उत्तराखंड समाचार

शिक्षित होने के बाद दुनिया का कोई भी लक्ष्य प्राप्त कर सकती हैं बालिकाएँ : राज्यपाल

01 करोड़ से अधिक छात्र शामिल है।

देहरादून, 22 अप्रैल। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह(से नि) ने राजभवन से आई.आई.एम.यू.एन (इंडियाज इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाईट द नेशंस) संस्था द्वारा काशीपुर में आयोजित एक कार्यक्रम को वर्चुअल माध्यम से सम्बोधित किया। राज्यपाल ने कहा कि इस संगठन में लगभग 26000 से अधिक युवा शामिल हैं, जो 220 शहरों व 35 देशों में कार्य कर रहा है। इस संगठन द्वारा  7500 से अधिक स्कूलों में कार्यक्रम किए गए है जिसमें 01 करोड़ से अधिक छात्र शामिल है। यह संगठन महिला सशक्तिकरण पर विशेष रूप से कार्य कर रहा है जिसके लिए वह बधाई के पात्र हैं।

राज्यपाल ने कहा कि प्राचीन भारत में जीवन के हर क्षेत्र में महिलाओं की स्थिति पुरुषों के बराबर थी। हम अपाला, गार्गी, मैत्री व लोपमुद्रा के बारे में पढ़ते हैं जो अत्यन्त बुद्धिमान व दूरदर्शी महिलाएं थी जो शैक्षिक सभाओं में भाग लेती थी। लोपमुद्रा को ऋगवेद में कुछ छन्दों की रचना का श्रेय जाता है। उन्होंने कहा कि मध्य काल में विदेशियों के आक्रमण के कारण व कुछ कुप्रथाओं से नारी की स्थिति में गिरावट आयी है। यह भेदभाव मुख्य रूप उन्हें शिक्षा से वंचित करना था। इसके लिए हाल की शताब्दियों में कई सामाजिक सुधार आन्दोलन शुरू हुए, जो महिला शिक्षा के आसपास केन्द्रित थे।

राज्यपाल ने कहा कि हमारा राज्य महिलाओं की सक्रियता और उनकी शक्ति का वैश्विक उदाहरण रहा है। गौरा देवी के नेतृत्व में चिपको आन्दोलन महिलाओं के नेतृत्व के सबसे प्रमुख उदाहरणों में से एक है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड के कई क्षेत्रों का दौरा करने के बाद जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं के काम करने को देखा है। जिससे यह साबित होता है कि महिलाएं उत्तराखण्ड राज्य की असली रीढ़ हैं। वह स्वतंत्र रूप से या स्वयं सहायता समूह के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाली मजबूत और दृढ़ शक्ति हैं। आज प्रत्येक क्षेत्र में महिलाएं प्रतिभाग कर रही हैं चाहे वह मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर हो, सप्लाई चेन हो, स्टार्ट अप हो, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हो या स्मार्ट इंजीनियरिंग हो। उन्होंने कहा कि लड़कियों को सैनिक स्कूलों में प्रवेश मिलना चाहिए और उन्हें आई.ए.एस, आई.पी.एस व प्रशासनिक सेवाओं हेतु प्रेरित किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से कोविड के कारण हमें नई तकनीक को सीखने का अवसर प्राप्त हुआ है जिसमें महिलाओं द्वारा वर्क फ्रॉम होम किया गया जो वास्तव में महिलाओं के लिए एक आशीर्वाद था। ऑनलाइन वर्किंग के जरिए वे नई जॉब और दूसरे काम ले रही हैं। राज्यपाल ने कहा कि बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए समाज के सभी कर्णधारों को आगे आना होगा। बालिकाएँ शिक्षित होने के बाद दुनिया का कोई भी लक्ष्य प्राप्त कर सकती हैं।

 

 

 

 

 

 

 

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