उत्तराखंड समाचार

एक बार फिर गिनीज में दर्ज हुआ पद्म श्री प्रो. बीकेएस संजय का नाम

प्रो. डॉ. बी. के. एस. संजय जिनका गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड में दो बार नाम उल्लेखित किया जा चुका है

देहरादून। दुनिया में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं जिनको किसी प्रशंसा के मोहताज नहीं होते। ऐसे व्यक्तित्व समाज में अपने ही अनमोल एवं साहासिक योगदान से दुनिया में अपना नाम स्थापित करते हैं। ऐसे ही एक व्यक्तित्व जो एक सामान्य परिवार से निकले और दुनिया में अपना नाम रोशन किया जिनमें एक नाम पद्म श्री से सम्मानित प्रो. बी. के. एस. संजय भारतीय मूल के एकमात्र ऐसे ऑर्थोपीडिक सर्जन का है, जो दुनिया के 23 चेंज मेकर्स में से एक है। यह नाम गिनीज द्वारा उनकी उत्कृष्ट चिकित्सीय, सामाजिक एवं अन्य कार्यो को दृष्टिगत रखते हुए चयनित किया गया है।

यह हमारे देश के लिए बड़े गर्व की बात है कि हमारे देश में ऐसे बहुमुखी प्रतिभा के धनी प्रो. बी. के. एस. संजय का नाम दूसरी बार गिनीज बुक ऑफ़ रिकार्ड में दर्ज किया जा चुका है। देहरादून उत्तराखंड में रहने वाले और देश दुनिया के जाने-माने पद्म श्री से सम्मानित प्रो. बी. के. एस. संजय जो कि पेशे से एक ऑर्थोपीडिक सर्जन है। जो कि दुनिया के चेंज मेकर्स में से एक है, जिनको 3 दिसंबर 2023 को लंदन के प्रतिष्ठित लॉर्ड क्रिकेट ग्राउंड में हैरो, लन्दन के मेयर श्री राम जी चौहान द्वारा मेडल एवं गिनीज सर्टिफिकेट देकर सम्मानित किया गया है।  प्रो. डॉ. बी. के. एस. संजय जिनका गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड में दो बार नाम उल्लेखित किया जा चुका है गौरतलब है कि प्रो. डॉ. बी. के. एस. संजय ने गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड में पहली बार 2005 में दुनिया के सबसे बड़े जांघ के बोन का साढ़े 16 किलो ट्यूमर जिसका आकार 45 सेंटीमीटर लंबा और चौड़ाई 30 सेंटीमीटर था, का सफलतापूर्वक ऑपरेशन किया और उनका नाम पहले भी गिनीज बुक ऑफ़ रिकार्ड में दर्ज किया जा चुका है।

प्रो. डॉ. बी. के. एस. संजय 45 से भी ज्यादा देशों में अपने ज्ञान का आदन-प्रदान कर चुके हैं। इनके द्वारा की गई क्लीनिकल रिसर्च से सम्बन्धित शोेध पत्र दुनिया के प्रतिष्ठत कई शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके है। प्रो. बी. के. एस. संजय के मेन्टोर के आंकलन में इनका दुनिया के श्रेष्ठ 10 ऑर्थोपीडिक सर्जनों में से एक हैै। इसके साथ प्रो. बी. के. एस. संजय द्वारा भोजन, शिक्षा और स्वास्थ्य जो कि हर व्यक्ति की बुनियादी आवश्यकताएं है से सम्बन्धित 100 से ज्यादा अतिथि लेख लिख चुके है।

 

 

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