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हत्या की घटना में शामिल मुख्य हत्यारोपी चढे दून पुलिस के हत्थे

देहरादून, 22 फरवरी। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून प्रमेन्द्र सिंह डोबाल के कुशल नेतृत्व में हत्या की घटना में शामिल मुख्य हत्यारोपी दून पुलिस के हत्थे चढे हैं। घटना को अंजाम देने वाले 03 अभियुक्तों को दून पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया हैं। पुलिस के अनुसार पैसों के लेन-देन के विवाद के चलते अभियुक्तों द्वारा घटना को अंजाम दिया गया था। घटना के बाद अभियुक्त अपने एक अन्य साथी की टैक्सी से शव को ठिकाने लगाने चिडियापुर के जंगलों में ले गये थे। घटना में शामिल टैक्सी चालक को पुलिस द्वारा पूर्व में गिरफ्तार किया गया था, जिसकी निशानदेही पर मृतक के शव को चिडियापुर के जंगलों से बरामद किया था।
प्राप्त जानकारी के अनुसार विगत 11 फरवरी 2026 को संतराम धीमान निवासी शास्त्री नगर, बसंत विहार द्वारा थाने पर अपने पुत्र दिगंबर धीमान उम्र 28 वर्ष के 09 फरवरी 2026 को घर से बिना बताए कहीं चले जाने के सम्बन्ध में थाना बसंत विहार पर उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई गई थी। गुमशुदगी की जांच के दौरान गुमशुदा दिगंबर धीमान के विरुद्ध थाना बसंत विहार पर पंजीकृत अभियोग में उसके 09 फरवरी को कोर्ट की तारीख पर आने तथा कोर्ट में अगली तिथि मिलने पर बाद में घर आने की बात कहते हुए कही चले जाने की जानकारी प्राप्त हुई। साथ ही गुमशुदा दिगम्बर धीमान के कुछ अन्य साथियों जिनके साथ बैठकर वह अक्सर नशा करता था के भी दिगम्बर की गुमशुदगी के बाद से ही अपने घरों से गायब होना प्रकाश में आया। जांच के दौरान गुमशुदा के साथियों का विगत 09 फरवरी की रात्रि में एक टैक्सी के माध्यम से एक साथ जाने की जानकारी पुलिस को प्राप्त हुई। जिस पर पुलिस टीम द्वारा उक्त संदिग्ध टैक्सी के सम्बन्ध में जानकारी प्राप्त करते हुए 17 फरवरी को उक्त संदिग्ध टैक्सी को तलाश कर उसके चालक राजनन्दन पुत्र मनमोहन ठाकुर निवासी न्यू पटेलनगर देहरादून को हिरासत में लेकर सख्ती से पूछताछ की गयी तो उसके द्वारा 09 फरवरी की रात्री में गुमशुदा के साथियों द्वारा उसकी टैक्सी से एक व्यक्ति के शव को कम्बल में लपेटकर चिडियापुर के जंगलों में ले जाकर फेंकना बताया गया। जिसकी निशानदेही पर पुलिस टीम द्वारा गुमशुदा दिगम्बर धीमान के शव को चिडियापुर के जंगलों से बरामद करते हुए टैक्सी चालक राजनन्दन को गिरफ्तार किया गया। घटना के सम्बन्ध में मृतक दिगम्बर के धीमान के पिता सन्तराम पुत्र बुधई दास निवासी शास्त्रीनगर खाला, बसन्त विहार के बयानों व दिये गये प्रार्थना पत्र के आधार पर उक्त गुमशुदगी को तरमीम करते हुए प्रकाश में आये अभियुक्तों हेमंत कुमार पुत्र जगदीश प्रसाद सेमवाल निवासी नई बस्ती सी ब्लॉक रेसकोर्स, थाना नेहरू कॉलोनी जनपद देहरादून, उम्र 37 वर्ष, आदिल पुत्र आबिद हुसैन निवासी नई बस्ती सी ब्लॉक रेसकोर्स, थाना नेहरू कॉलोनी जनपद देहरादून उम्र 38 वर्ष व वैभव भट्ट उर्फ संजू पुत्र पिंटू भट्ट निवासी नई बस्ती सी ब्लॉक रेसकोर्स थाना नेहरू कॉलोनी जनपद देहरादून उम्र 25 वर्ष तथा अन्य के विरूद्ध थाना बसन्त विहार पर मुकदमा अपराध सख्या 30/26 धारा: 103 (1), 238 (1), 61 (2) बीएनएस के तहत अभियोग पंजीकृत किया गया। पूछताछ में मृतक दिगम्बर धीमान के साथियों द्वारा रेसकोर्स स्थित कमरे में उसकी हत्या किये जाने सम्बन्धी तथ्य प्रकाश में आने पर अभियोग की विवेचना को थाना नेहरू कालोनी स्थानान्तरित किया गया। घटना की गम्भीरता के दृष्टिगत उसमें शामिल अभियुक्तों की गिरफ्तारी हेतु वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून के निर्देशों पर तत्काल अलग-अलग टीमों का गठन किया गया। गठित टीमों द्वारा अभियुक्तों के सम्बन्ध में जानकारी हेतु सुरागरसी-पतारसी करते हुए मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया गया।
साथ ही सर्विलांस के माध्यम से भी अभियुक्तों के सम्बन्ध में जानकारी प्राप्त करते हुए उनके सभी सम्भावित स्थानों पर लगातार दबिशें दी गई। पुलिस द्वारा लगातार किये जा रहे प्रयासों तथा मुखबिर से प्राप्त सूचना के आधार पर पुलिस टीम द्वारा घटना में शामिल तीनों अभियुक्तों हेमन्त सेमवाल, संजू तथा आदिल को आईएसबीटी के पास हरिद्वार बाईपास रोड से गिरफ्तार किया गया, जिनकी निशानदेही पर उनके द्वारा घटना मे प्रयोग की गई स्टील की रॉड, लोहे के हथोडे व मृतक को जूतों को नेपाली फार्म के पास पुल के नीचे सूखी नदी से बरामद किया गया। पूछताछ में अभियुक्तों द्वारा बताया गया कि उनका पैसों के लेन-देन को लेकर मृतक दिगम्बर से विवाद चल रहा था। दिगम्बर द्वारा उनसे ढाई लाख रुपये लिये गये थे, जो वह वापस नहीं कर रहा था। विगत 09 फरवरी को अभियुक्तों को दिगम्बर के कोर्ट की तारीख में आने की जानकारी मिली, जिस पर अभियुक्त हेमन्त द्वारा मृतक दिगम्बर से सम्पर्क कर उसे रेसकोर्स सी-ब्लाक स्थित अपने घर पर बुलाया गया। जहां तीनो अभियुक्तों द्वारा दिगम्बर के साथ बैठकर नशा किया, इस दौरान अभियुक्तों द्वारा दिगम्बर से अपने पैसे वापस मांगने तथा उसके द्वारा आनाकानी करने पर अभियुक्तों द्वारा उसे टार्चर करने की नीयत से उस पर घर में रखी लोहे की रॉड, हथौडे तथा पेंचकस से वार किये गये, जिससे उसे काफी गम्भीर चोटें आई तथा ज्यादा खून बहने के कारण उसकी मृत्यू हो गई। घटना के बाद अभियुक्त हेमन्त द्वारा अपने परिचित टैक्सी चालक रामनन्दन को टैक्सी लेकर अपने कमरे में बुलाया तथा उसे घटना के बारे में बताते हुए शव को ठिकाने लगाने में मदद के एवज में 15 हजार रू. देने की बात कही। जिसके बाद चारों अभियुक्त मृतक के शव को कम्बल में लपेटकर उसे गाडी की डिग्गी में डालकर हरिद्वार की ओर ले गये तथा रास्ते में अभियुक्तों द्वारा घटना में प्रयुक्त लोहे ही रॉड, हथौडा व मृतक के जूतों को नेपाली फार्म से आगे पुल से नीचे नदी में फेक दिया तथा मृतक के शव को चिडियापुर के जंगलों में ले जाकर नहर किनारे रेत मे दबा दिया।

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