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ग्रह नक्षत्र साथ पुनः सीएम बनेगें धामी

पीएम मोदी को मिल सकता है नोबल पुरस्कार : डॉ. आचार्य सुशांत राज

देहरादून। आने वाला साल राजनीतिक हिसाब से केवल उत्तराखण्ड ही नहीं बल्कि भारत देश के लिये विशेष होने वाला है। जहां धाकड धामी की सरकार महिलाओं के उत्थान के लिये कोई बड़ा फैसला ले सकती है वहीं देश के प्रधानमत्री भी महिलाओं के लिये कुछ ऐसा करने वाले है जिससे महिलाओं की दखल देश की संसद तक हो जायेगी। लेकिन इसमें विपक्ष को भी सहयोगी बनना पडेगा। यदि विपक्ष पीएम के साथ कदम ताल नहीं करेगा तो वह एक विलन के रूम में महिलाओं के सामने अपनी तस्वीर बनायेगा जो उसे आने वाले चुनावों में नुकसान पहुंचा सकती है। खैर भविष्य के गर्भ में अनेक बाते छिपी हुई है जो समय-समय के हिसाब से स्वतः ही जनता जनार्दन के सामने होगी। फिलहाल उत्तराखण्ड राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के ग्रह नक्षत्रें का डॉ- आचार्य सुशांत राज ने गहन अध्ययन किया है जिसके आधार पर यह कहा जा सकता है कि आने वाले चुनावों में एक बार फिर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर धाकड़ धामी की ताजपोशी होगी। ग्रह नक्षत्रें में जो ग्रह सही चाल में नहीं थे वह भी समय के हिसाब से बदल रहे है। 2027 आते आते वह भी ताजपोशी में सहायक बन जायेगे। कुछ ऐसा ही देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ भी घटित होने वाला है। फिलहाल 28 फरवरी सेे ईरान युद्ध की मार को झेल रहा है। अमेरिका समय समय पर उसे आंखे दिखाने का काम रह रहा है और उसे उम्मीद है कि भारत भी इस मामले में कुछ बोलेगा। देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी यदि वास्तव में मध्यस्थता कर देते है तो उनके ग्रह नक्षत्र इतने मजबूत है कि वह उन्हें नोबल पुरस्कार तक दिलवा सकते हैै फिलहाल डॉ. आचार्य सुशांत राज शायद ऐसे पहले आचार्य है जो बिना कुछ बोले ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिये पूजा अर्चना में व्यस्त है और वह चाहते है कि जो ग्रह श्री नरेन्द्र मोदी के कमजोर है उन्हें इतना बलिस्ट बना दिया जायें कि जो नोबल पुरस्कार किसी अन्य देश के प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति को नहीं मिल पाया वह श्री नरेन्द्र मोदी को प्राप्त हो जायें। जब एसकेएम न्यूज सर्विस संवाददाता ने इस संबंध में डॉ- आचार्य सुशांत राज से बात की तो उन्होंने भी माना कि वह श्री मोदी के लिये पूजा अर्चना कर रहे है यदि श्री मोदी ईरान युद्ध में मध्यस्थता करते है तो उन्होंने नोबल पुरस्कार मिल सकता है। उनके ग्रह नक्षत्र बताते है कि श्री मोदी को नोबल पुरस्कार चाहे कभी भी मिले लेकिन उन्हें यह पुरस्कार मिलकर ही रहेगा। 1जून 2026 ई- से बृहस्पति भी शुभ दृष्टि लग्न भाव पर रहने से श्री मोदी की वैश्विक छवि की प्रभा धीरे धीरे बढ़ती जायेगी। देश में चारित्रिक और सांस्कृतिक बदलाव की शुरूआत की नींव को प्रधानमंत्री मोदी रख चुके है परंतु इसे और सुदृढ़ और चिरस्थायी करने के लिये नये कार्यक्रम भी लागू होगें। आगामी वर्ष के उत्तरार्द्ध में ग्रहस्थिति अनुसार भी श्री मोदी भारतीय विदेश नीति को चरणबद्ध रूप से उस निर्णायक दिशा में अग्रसर करेगें जहां उनके पूर्ववर्त्तियों ने हिम्मत नहीं दिखाई होगी। गुरू के प्रभाव से श्री मोदी की मौजूदगी में भारतीय विदेश नीति निश्चित रूप से विशेष अलग रूप से दृष्टिगोचर होगी। विदेश नीति में आधारभूत बदलाव होगा जिसकी अनुगूंज विश्वभर में सुनाई देगी।

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