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साधकों को स्थायी शांति, जीवन के वास्तविक उद्देश्य तथा मुक्ति के पथ की ओर मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।

दिव्य धाम आश्रम, दिल्ली में आयोजित श्री गुरु पूर्णिमा महोत्सव 2026 में दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता एवं समर्पण के भावों को अभिव्यक्त किया गया
देहरादून । गुरु-शिष्य परंपरा के शाश्वत महत्व तथा दिव्य ज्ञान की रूपांतरकारी शक्ति की पुनः पुष्टि करते हुए, दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान (डीजेजेएस) द्वारा दिल्ली स्थित दिव्य धाम आश्रम में भव्य श्री गुरु पूर्णिमा महोत्सव 2026 का आयोजन किया गया। इस पावन अवसर पर हजारों श्रद्धालु, आध्यात्मिक साधक एवं गणमान्य अतिथि एकत्रित हुए और उन्होंने दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी (संस्थापक एवं संचालक, डीजेजेएस) के श्रीचरणों में अपनी श्रद्धा एवं कृतज्ञता के भाव समर्पित किए। यह महोत्सव गुरु-भक्ति की भावना को और अधिक प्रगाढ़ करने, धर्ममय जीवन के प्रति प्रतिबद्धता को सुदृढ़ बनाने तथा पूर्ण गुरु की दिव्य कृपा से आत्म-साक्षात्कार के मार्ग पर अग्रसर होने की प्रेरणा प्रदान करने वाला एक अनुपम आध्यात्मिक संगम सिद्ध हुआ।
दिव्य समारोह का शुभारंभ ब्रह्मज्ञानी वेदपाठियों द्वारा गूंजायमान वैदिक मंत्रोच्चारण से हुआ, जिससे संपूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा एवं पवित्रता से आलोकित हो उठा। भक्ति-समागम के प्रमुख आकर्षणों में सामूहिक गुरु पूजन, मंगल आरती, भावपूर्ण भजन एवं ज्ञानवर्धक प्रवचन शामिल रहे। इसके अतिरिक्त, गुरु गोरखनाथ एवं उनके गुरु मत्स्येन्द्रनाथ की प्रेरणादायक कथा पर आधारित आध्यात्मिक नाट्य प्रस्तुति “जाग गोरख मच्छंदर का खेल है माया” ने उपस्थित जनसमूह को गहन आध्यात्मिक चिंतन के लिए प्रेरित किया। इस प्रस्तुति में माया (मोह एवं सांसारिक आसक्ति) के सूक्ष्म स्वरूप का प्रभावशाली चित्रण करते हुए आध्यात्मिक जागरण की अनिवार्यता को रेखांकित किया गया। डीजेजेएस के प्रतिनिधियों स्वामी नरेंद्रानंद जी, साध्वी तपेश्वरी भारती जी, साध्वी शैब्या भारती जी एवं साध्वी दीपांकरा भारती जी ने सभा को संबोधित करते हुए दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी की शिक्षाओं तथा श्री गुरु पूर्णिमा के आध्यात्मिक महत्व पर अपने प्रेरणादायी विचार व्यक्त किए। उनके ओजस्वी एवं ज्ञानमय उद्बोधनों से संपूर्ण वातावरण गुरु-भक्ति, श्रद्धा एवं कृतज्ञता की दिव्य भावना से सराबोर हो उठा।
वक्ताओं ने अत्यंत सुंदर ढंग से स्पष्ट किया कि श्री गुरु पूर्णिमा महोत्सव का मूल उद्देश्य गुरु के प्रति कृतज्ञता का जागरण, सद्गुणों का विकास तथा साधकों को आत्म-साक्षात्कार के पथ पर निरंतर अग्रसर होने के लिए प्रेरित करना है। उन्होंने कहा कि यह पर्व आत्मचिंतन, आत्म-मूल्यांकन तथा आध्यात्मिक संकल्पों के पुनः दृढ़ीकरण का अनुपम अवसर है। साथ ही, आधुनिक जीवन की चुनौतियों के बीच गुरु-मार्गदर्शन की प्रासंगिकता तथा आंतरिक शांति एवं आध्यात्मिक पूर्णता की प्राप्ति हेतु ब्रह्मज्ञान के व्यावहारिक अनुप्रयोग पर विशेष बल दिया।
वक्ताओं ने यह भी समझाया कि गुरु-शिष्य संबंध पारंपरिक शिक्षक-विद्यार्थी संबंधों से कहीं अधिक गहन, दिव्य एवं आध्यात्मिक है। यह संबंध आत्म-जागरण एवं आंतरिक रूपांतरण की आधारशिला है। गुरु शिष्य का मार्गदर्शन करते हुए उसे आत्म-अन्वेषण, आत्मबोध एवं अंततः परमात्मा के प्रत्यक्ष अनुभव की ओर अग्रसर करते हैं। आज के भौतिक आकांक्षाओं एवं बाह्य आकर्षणों से प्रभावित युग में गुरु शाश्वत प्रकाशस्तंभ के समान हैं, जो साधकों को स्थायी शांति, जीवन के वास्तविक उद्देश्य तथा मुक्ति के पथ की ओर मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
श्री गुरु पूर्णिमा के गहन आध्यात्मिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए यह विशेष रूप से रेखांकित किया गया कि सच्ची गुरु-भक्ति केवल बाह्य पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं होती, बल्कि गुरु की शिक्षाओं को अपने दैनिक जीवन में आत्मसात करने के सतत एवं ईमानदार प्रयासों में ही उसकी वास्तविक अभिव्यक्ति निहित है। श्री गुरु पूर्णिमा दिव्य मार्गदर्शन के प्रति पूर्ण समर्पण तथा आध्यात्मिक सिद्धांतों के अनुरूप अपने जीवन को रूपांतरित करने की दृढ़ प्रतिबद्धता का प्रतीक है। श्रद्धालुओं को प्रेरित किया गया कि वे ध्यान, नैतिक आचरण तथा निष्काम सेवा को अपने दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाकर आध्यात्मिकता को केवल विचार नहीं, बल्कि एक जीवंत अनुभव के रूप में आत्मसात करें। कार्यक्रम में अतिथिगणों की गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्होंने आध्यात्मिक उत्थान तथा मूल्य-आधारित सामाजिक परिवर्तन की दिशा में डीजेजेएस द्वारा किए जा रहे सतत एवं बहुआयामी प्रयासों की मुक्तकंठ से सराहना की। इस भव्य आयोजन को प्रमुख प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक एवं डिजिटल मीडिया मंचों पर व्यापक कवरेज प्राप्त हुई। सामूहिक ध्यान सत्र एवं विशाल सामुदायिक भंडारे ने भी इस अवसर को और अधिक गरिमामय एवं अविस्मरणीय बना दिया। इन आयोजनों ने सभी प्रतिभागियों के मध्य समानता, एकता, सेवा एवं सामूहिक आनंद की भावना को और अधिक सुदृढ़ किया। शांत एवं आध्यात्मिक वातावरण में ध्यान करते हुए श्रद्धालुओं ने आंतरिक मौन, आत्मिक शांति तथा गहन आध्यात्मिक चिंतन के अनुपम क्षणों का अनुभव किया। इससे यह संदेश और अधिक सशक्त हुआ कि वास्तविक शांति, स्थायी आनंद एवं जीवन की पूर्णता केवल आध्यात्मिक ज्ञान तथा नियमित साधना के माध्यम से परमात्मा से जीवंत संबंध स्थापित करके ही प्राप्त की जा सकती है। निस्संदेह, श्री गुरु पूर्णिमा महोत्सव 2026 अत्यंत प्रेरणादायी एवं आध्यात्मिक वातावरण में संपन्न हुआ। इस दिव्य आयोजन ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक रूप से नवऊर्जा प्रदान करते हुए गुरु-तत्त्व के साथ अपने संबंध को और अधिक सुदृढ़ बनाने की प्रेरणा दी। साथ ही, इस महोत्सव ने सफलतापूर्वक यह शाश्वत संदेश जन-जन तक पहुँचाया कि एक पूर्ण सद्गुरु की कृपा मानव जीवन का सर्वोच्च सौभाग्य एवं सबसे बड़ा आशीर्वाद है। यही कृपा आंतरिक रूपांतरण, सार्वभौमिक सामंजस्य, आत्म-साक्षात्कार तथा परमात्मा के दिव्य साक्षात्कार की ओर ले जाने वाला सबसे सुनिश्चित एवं कल्याणकारी मार्ग है।




