उत्तराखंड समाचार

सनातन धर्म में तुलसी पूजन का विशेष महत्व

13 नवंबर को मनाया जायेगा तुलसी विवाह

देहरादून, 07 नवंबर। डॉक्टर आचार्य सुशांत राज ने जानकारी देते हुये बताया की सनातन धर्म में तुलसी पूजन का विशेष महत्व है। तुलसी विवाह करवाने से साधक को कन्यादान के समान फल की प्राप्ति होती है। साथ ही तुलसी जी और शालिग्राम की कृपा से विवाह में आ रही बाधाएं भी दूर होती हैं। तुलसी का पौधा घर में रखना शुभ होता है। इससे घर में सुख-समृद्धि आती है। इसके साथ ही घर में देवी लक्ष्मी का वास भी होता है। पंचांग के अनुसार, हर साल कार्तिक मास में देवी तुलसी और भगवान शालिग्राम ( जो भगवान विष्णु का एक रुप) का विवाह आयोजित किया जाता है। मान्यता के अनुसार, तुलसी विवाह के दिन भक्त व्रत रखते हैं और तुलसी जी के साथ भगवान शालिग्राम की पूजा-अर्चना करते हैं। इसके अलावा मंदिरों और घरों में तुलसी विवाह समारोह का आयोजन किया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास की द्वदशी तिथि की शुरुआत दिन मंगलवार 12 नवंबर, 2024 को शाम 4 बजकर 2 मिनट पर होगी। इस तिथि का समापन दिन बुधवार 13 नवंबर, 2024 को दोपहर 1 बजकर 1 मिनट पर होगा। पंचांग के अनुसार, इस साल तुलसी विवाह का अयोजन 13 नवंबर को किया जाएगा।

उन्होंने बताया की तुलसी विवाह 12 नवंबर को प्रदोष काल में कर सकते हैं क्यों​कि उस समय द्वादशी तिथि होगी। उस दिन एकादशी युक्त द्वादशी तिथि है। 12 नवंबर को देव उठनी एकादशी का व्रत होगा।

हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे का विशेष महत्व है, इसे धन की देवी मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। आमतौर पर घरों में सुबह-शाम इस पौधे की पूजा की जाती हैं, परंतु तुलसी विवाह के दिन आराधना करने से वैवाहिक जीवन में खुशियों का वास होता है। पंचांग के अनुसार कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को तुलसी माता और शालिग्राम जी का विवाह किया जाता है। हालांकि कुछ लोग द्वादशी पर भी तुलसी विवाह करते हैं। इस साल 12 नवंबर 2024 को तुलसी विवाह कराया जाएगा। इस दिन देवउठनी एकादशी भी है। इस दौरान कुछ जगहों पर 13 नवंबर 2024 को भी तुलसी विवाह किया जाएगा। माना जाता है कि तुलसी विवाह करवाने से साधक को कन्यादान के समान फल की प्राप्ति होती है। साथ ही तुलसी जी और शालिग्राम की कृपा से विवाह में आ रही बाधाएं भी दूर होती हैं। पंचांग के अनुसार कार्तिक माह में आने वाली शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 11 नवंबर को शाम 06:46 मिनट से होगी। इसका समापन 12 नवंबर को दोपहर बाद 04:04 मिनट पर होगा। ज्योतिष गणना के अनुसार एकादशी तिथि पर तुलसी विवाह का शुभ समय शाम 5 बजकर 29 मिनट से लेकर शाम 7 बजकर 53 मिनट तक रहेगा।

तुलसी विवाह द्वादशी तिथि

कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि की शुरुआत 12 नवंबर को शाम 4 बजकर 04 मिनट से हो रही है। इसका समापन 13 नवंबर 2024 को दोपहर 1:01 बजे होगा।

तुलसी विवाह द्वादशी मुहूर्त

लाभ-उन्नति मुहूर्त- सुबह 6 बजकर 47 मिनट से

अमृत सर्वोत्तम मुहूर्त –सुबह 8 बजकर 6 मिनट से 9 बजकर 26 मिनट तक

शुभ-उत्तम – सुबह 10 बजकर 46 मिनट से दोपहर 12 बजकर 5 मिनट तक

पूजा विधि :-

इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। लाल या पीले रंग के वस्त्र धारण करें। पूजा कक्ष को साफ करें।

इसके बाद शंख घंटी और मंत्रों का जाप करते हुए भगवान विष्णु को जगाएं। इसके बाद उनकी प्रार्थना करें। शाम को अपने घरों और मंदिरों को सजाएं।

इसके बाद खूब सारे दीपक जलाएं। गोधूलि बेला के दौरान शालिग्राम जी और तुलसी विवाह का आयोजन करें।

मंडप बनाएं और तुलसी जी का 16 श्रृंगार करें। शालिग्राम जी को भी गोपी चंदन व पीले कपड़े से सजाएं। अब उन्हें फूल, माला, फल, पंचामृत, धूप, दीप, लाल चुनरी, श्रृंगार की सामग्री और मिठाई भगवान को अर्पित करें।

इसके बाद वैदिक मंत्रों का जाप करें। आरती से पूजा का समापन करें। पूजा में हुईं गलती के लिए क्षमा मांगे। इसके बाद प्रसाद का वितरण घर के सदस्यों में करें।

 

 

 

 

 

 

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