प्रावधानों पर अमल तभी संभव है जब पूरे देश की पुलिस इन्हें आत्‍मसात कर पुलिस थाने तक ले जाएगी। उन्होंने कहा कि डिजिटल पब्लिक गुड्स की सुरक्षा के लिए भी मोदी सरकार ने कई कदम उठाए हैं। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि मोदी जी के नेतृत्व में देश हर क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है और आने वाले दिनों में एक मजबूत आर्थिक शक्ति के रूप में उभरेगा, ऐसे में हमारे आर्थिक संस्थानों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी देशभर की पुलिस और एजेंसियों को और मजबूती से निभानी होगी। उन्होंने कहा कि जब हर क्षेत्र में विकास होता है तब कई चुनौतियां भी हमारे सामने खड़ी होती हैं और उन चुनौतियों को मुकाबला करने के लिए हमारी पुलिस को अपने आपको तैयार करना होगा। श्री शाह ने कहा कि देश के युवा पुलिस ऑफिसर्स देश के क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा, राज्यों में साइबर सुरक्षा का ऑडिट, सोशल मीडिया और वीजा की लगातार मॉनिटरिंग जैसे नए विषयों पर काम करें। श्री शाह ने कहा कि काउन्टर टेररिज्म के एप्रोच में जीरो टॉलरेंस की नीति से आगे बढ़ जीरो टॉलरेंस स्ट्रेटजी और जीरो टॉलरेंस एक्शन को अपनाकर आतंकवाद को जड़ से समाप्त करने का समय आ गया है। श्री अमित शाह ने कहा कि विभिन्न एजेंसियों के बीच राज्यों के पुलिसबलों को समन्‍वय बढ़ाने की ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय रक्षा शक्ति यूनिवर्सिटी और फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी के साथ देशभर की पुलिस को जुड़ना चाहिए। मॉडस ऑपरेंडी ब्यूरो की स्टडी कर अपने यहां भी मॉडस ऑपरेंडी ब्‍यूरो बनाने की शुरुआत करें, डायरेक्टर प्रॉसीक्यूशन की व्यवस्था को और मज़बूत करें, बीट को पुनर्जीवित करें, परेड को नियमित करें और खबरी प्रणाली को भी फिर से एक बार पुनर्जीवित करें। उन्होंने कहा कि इंटेलिजेंस का एनालिसिस मानव दिमाग से अच्छा और कोई नहीं कर सकता, इसके लिए खबरी प्रणाली को भी हमें पुनर्जीवित करना होगा। श्री शाह ने LWE वाले फॉरवर्ड क्षेत्रों में बेस कैंप की स्थापना का जो प्रयास हो रहा है उसमें वामपंथी उग्रवाद वाले राज्यों को सहयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि नारकोटिक्स के खिलाफ लड़ाई के लिए NCORD मेकैनिज्म को मजबूत करना ज़रूरी है और इसके लिए NCORD की जिलास्तरीय बैठक पर ध्यान देना होगा।

 

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