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जैन मुनि जैन दर्शन के सिद्धांतों और विचारों के माध्यम से ला रहे पूरे विश्व में परिवर्तन : लोक सभा अध्यक्ष

रायपुर (छत्तीसगढ़), 18 जून। लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने आज कहा कि जैन मुनि और संत, जैन दर्शन के सिद्धांतों और मूल्यों के माध्यम से न केवल भारत, बल्कि पूरे विश्व में सामाजिक परिवर्तन ला रहे हैं। परम पूज्य आचार्य श्री विनय कुशल जी महाराज के भव्य आचार्य पदारोहण समारोह में अपने विचार व्यक्त करते हुए श्री बिरला ने वर्तमान समय की चुनौतियों का समाधान करने में जैन दर्शन की शिक्षाओं को बहुत प्रासंगिक बताया । उन्होंने कहा कि ऐसे समय, जबकि समाज तनाव, चिंता, संघर्ष और नैतिक मूल्यों के पतन जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है, जैन धर्म की शिक्षाएँ शांति, आत्म-संयम और नैतिक जीवन जीने का एक शाश्वत मार्ग दिखाती हैं। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय; छत्तीसगढ़ विधान सभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह; केन्द्रीय मंत्री श्री तोखन साहू, सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। जैन दर्शन के मूल सिद्धांतों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि सच्ची खुशी केवल भौतिक संपदा से प्राप्त नहीं की जा सकती। बल्कि, आत्म-संयम, अपने मन पर नियंत्रण, विचारों की पवित्रता और नैतिक मूल्यों के पालन से ही स्थायी संतुष्टि प्राप्त होती है। इस संदर्भ में, उन्होंने इस बात पर बल दिया कि अहिंसा, करुणा और संयम संबंधी भगवान महावीर की शिक्षाएं आज पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा कि सभी जीवों के प्रति अहिंसा, करुणा और दया का व्यवहार करके ही विश्व में शांति स्थापित की जा सकती है। उन्होंने जैन संतों की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन संतों ने सत्य, सहानुभूति और आध्यात्मिक जागरूकता जैसे मूल्यों आधारित नैतिक समाज के निर्माण के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। जैन संतों के आत्म संयम को नमन करते हुए, श्री बिरला ने उन संतों के प्रेरक उदाहरण पर प्रकाश डाला जो अपने अंतर्मन को दृढ़ बनाने और समाज का मार्गदर्शन करने के लिए दीर्घ उपवास एवं कठोर आध्यात्मिक साधना करते हैं। गहन आध्यात्मिक अनुशासन के माध्यम से एक युवा बाल मुनि द्वारा सिद्धि प्राप्त करने की उल्लेखनीय उपलब्धि का उल्लेख करते हुए, श्री बिरला ने कहा कि इस प्रकार की उपलब्धियाँ इस बात को दर्शाती हैं कि कम आयु में भी एकाग्रता, ज्ञान और तपस्या के माध्यम से अपने जीवन को पूरी तरह से बदला जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि जैन आचार्यों और संतों का जीवन अनुशासन, त्याग और निस्वार्थ सेवा का जीवंत उदाहरण है। उनका आचरण लोगों को अपने जीवन में धैर्य, आत्मसंयम और नैतिक मूल्यों को अपनाने के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि संतों और मुनियों का मार्गदर्शन, भावी पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा और आध्यात्मिक विकास तथा नैतिक उत्कृष्टता के प्रति समाज की प्रतिबद्धता को मजबूत करेगा। श्री बिरला ने लोगों से सत्य, नैतिकता, आत्म-अनुशासन और करुणा के मूल्यों को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि इन्हीं मूल्यों के आधार पर मजबूत तथा अधिक सौहार्दपूर्ण समाज का निर्माण हो सकता है। उन्होंने दोहराया कि जैन संतों की शिक्षाएं और भगवान महावीर का दर्शन शांतिपूर्ण, नैतिक और प्रबुद्ध समाज के निर्माण के लिए प्रेरणा के प्रभावशाली स्रोत बनी हुई हैं।

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