केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने किया राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन का शुभारंभ
टीम इंडिया, टीम रूरल डेवलपमेंट: केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने दिया एकता और सेवा का मंत्र

नई दिल्ली ,28.जून
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को धरातल पर उतारने के लिए केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन का शुभारंभ आज दिल्ली में केंद्रीय ग्रामीण विकास और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने किया। पहले दिन राज्यों से आए वरिष्ठ अधिकारियों और विशेषज्ञों द्वारा विभिन्न सत्रों में ग्रामीण विकास की योजनाओं पर गहन विचार‑विमर्श के बाद 29 जून यानी दूसरे दिन सभी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के ग्रामीण विकास मंत्री सम्मेलन में शामिल होकर नीतिगत दिशा और सामूहिक रोडमैप पर चर्चा करेंगे। उद्घाटन सत्र में केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्री कमलेश पासवान और डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी भी उपस्थित थे।
केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने उद्घाटन संबोधन में स्पष्ट किया कि यह सम्मेलन केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत विज़न से जुड़ी बहुत सोची‑समझी रणनीति है। श्री शिवराज सिंह ने कहा कि यह दो दिन का राष्ट्रीय मंथन मूलतः टीम इंडिया– टीम रूरल डेवलपमेंट का साझा प्रयास है। उन्होंने मंच से स्पष्ट किया कि यहाँ कोई मुख्य अतिथि नहीं, बल्कि केंद्र और राज्यों के अधिकारी‑मंत्रियों की एक संयुक्त टीम बैठी है और वे स्वयं भी इसी टीम के सदस्य हैं। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी की पंक्तियाँ उद्धृत करते हुए कहा कि ऊँचाई ऐसी नहीं होनी चाहिए कि हम दूसरों को गले न लगा सकें और यही भावना ग्रामीण विकास की नीतियों और क्रियान्वयन में भी दिखना चाहिए।
केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने प्रधानमंत्री श्री मोदी को “मैन ऑफ आइडिया” बताते हुए कहा कि उनके सीने में एक विकसित, सशक्त, आत्मनिर्भर और गौरवशाली भारत के लिए गहरी तड़प है। उन्होंने कहा कि इस तड़प को सफल परिणाम में बदलना तभी संभव है जब आज और कल, इन दोनों दिनों में यहाँ बैठे सभी अधिकारी और कल आने वाले सभी मंत्री दिन‑रात उसी मंत्र और संकल्प के साथ काम करें, ताकि गाँवों का विकास सीधे विकसित भारत की कहानी से जुड़ सके।
गाँव: भारत की आत्मा और लोकतंत्र की मज़बूत इकाई
अपने उद्घाटन भाषण में श्री शिवराज सिंह चौहान ने गाँवों के महत्व पर विशेष ज़ोर देते हुए कहा कि भारत की कल्पना गाँवों के बिना नहीं की जा सकती और गाँव भारत की आत्मा, अर्थव्यवस्था, अस्मिता, सभ्यता और संस्कृति का केंद्र हैं। उन्होंने गाँवों को लोकतंत्र की सबसे मज़बूत इकाई बताते हुए कहा कि यह दो दिवसीय सम्मेलन दरअसल ग्रामीण समृद्धि का “अमृत मंथन” है, जहाँ से निकला अमृत अगले वर्षों में देश के हर गाँव तक पहुँचेगा।
उन्होंने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि योजनाएँ बनाना पर्याप्त नहीं, लास्ट माइल डिलीवरी सुनिश्चित करना सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के उस विचार को साझा करते हुए उन्होंने दोहराया कि “सरकार केवल फाइल में नहीं, जनता की लाइफ में दिखना चाहिए” और यह तभी होगा जब बिना किसी परेशानी, बिना रिश्वत, बिना समय गँवाए हर योजना का लाभ पात्र हितग्राही तक पहुँचे।
रिफॉर्म और विकसित भारत- जी राम जी पर फोकस
केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने विभिन्न सत्रों में वास्तविक सुधार‑मंथन की अपील करते हुए कहा कि नियमों, प्रक्रियाओं और क्रियान्वयन में जहाँ‑जहाँ बाधाएँ हैं, उन्हें ईमानदारी से चिन्हित कर बदलना होगा, क्योंकि सिर्फ योजना बनाना काफी नहीं, योजना ठीक ढंग से पहुँचाना ज़रूरी है। मनरेगा पर बोलते हुए शिवराज सिंह ने अपने मुख्यमंत्री काल के अध्ययन का उल्लेख किया और कहा कि कई जगह मजदूरों की बजाय मशीनों से काम, मस्टर रोल में गड़बड़ियाँ और गलत अटेंडेंस जैसी कमियों के कारण भारी मात्रा में धन का दुरुपयोग हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब सुधारात्मक बदलाव किए जा रहे हैं, मजदूरों के काम के दिन 100 से बढ़ाकर 125 किए गए हैं और संकल्प है कि जरूरतमंद कोई भी मजदूर बिना काम के नहीं रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि डेढ़ लाख करोड़ रुपए से अधिक का वार्षिक प्रावधान और अगले पाँच वर्षों में 75 लाख करोड़ रु. भारी निवेश यदि सही ढंग से पंचायतों तक पहुँचा और उपयोग हुआ तो गाँवों की बुनियादी तस्वीर निर्णायक रूप से बदली जा सकती है।
सम्मेलन ग्रामीण विकास के पूरे इको‑सिस्टम पर केंद्रित
श्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि दो दिन का यह सम्मेलन केवल एक योजना पर नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास के पूरे इको‑सिस्टम पर केंद्रित है। विकसित भारत- जी राम जी (VB‑GRAM‑G) के तहत विकसित ग्राम, विकसित भारत की अवधारणा; प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण)
(PMAY‑G) के माध्यम से सम्मानजनक ग्रामीण आवास; प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के ज़रिए सुदृढ़ सड़क नेटवर्क; राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) एवं ग्रामीण कौशल से आजीविका और उद्यमिता तथा राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) के माध्यम से सामाजिक सुरक्षा– इन सभी को एक समन्वित फ्रेमवर्क में जोड़ा जा रहा है, ताकि प्रधानमंत्री के विकसित भारत विज़न को जमीनी स्तर पर गति मिल सके।
उन्होंने PMAY‑G के तहत चल रहे फिजिकल वेरिफिकेशन अभियान का उल्लेख करते हुए चेतावनी दी कि किसी पात्र लाभार्थी को अपात्र घोषित करना महापाप है और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि कोई भी गरीब परिवार केवल मनमानी या पक्षपात के कारण मकान से वंचित न हो। साथ ही उन्होंने सामूहिक सामग्री खरीद, मेसन ट्रेनिंग और कन्वर्जेंस जैसे नवाचारों को राज्यों में बढ़ावा देने पर बल दिया।
लखपति दीदी, ग्रामीण उद्यमिता और महिला शक्ति
केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत महिलाओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि आज तक करोड़ों बहनें स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर अपनी आय बढ़ा चुकी हैं और लाखों लखपति दीदी सामने आई हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में उनका लक्ष्य इसे 6 करोड़ तक ले जाना है, जिसके लिए अब केवल समूह स्तर पर नहीं, बल्कि व्यक्तिगत स्तर पर भी बहनों को आधुनिक उद्यमी के रूप में तैयार करना होगा। उन्होंने कहा कि पापड़‑अचार से आगे बढ़कर फूड प्रोसेसिंग, एग्री‑बिजनेस, सर्विस सेक्टर और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स तक ग्रामीण बहनों को पहुँचाना होगा, तभी सच अर्थों में ग्रामीण उद्यमिता विकसित भारत की रीढ़ बन सकेगी।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और NSAP: पहुंच और सुरक्षा
श्री शिवराज सिंह चौहान ने पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा शुरू की गई प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना को ग्रामीण भारत की तस्वीर बदलने वाली ऐतिहासिक पहल बताते हुए कहा कि सड़कें न होने के कारण जो गाँव पिछड़ गए थे, उन्हें अब मुख्यधारा से जोड़ने का काम तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि बेहतर सड़क नेटवर्क से शिक्षा, स्वास्थ्य और बाज़ार की सुविधाएँ गाँवों तक पहुँच रही हैं और किसान बेहतर मूल्य प्राप्त कर पा रहे हैं। उन्होंने राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम के तहत वृद्धावस्था, विधवा और दिव्यांग पेंशन जैसी योजनाओं की समीक्षा को भी दो दिन के एजेंडा का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के ज़रिए पेंशन वितरण में पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करने पर ज़ोर देते हुए उन्होंने कहा कि संवेदनशील भारत की दिशा में सामाजिक सुरक्षा को मज़बूत करना जरूरी है।
टीम स्पिरिट और मिशन मोड
श्री शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों और कल आने वाले मंत्रियों दोनों को सरकारी काम को केवल नौकरी नहीं, राष्ट्र‑सेवा का मिशन मानने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि दृष्टि बदलने से काम की ऊर्जा बदल जाती है; यदि हम अपने काम को ग्रामीण भारत की तस्वीर बदलने का सौभाग्य मानें तो हर बैठक, हर सत्र और दो दिन का यह सम्मेलन “अमृत मंथन” बन सकता है। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण जी के बताए सात्विक कार्यकर्ता के गुणों– मुक्त संग, अनहंकारी, धैर्यवान और उत्साह से भरे का उल्लेख करते हुए कहा कि एक व्यक्ति गाँव बदल सकता है, एक अधिकारी पूरा ज़िला बदल सकता है, एक नेता पूरा देश बदल सकता है और आज देश को बदलने का काम प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी कर रहे हैं। उन्होंने सभी राज्यों से संकल्प लेने को कहा कि वे अपने‑अपने प्रदेशों में ग्रामीण विकास को एक मिशन की तरह लेकर काम करेंगे और इस सम्मेलन से निकले “अमृत” को वापस अपने राज्य में जाकर गाँव‑गाँव तक पहुँचाएँगे।
दो दिवसीय सम्मेलन: पहले दिन अधिकारी, दूसरे दिन मंत्री
उद्घाटन दिवस पर सम्मेलन का फोकस योजनाओं के क्रियान्वयन, प्रगति समीक्षा और सुधार‑सुझावों पर रखते हुए अलग‑अलग हॉलों में विकसित भारत- जी राम जी (VB‑GRAM‑G), प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन एवं ग्रामीण कौशल (NRLM & Skills), प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) और राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) पर विस्तृत सत्र आयोजित किए गए हैं। इनमें स्कीम‑ओवरव्यू, राज्यवार प्रगति की समीक्षा, सर्वश्रेष्ठ प्रथाओं की प्रस्तुति, टेक्नोलॉजी और AI के उपयोग और वित्तीय प्रबंधन पर अधिकारियों के बीच गहन विमर्श के बाद दूसरे दिन इस मंथन में राजनीतिक नेतृत्व औपचारिक रूप से जुड़ जाएगा, जब देश के सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के ग्रामीण विकास मंत्री प्लेनरी सत्रों में हिस्सा लेंगे।
केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्यमंत्री श्री चंद्रशेखर पेम्मासानी ने इस बात पर जोर दिया कि शहरों में बढ़ते पलायन और आबादी के दबाव को नियंत्रित करने के लिए ग्रामीण समुदायों को सशक्त करना और स्थायी आजीविका विकसित करना बेहद जरूरी है। मनरेगा से ‘वी बी जी राम जी’ के परिवर्तन को उन्होंने कार्य सृजन से संपत्ति व धन निर्माण का माध्यम बताया जिसमें गाँवों के भीतर 300 से अधिक प्रकार के उत्पादक और स्थायी बुनियादी ढांचे तैयार किए जा सकते हैं।
इसके साथ ही केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्री कमलेश पासवान ने कहा कि पिछले दो वर्षों में मंत्रालय ने राज्यों के सहयोग से गाँवों को मजबूत करने, पलायन रोकने और ग्रामीण महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ योजना व स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से स्वावलंबी बनाने की दिशा में बेहतरीन कार्य किया है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत वंचित गाँवों को पक्की सड़कों से जोड़ा जा रहा है, पात्र लोगों को बुनियादी सुविधाओं से युक्त पक्के आवास दिए जा रहे हैं और मनरेगा के लीकेज को खत्म कर इसे ‘वीबी जी राम जी’ के रूप में आगामी 20 वर्षों के विकास के लिए एक नया कलेवर और रोडमैप दिया गया है।
ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव श्री रोहित कंसल ने पिछले 12 वर्षों में विभाग की गौरवशाली उपलब्धियों का ब्यौरा देते हुए बताया कि देश में लगभग 8 लाख किलोमीटर सड़कें बनी हैं, 3 करोड़ पक्के घर तैयार हुए हैं, 3 करोड़ लखपति दीदियाँ बनी हैं और 10 करोड़ ग्रामीण महिलाएँ सेल्फ हेल्प ग्रुप्स से जुड़ी हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाग अब एक ऐसे महत्वपूर्ण मोड़ पर है जहाँ अगले एक दशक के लिए इन परिसंपत्तियों के रखरखाव, योजनाओं के सैचुरेशन और देशवासियों की ‘ईज ऑफ लिविंग’ को और बढ़ाने पर मिलकर सोचना है।
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