सूबे में स्वतंत्रता सेनानियों की उपेक्षा कब तक
स्वतंत्रता सेनानी मार्गों के नाम तक भूल गये लोग

देहरादून 02अगस्त। जिस प्रकार सूबे में स्वतंत्रता सेनानियों की उपेक्षा की जा रही है, उसे देखते हुए यही लगता है कि आने वाली पीढ़ी उन्हें अवश्य ही भूल जाएगी। कमाल की बात तो यह कि जिन स्वतंत्रता सेनानियों के नामों पर मार्गों के नाम रखे गए थे, उन्हें भी जनता भूल चुकी है। यहां तक कि कई नामों का अर्थ से अनर्थ हो गया है।
देश की आजादी के उपरांत अनेकों स्थानों के नाम स्वतंत्रता सेनानियों के नामों पर यह सोचकर रखे गए थे, कि आने वाली पीढ़ी उन्हें याद रखेगी और उनके पदचिह्नों पर चलने का संकल्प लेगी। मगर वर्तमान समय में उत्तरांचल सरकार की लापरवाही के कारण अनेकों स्थानों के नाम अर्थ से अनर्थ हो गई है। इनमें मुख्य रूप से महात्मा गांधी मार्ग, नर देवशास्त्री मार्ग, अजमल खां मार्ग, सुभाष चन्द्र बोस मार्ग, रास बिहारी बोस मार्ग, रास बिहारी बोस एवेन्यू, शारदा त्यागी मार्ग, चौधरी बिहारीलाल मार्ग, पं. जवाहर लाल नेहरू मार्ग, पं. मदनमोहन मालवीय मार्ग, सरदार पटेल मार्ग, बालगंगाधर तिलक मार्ग, चन्द्र शेखर आजाद, सरदार भगत कालोनी, महर्षि अरविन्द मार्ग, भारत रत्न पं. गोविन्दबल्लभ पंत मार्ग, इन्दिरा गांधी नगर सहित कई ऐसे नाम शामिल हैं जिन्हें वर्तमान समय से राज्य निवासी पूर्ण रूप से भूल चुके हैं।
जबकि नियम के तहत मार्गों के आरम्भ व अंत में सम्बन्धित व्यक्ति का नाम पट्ट अवश्य लगता है। मगर इस तरफ न तो सरकार ने और न ही नगर निगम ने ध्यान दिया। कमाल की बात तो यह है कि उक्त मार्गों के नामों को नई पीढ़ी तो दूर, यहां निवास करने वाले लोग भी नहीं जानते। जिन स्वतंत्रता सेनानियों के नाम पर मार्गों के नाम रखे गए थे, उन्हें आज लोग लक्ष्मण चौक, पटेल नगर, आजाद कालोनी, तिलक रोड, डालनवाला, नेताजी मोहल्ला, शास्त्री नगर, आजादघर, लैन्सडाउन रोड, इन्दिरा कालोनी, शिवाजी रोड, कौलागढ़ रोड, टंडन रोड, डिस्पेंसरी रोड, त्यागी रोड के नाम से जानते हैं, जिसके कारण सही नामों के अर्थ का अनर्थ हो गया है। यदि ये नाम यूं ही प्रचारित होते रहे तो आने वाली पीढ़ी इन नामों को भी बदल डालेगी और अपनी सुविधा के अनुसार मार्गों के नामों का उच्चारण करेगी।




