आपका शहरउत्तराखंडउत्तराखंड समाचारखबर हटकरताज़ा ख़बरेंदेशदेहरादूनन्यूज़सोशल मीडिया वायरल

धामी सरकार का 1831 दिन का राज, पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी का रिकॉर्ड तोड़ दिया

धामी सरकार ने प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देकर विकास को रफ्तार दी

देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बतौर मुख्यमंत्री लगातार 5 साल (1831 दिन) का कार्यकाल पूरा कर पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। धामी सरकार का यह लंबा कार्यकाल समान नागरिक संहिता, सख्त नकल विरोधी कानून और अवस्थापना विकास के ऐतिहासिक फैसलों के लिए जाना जाता है। इस कार्यकाल में धामी सरकार ने प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देकर विकास को रफ्तार दी है। समान नागरिक संहिता (यूसीसी) सहित कई ऐतिहासिक फैसलों से उत्तराखंड को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। 40 से अधिक नीतियां लागू कर निवेश का प्रोत्साहित किया। साथ ही कृषि, बागवानी, उद्योग, शिक्षा, पर्यटन, सौर ऊर्जा, स्वरोजगार, स्वास्थ्य क्षेत्रों में नई पहलों से रोजगार को बढ़ावा दिया। सीएम धामी के दूसरे कार्यकाल के चार साल में उत्तराखंड सख्त कानूनों के मामले में देश में सबसे अग्रणी प्रदेश बनकर खड़ा हुआ है। पांच ऐसे ऐतिहासिक फैसले उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि देश के सामने नजीर की तरह हैं। समान नागरिक संहिता से लागू होने से राज्य में सभी धर्मों के नागरिकों के लिए विवाह, तलाक और संपत्ति के बंटवारे का समान नियम लागू हो गया है। बहुविवाह पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
1831 दिन देवभूमि उत्तराखंड के मुख्य सेवक के रूप में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज राज्य में सबसे लंबी अवधि तक मुख्यमंत्री पद पर रहने का एक नया प्रशासनिक कीर्तिमान स्थापित किया है। पूर्व मुख्यमंत्री स्व. नारायण दत्त तिवारी के 1,830 दिनों के कार्यकाल के रिकॉर्ड को पार करते हुए आज का यह दिन उत्तराखंड के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बन गया है। राज्य के निरंतर विकास, प्रशासनिक सुदृढ़ता और जन-कल्याण को समर्पित इस ऐतिहासिक एवं सफल कार्यकाल के लिए मुख्यमंत्री को बधाई दी गई। उत्तराखंड के राजनीतिक इतिहास में पुष्कर सिंह धामी का 1831 दिन का यह सफर कई साहसिक और ऐतिहासिक फैसलों के लिए याद किया जाएगा। 1831 दिन का ऐतिहासिक कार्यकाल पूरा होने पर सरकार द्वारा राज्य भर में सेवा सप्ताह का आयोजन किया गया है। 4 जुलाई से 10 जुलाई तक चलने वाले इन आयोजनों के माध्यम से रोजगार, स्वास्थ्य, महिला सशक्तीकरण, और बुनियादी ढांचे से जुड़ी जन-कल्याणकारी योजनाओं को जनता तक पहुँचाया जा रहा है।
लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण अनिवार्य किया :- लड़कियों की शादी की उम्र 18 वर्ष और लड़कों की 21 वर्ष समान रूप से लागू कर दी गई। साथ ही, लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है, ऐसा न करने पर सजा का प्रावधान है। वर्तमान में यूसीसी के तहत साढ़े चार लाख से अधिक शादियों का रजिस्ट्रेशन हो चुका है। लिवइन के भी 92 पंजीकरण हो चुके हैं।
भर्ती परीक्षा में नकल रोकने के लिए उत्तराखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम और निवारण के उपाय) अधिनियम लागू कर पेपर लीक या संगठित नकल कराने वाले माफिया को आजीवन कारावास और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया। दंगा रोधी कानून के तहत अब दंगों के दौरान सार्वजनिक और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों से ही पूरे नुकसान की वसूली की जाएगी। इसके साथ ही दंगाइयों पर आठ लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगेगा। नुकसान के आकलन और वसूली के लिए एक विशेष क्लेम ट्रिब्यूनल (दावा अधिकरण) का गठन किया गया है।
धर्मांतरण कानून उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता (संशोधन) अधिनियम लागू
प्रदेश में धर्म परिवर्तन की घटनाओं को रोकने के लिए धामी सरकार ने धर्मांतरण कानून उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता (संशोधन) अधिनियम लागू किया। इससे जबरन, लालच या धोखाधड़ी से धर्म परिवर्तन कराने पर तीन से 10 वर्ष तक की जेल और न्यूनतम 50 हजार रुपये का जुर्माना अनिवार्य है। सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में भी 10 साल तक की सजा और पीड़ित को पांच लाख तक का मुआवजा आरोपी को देना होगा। यह अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती है।
उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश और भूमि व्यवस्था अधिनियम के पुराने नियमों के तहत बाहरी राज्यों के लोग या कॉर्पोरेट घराने उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में पर्यटन या उद्योगों के बहाने आसानी से कृषि भूमि खरीद लेते थे। इससे स्थानीय निवासियों की जमीनों पर बाहरी कब्जा बढ़ रहा था। इस नए और सख्त भू-कानून के तहत उत्तराखंड की कृषि भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित की गई है। अब कोई भी बाहरी व्यक्ति या संस्था कृषि भूमि का अंधाधुंध अधिग्रहण नहीं कर सकती। भूमि खरीदने के नियमों को कड़ा कर स्थानीय संसाधनों पर मूल निवासियों का अधिकार सुरक्षित किया गया है।
मदरसा बोर्ड भंग, अल्पसंख्यक शिक्षा विधेयक किया लागू
सरकार ने एक जुलाई से उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड भंग कर अल्पसंख्यक शिक्षा विधेयक लागू किया है। इसके लिए मदरसों में शिक्षा बोर्ड की ओर से निर्धारित पाठ्यक्रम लागू होगा। मदरसों में जाने वाले बच्चे भी डॉक्टर व इंजीनियर बन सकेंगे।
डिजिटल क्रांति से बढ़ी पारदर्शिता, मिली सुविधा
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 105 और भ्रष्टाचार रोधी एप के माध्यम से लाखों शिकायतों का पंजीकरण और निस्तारण किया गया। 55 से अधिक विभाग एक प्लेटफॉर्म पर आ गए। डिजिटल मॉनिटरिंग से बढ़ी पारदर्शिता व जवाबदेही। 900 सेवाएं ऑनलाइन की गईं। प्रमाणपत्र, पेंशन, लाइसेंस घर बैठे मिल रहे हैं। राज्य में नागरिक सेवाओं के लिए निर्धारित समयसीमा लागू की गई है। ई-डिस्टि्रक्ट और सीएससी के माध्यम से सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध हैं। प्रमाणपत्र और लाइसेंस जारी करने की समयसीमा भी तय हुई।
सचिवालय सहित 80 प्रतिशत कार्यालयों में ई-ऑफिस लागू हुआ। विभागों में ई-टेंडरिंग प्रणाली लागू की गई। सार्वजनिक कार्यों के लेनदेन के लिए ऑनलाइन प्रक्रिय शुरू हुई। विभिन्न योजनाओं की करोड़ों रुपये की धनराशि सीधे लाभार्थियों के खातों में जाने लगी है। बिचौलियों की भूमिका खत्म की। 150 से अधिक ऑनलाइन सेवाएं ग्राम पंचायतों तक पहुंच गई। भूमि अभिलेखों का शत-प्रतिशत डिजिटलीकरण किया गया। ऑनलाइन खसरा, खतौनी उपलब्ध है। निवेश और संपत्ति लेनदेन में पारदर्शिता से जमीनी विवादों में कमी आई।
30 हजार से ज्यादा सरकारी नौकरी मिली
धामी सरकार में युवाओं को रिकॉर्ड 30 हजार से अधिक सरकारी नौकरी मिली। इसके साथ ही सरकार ने संघ लोक सेवा आयोग, एनडीए, सीडीएस व समकक्ष लिखित परीक्षा पास करने वाले अभ्यर्थियों को साक्षात्कार की तैयारी के लिए 50 रुपये की वित्तीय सहायता देने की योजना शुरू की। धामी सरकार ने देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून लाग किया। इसके तहत अपराध को संज्ञोय, गैर जमानती और अशमनीय किया गया। अनुचित साधनों के प्रयोग में अभ्यर्थी के लिप्त पाए जाने पर तीन साल के कारावास और पांच लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान किया गया।
ऊर्जा के क्षेत्र में आई नई जान
ऊर्जा के क्षेत्र में धामी सरकार ने कई अहम फैसले लिए। एक ओर जहां सौर ऊर्जा नीति 2023 लागू की। जिसमें सौर ऊर्जा क्षमता को बढ़ावा देने के लिए भूमि लीज सुविधा, कर छूट और 2500 मेगावाट क्षमता का लक्ष्य रखा गया। पंप स्टोरेज नीति 2023 लाई गई, जिसके तहत ऊर्जा भंडारी परियोजनाओं के लिए निजी निवेश को प्रोत्साहन और ट्रांसमिशन शुल्क में छूट दी गई। भू-तापीय ऊर्जा नीति 2025 लाई गई, जिसके तहत भूतापीय ऊर्जा संसाधनों की खोज, विकास के लिए तकनीकी व वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। उरेडा ने 1000 गांवों को चिह्नित करके सोलर ग्राम बनाने का बीड़ा उठाया है। सरकार का लक्ष्य 2027 तक 4000 मेगावाट बिजली सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट के जरिए उत्पादित करना है।
प्रतिव्यक्ति आय में 41 प्रतिशत की वृद्धि
राज्य की जीएसडीपी में में बढ़ोतरी के साथ प्रतिव्यक्ति आय में 41 प्रतिशत वृद्धि हुई है। इसके अलावा राज्य का बजट का आकार 1.11 लाख करोड़ से अधिक पहुंच गया। नीति आयोग की जारी एसडीजी इंडेक्स में उत्तराखंड ने देश में पहला स्थान हासिल किया। जबकि 2021 में राज्य चौथे स्थान पर था।
जो पहली बार हुआ :-
-20 साल बाद उत्तराखंड परिवहन निगम घाटे से बाहर आया। 2022 के बाद निगम को मुनाफा हुआ।
-उत्तराखंड ने पहली बार 38 वें राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी कर सफलता आयोजन कर 24 स्वर्ण पदक सहित 103 पद जीत कर सातवां स्थान प्राप्त किया।
-नई खनन नीति लागू कर प्रदेश में खनन सुधार किए। इससे राजस्व 300 करोड़ से बढ़ कर 1100 करोड़ पहुंचा। केंद्र सरकार से भी दो करोड़ की प्रोत्साहन राशि मिली
-वित्तीय प्रबंधन में भी उत्तराखंड का प्रदर्शन बेहतर रहा। राष्ट्रीय वित्तीय प्रबंधन संस्थान की रिपोर्ट में उत्तराखंड को हिमालयी राज्यों में दूसरा स्थान मिला।
-सरकारी भूमि से अवैध अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई 10 हजार एकड़ भूमि को कब्जा मुक्त किया।
-सतत विकास लक्ष्य एसडीजी रैंकिंग में उत्तराखंड पहले स्थान पर रहा।
-प्रदेश में बारामासी पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए शीतकालीन यात्रा की शुरूआत
-उच्च हिमालयी क्षेत्र आदि कैलाश में पहली बार अल्ट्रा मैराथन का आयोजन

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Notice: ob_end_flush(): failed to send buffer of zlib output compression (1) in /home/u661627757/domains/apniavaj.com/public_html/wp-includes/functions.php on line 5464

Notice: ob_end_flush(): failed to send buffer of zlib output compression (1) in /home/u661627757/domains/apniavaj.com/public_html/wp-includes/functions.php on line 5464