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सावन मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है नाग पंचमी का त्योहार

देहरादून। डॉक्टर आचार्य सुशांत राज ने जानकारी देते हुये बताया की नाग पंचमी हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। हिन्दू पंचांग के अनुसार सावन माह की शुक्ल पक्ष के पंचमी को नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन नाग देवता या सर्प की पूजा की जाती है और उन्हें दूध से स्नान कराया जाता है। हिंदू धर्म में नाग पंचमी के पर्व का विशेष महत्व है। सावन मास का विशेष महत्व है. सावन मास का इंतजार शिव भक्त पूरे साल करते है. इस साल सावन मास की शुरुआत 22 जुलाई को होने जा रही है. नाग पंचमी सावन शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन मनाई जाती है. इस बार सावन शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि 09 अगस्त दिन शुक्रवार को है. इस दिन नाग देवता की उपासना करने का विधान है और ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है.

पंचांग के अनुसार, इस साल सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि 9 अगस्त 2024 दिन शुक्रवार को है. इस खास मौके पर नाग देवता की पूजा-अर्चना की जाती है. नाग पंचमी तिथि की शुरुआत 9 अगस्त 2024 दिन शुक्रवार की सुबह 8 बजकर 15 मिनट पर होगी और अगले दिन यानी 10 अगस्त की सुबह 6 बजकर 09 मिनट पंचमी तिथि समाप्त हो जाएगी. नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त पूरे दिन रहेगा. हालांकि विशेष पूजा के लिए 9 अगस्त की दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से 1 बजे तक का समय शुभ रहेगा, इसके अलावा 9 अगस्त को प्रदोष काल में शाम 6 बजकर 33 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 20 बजे तक नाग देवता की पूजा कर सकते हैं. नाग पंचमी की शुभ अवसर पर अनंत, वासुकी, शेष, पद्म, कंबल, कर्कोटक, अश्वंतर, धृतराष्ट्र, शंखपाल, कालिया, तक्षक और पिङ्गल नाग की पूजा का विधान है. इस विशेष दिन पर नाग को दूध पिलाया जाता है, इसके अलावा नाग देवता को दूध और धान का लावा चढ़ाने का विशेष महत्व है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नाग देवता को दूध और धान का लावा चढ़ाने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है. इस दिन नाग देवता की पूजा करने पर जीवन में कई तरह के ग्रह दोष दूर हो जाते हैं. वहीं जिन जातक की कुंडली में कालसर्प दोष है, उन्हें नाग पंचमी के दिन नाग देवता की उपासना करने से विशेष फल मिलता है और दोष का अशुभ प्रभाव कम हो जाता और जीवन में सुख-समृद्धि आती है.

नाग पंचमी पूजा विधि :-

इस व्रत के देवता आठ नागों को माना जाता है। इस दिन अनंत, वासुकि, पद्म, महापद्म, तक्षक, कुलीर, कर्कट और शंख नामक आठ नागों की पूजा की जाती है।

चतुर्थी के दिन एक समय भोजन करें और पंचमी के दिन व्रत करके शाम को एक समय भोजन करें।

पूजा के लिए लकड़ी के चौकी पर सांप की मिट्टी की प्रतिमा या मूर्ति रखी जाती है।

फिर हल्दी, रोली (लाल सिन्दूर), चावल और फूल चढ़ाकर नाग देवता की पूजा की जाती है।

फिर कच्चा दूध, घी और चीनी मिलाकर लकड़ी के पटरे पर बैठे नाग देवता को अर्पित किया जाता है।

पूजा के बाद नाग देवता की आरती की जाती है।

सुविधा के लिए आप सपेरे को कुछ दक्षिणा दे सकते हैं और यह दूध सांप को पिला सकते हैं।

नाग पंचमी की कथा अवश्य सुननी चाहिए।

नाग पंचमी साल 2024 में 9 अगस्त की सुबह 5 बजे से लेकर 8 बजे तक रहेगा। इस दिन पूजा के लिए 3 घंटे की अवधि मिलेगी। इस समय में पूजा करना शुभ फलदायी होगा।

 

 

 

 

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