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महाशिवरात्रि का पर्व शिव भक्तों के लिए उत्सव

देहरादून, 10 फरवरी। डॉक्टर आचार्य सुशांत राज ने जानकारी देते हुये बताया की धार्मिक मान्यता है कि इसी तिथि पर भगवान शिव का दिव्य प्राकट्य हुआ था और माता पार्वती के साथ उनका विवाह भी संपन्न हुआ था। इस वर्ष महाशिवरात्रि का पर्व 15 फरवरी रविवार को मनाई जाएगी। शिव भक्ति के लिए महाशिवरात्रि सिर्फ एक व्रत नहीं बल्कि यह एक आध्यात्मिक उत्सव है। फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का पर्व हर साल मनाया जाता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। ऐसी मान्यता है कि इस दिन व्रत और उपवास करने से भगवान शिव अपने भक्तों की सारी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। इस बार महाशिवरात्रि का पर्व 15 फरवरी को मनाया जाएगा। फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि का आरंभ 15 फरवरी को शाम में 5 बजकर 5 मिनट पर होगा। वहीं, अगले दिन यानी 16 फरवरी को शाम में 5 बजकर 35 मिनट पर तिथि समाप्त होगी। शास्त्रों के नियम के अनुसार, महाशिवरात्रि का पर्व तब मनाया जाता है जब चतुर्दशी तिथि निशीथ काल का समय भी लग रही हो। ऐसे में 15 फरवरी को चतुर्दशी तिथि निशीथ काल के समय होने के कारण 15 फरवरी को ही महाशिवरात्रि का व्रत किया जाएगा। शास्त्रों और पुराणों के अनुसार, महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे बड़ा पर्व है। इस दिन माता पार्वती और भगवान शिव का विवाह हुआ था। महाशिवरात्रि के दिन किए गए पूजा पाठ का दोगुना फल प्राप्त होता है। इस दिन भक्तजन रात में भगवान शिव और माता पार्वती का जागरण करते हैं और उनका ध्यान करते हैं। उनपर भगवान शिव और माता पार्वती का आशीर्वाद बना रहता है। इस दिन चार प्रहर की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। अगर समय न मिल पाए तो कम से कम एक प्रहर की पूजा अर्चना जरुर करें। इस बार पर्व के दिन भद्रा का अशुभ योग बन रहा है। पंचांग के अनुसार, 15 फरवरी की शाम करीब 5 बजकर 04 मिनट से भद्रा शुरू होगी और इसका समापन 16 फरवरी की सुबह 5 बजकर 23 मिनट पर होगा। करीब 12 घंटे 19 मिनट तक भद्रा का साया रहेगा। हालांकि, चिंता की कोई बात नहीं है। डॉक्टर आचार्य सुशांत राज ने जानकारी देते हुये बताया की इस बार भद्रा का वास पाताल लोक में बताया गया है। शास्त्रों में कहा गया है कि जब भद्रा पाताल में रहती है, तो उसका प्रभाव पृथ्वी पर नहीं पड़ता है।
इस बार महाशिवरात्रि पर भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए दिनभर कई शुभ मुहूर्त मिलेंग, जिनमें भक्त पूजा-अर्चना कर सकते हैं. पहला मुहूर्त सुबह 8 बजकर 24 मिनट से शुरू होकर 9 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। इसके बाद दूसरा मुहूर्त सुबह 9 बजकर 48 मिनट से 11 बजकर 11 मिनट तक का रहेगा। तीसरा मुहूर्त अमृत सर्वोत्तम मुहूर्त रहेगा, जो सुबह 11 बजकर 11 मिनट से 12 बजकर 35 मिनट तक का रहेगा, जिसमें जल चढ़ाना अत्यंत फलदायी रहेगा। इन सभी मुहूर्तों में श्रद्धा और सच्चे मन से शिवलिंग पर जल अर्पित करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।

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