उत्तराखंड समाचार

शिक्षा का भारतीयकरण नई शिक्षा नीति का मूल उद्देश्य : उपराष्ट्रपति

हमें अपनी सभ्यता और संस्कृति पर गर्व होना चाहिए : उपराष्ट्रपति

हरिद्वार 19 मार्च। देश के उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडु एक दिवसीय उत्तराखंड दौरे पर पहुँचे। इस अवसर पर उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह( से नि ) भी उपस्थित थे। उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडु ने हरिद्वार स्थित देव संस्कृति विश्वविद्यालय परिसर में पहुँच दक्षिण एशियाई शांति एवं सुलह संस्थान (दएशांसुसं) का शुभारंभ किया। यह संस्थान दक्षिण एशियाई देशों के बीच तमाम राजनीतिक चुनौतियों के मद्देनजर क्षेत्रीय स्थिरता और आपसी सकारात्मक व्यवहार की स्थापना को प्रेरित करता है। उन्होंने देश के लिए अपना सर्वाेच्च बलिदान देने वाले वीर शहीदों की याद में बनी शौर्य दीवार पर पुष्पांजलि अर्पित की। साथ ही उन्होंने देवसंस्कृति विश्वविद्यालय में स्थापित एशिया के प्रथम बाल्टिक सेंटर का अवलोकन किया। उन्होंने बाल्टिक देशों के सेंटर द्वारा संचालित कार्यक्रमों को सराहा। उपराष्ट्रपति एवं राज्यपाल ने कुटीर उद्योग, हस्तकरघा  का अवलोकन किया। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति एवं राज्यपाल ने देसंविवि के नवीनतम वेबसाइट, प्रज्ञायोग प्रोटोकॉल एवं उत्सर्ग पुस्तक का भी विमोचन किया। माननीय उपराष्ट्रपति ने प्रज्ञेश्वर महादेव का पूजन कर विश्व शांति, राष्ट्र की सुख एवं उन्नति की कामना की। उन्होंने प्रज्ञेश्वर महादेव मंदिर में रुद्राक्ष के पौधे का रोपण कर पर्यावरण संतुलन के लिए संदेश दिया।

इस दौरान उपराष्ट्रपति श्री नायडू मुख्य अतिथि के रूप में शांतिकुंज स्थापना की स्वर्ण जयंती के मौके पर आयोजित व्याख्यानमाला में शामिल हुए। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने  मां, मातृभाषा और मातृभूमि को सदैव आत्मा से जोडे रहने के लिए उपस्थित लोगों को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि देश के उच्च पदों पर आसीन लोगों ने अपनी मातृभाषा में अध्ययन कर उंचाइयों को प्राप्त किया। उन्होंने मातृभाषा को आगे बढ़ाने पर विशेष जोर दिया कहा कि मातृ भाषा को आगे के लिये हर सम्भव प्रयास किये जायें। हमें अपनी सभ्यता और संस्कृति पर गर्व होना चाहिए। उन्होंने आह्वान किया की हमें भारतीय संस्कृति और परंपरा से अपने बच्चों को अवगत कराना चाहिए।बच्चों को प्रकृति के नजदीक जाने का मौका दें जिससे प्रकृति के महत्व को करीब से जानने और सीखने का मौका बच्चों को मिल सके।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत में विविधता ही यहां विशेषता है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा के दिव्य प्रकाश में ही व्यक्ति समाज के प्रति जिम्मेदार नागरिक बन पाता है। शिक्षा का भारतीयकरण नई शिक्षा नीति का मूल उद्देश्य है। देवसंस्कृति विवि की शिक्षा प्रकृति और संस्कृति का अच्छा संयोजन है। भारतीय  संस्कृति के उत्थान में जुटे गायत्री परिवार एवं देवसंस्कृति विवि के कार्यों की सराहना की।

कार्यक्रम में उपस्थित  राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल श्री गुरमीत सिंह (से  नि ) ने अपने संबोधन में  कहा कि देव संस्कृति विश्विद्यालय मुझे एक मंदिर जैसा लगता है।यहाँ भारतीय संस्कृति पर जिस वैज्ञानिक तरीके से शोध हो रहा है, उसका नेतृत्व देवसंस्कृति विवि करेगा, ऐसा मुझे विश्वास है। दक्षिण एशियाई शांति एवं सुलह संस्थान शांति प्रेम और खुशहाली के लिए कार्य करेगा।  उन्होंने कहा जिस तरह पं श्रीराम शर्मा आचार्य जी ने शांति एवं सौहार्द्र के लिए कार्य किया है, उसे यह सेंटर आगे बढायेगा। देव संस्कृति विश्वविद्यालय सच्चे अर्थों में देश और विश्व के कोने-कोने से आए विद्यार्थियों के अध्ययन, अध्यापन एवं शोध के क्षेत्र में नित्य नई ऊंचाइयां छू रहा है। दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में भारतीय संस्कृति के गहरे पद चिन्ह दिखाई देते हैं। इस क्षेत्र में आज दक्षिण एशियाई शांति एवं सुलह संस्थान के खुलने से नई शुरुआत हुई है। अपने संबोधन में राज्यपाल  लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने  कहा कि भारतीय सभ्यता संस्कृति एवं इतिहास को गहराई से जानने व समझने के लिए संस्कृत भाषा का ज्ञान होना बहुत जरूरी है । संस्कृत भाषा हमें अपनी जड़ों से मिलने का रास्ता दिखाती है। भारतीयों के लिए संस्कृत भाषा सीखना बहुत आसान है। कई देश संस्कृत भाषा पर रिसर्च कर रहे हैं। जिनसे सीख लेने की जरूरत है।

सभा को संबोधित करते हुए विश्विद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ चिन्मय पण्ड्या जी ने स्वागत उद्बोधन एवं दक्षिण एशियाई शांति एवं सुलह संस्थान की परिकल्पना की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारतीय पंरपरा शांति, समरता और सौहार्द्र की रही है। इसी कार्य को इस संस्थान के माध्यम से और आगे बढायेंगे। इसी क्रम में वेदों और उपनिषदों के सार को भी विश्व भर में फैलायेंगे। कुलपति श्री शरद पारधी ने आभार ज्ञापित किया। इस अवसर पर प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने गायत्री मंत्र लिखित चादर, युग साहित्य एवं स्मृति चिह्न भेंटकर मा. उपराष्ट्रपति  एवं मा. राज्यपाल  को सम्मानित किया।

इस अवसर पर  एडीजी संजय गुंज्याल, आयुक्त गढ़वाल सुशील कुमार, आईजी गढ़वाल के0एस0 नगन्याल,  जिलाधिकारी डॉ आर राजेश कुमार, डीआईजी/वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जन्मेजय खंडूरी, अपर जिलाधिकारी(प्रशासन)शिव सिंह बरनवाल, उप जिलाधिकारी अपूर्वा पांडे के अलावा  अन्य अधिकारीगण मौजूद रहे।

 

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