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रक्षा मंत्री ने किया एडवांस्ड वेपन सिस्टम कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन

‘मिशन सुदर्शन चक्र’आधुनिक भारत का मल्टी-लेवल मिसाइल डिफेंस सिस्टम होगा

नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तेलंगाना के हैदराबाद में DRDO (रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन) की डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी , डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम मिसाइल कॉम्प्लेक्स में एक एडवांस्ड वेपन सिस्टम कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन किया। अपने संबोधन में, रक्षा मंत्री ने भारत की तकनीकी उत्कृष्टता, रणनीतिक स्वायत्तता और राष्ट्रीय सुरक्षा में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के मिसाइल सिस्टम और स्ट्रैटेजिक सिस्टम क्लस्टर के अहम योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान स्वदेशी मिसाइल सिस्टम का शानदार प्रदर्शन भारत के डिफेंस R&D इकोसिस्टम की बढ़ती ताकत का सबूत है।
राजनाथ सिंह ने कहा, “रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन द्वारा विकसित सिस्टम, जैसे आकाश और ब्रह्मोस, ने साबित कर दिया है कि भारत में ग्लोबल डिफेंस टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम में मुकाबला करने की क्षमता है। शांति के लिए ताकत ज़रूरी है, और आत्मनिर्भरता उस ताकत का सबसे भरोसेमंद आधार है। यह बात रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने साबित की है।”
‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान एयर डिफेंस की अहम भूमिका पर ज़ोर देते हुए रक्षा मंत्री ने कहा, “जब सीमाओं पर हवाई खतरों का साया मंडरा रहा था, तो हमारे एयर डिफेंस सिस्टम ने दुश्मन के इरादों को पूरी तरह नाकाम कर दिया।” उन्होंने कहा कि मिडिल ईस्ट के संघर्ष वाले इलाकों में एयर डिफेंस की अहम भूमिका देखी जा सकती है, और साथ ही ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ के ज़रिए मल्टी-लेवल मिसाइल डिफेंस सिस्टम बनाने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
राजनाथ सिंह ने कहा, “‘मिशन सुदर्शन चक्र’, जिसकी घोषणा पीएम मोदी ने 2025 के स्वतंत्रता दिवस संबोधन के दौरान की थी, आधुनिक भारत का मल्टी-लेवल मिसाइल डिफेंस सिस्टम बनने जा रहा है। यह न केवल सैन्य ठिकानों और अहम इंफ्रास्ट्रक्चर की रक्षा करेगा, बल्कि नागरिक इंफ्रास्ट्रक्चर और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करेगा। इस सिस्टम में ज़रूरत पड़ने पर निर्णायक प्रहार करने की क्षमता होगी। इसकी तीन-स्तरीय सुरक्षा नागरिकों को कम से कम असुविधा सुनिश्चित करेगी और उनकी सुरक्षा को प्राथमिकता देगी। यह सिस्टम बहुत महत्वपूर्ण संपत्तियों के लिए एक मज़बूत सुरक्षा कवच प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।” रक्षा मंत्री ने युद्ध के तेज़ी से बदलते स्वरूप और वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा हितों की रक्षा के लिए ‘लचीलेपन’ और ‘डिटरेंस’ (deterrence – दुश्मन को रोकने की क्षमता) की अहमियत पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा, “सटीक हमले की क्षमता, इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस सिस्टम, हाइपरसोनिक हथियार, ऑटोनॉमस प्लेटफॉर्म, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और एडवांस्ड सेंसर टेक्नोलॉजी आधुनिक युद्ध के स्वरूप को बदल रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था तनाव और बदलाव के दौर से गुज़र रही है; जहाँ पुरानी धारणाएँ टूट रही हैं और नए गठबंधन व चुनौतियाँ आकार ले रही हैं। ऐसे माहौल में, ‘रेज़िलिएंस’ (यानी किसी भी झटके को सहकर फिर से उबरने की क्षमता) और ‘डिटरेंस’ (यानी हमलावर के मन में यह डर पैदा करने की क्षमता कि अगर कोई बुरी नज़र डालेगा तो उसे मुँहतोड़ जवाब दिया जाएगा) की ज़रूरत है।” देश की ‘लचीलेपन’ और ‘रोकथाम’ की क्षमताओं को बनाने में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के प्रयासों को मानते हुए, श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यह संगठन देश में यह भरोसा जगा रहा है कि वह न तो अस्थिरता के आगे झुकेगा और न ही अपनी तैयारियों में कोई कमी आने देगा। उन्होंने कहा, “आज का उद्घाटन हर चुनौती से निपटने में सतर्क, सक्षम और आत्मनिर्भर बनने के हमारे संकल्प का प्रतीक है।”
रक्षा मंत्री नेरक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन की तारीफ की कि वह आज की चुनौतियों से निपटने के साथ-साथ भविष्य की ऐसी तकनीकों पर भी काम कर रहा है जो भारत को रणनीतिक बढ़त दिलाती हैं। उन्होंने कहा, “रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन की जिम्मेदारी सिर्फ़ तकनीकी बदलावों के हिसाब से ढलने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की ज़रूरतों का अंदाज़ा लगाना भी है। उसने पूरे भरोसे के साथ इस चुनौती को स्वीकार किया है। हाल के वर्षों में, उसने स्वदेशी मिसाइल तकनीकों के क्षेत्र में कई अहम उपलब्धियां हासिल की हैं। एडवांस्ड मिसाइल सिस्टम का सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया है, और रणनीतिक व सामरिक हथियार कार्यक्रमों में लगातार प्रगति हो रही है। ये उपलब्धियां सिर्फ़ तकनीकी मील के पत्थर नहीं हैं; ये भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता, आत्मविश्वास और रणनीतिक क्षमताओं को भी दिखाती हैं।”
राजनाथ सिंह ने भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए रक्षा बलों को सही समय पर और पर्याप्त मात्रा में अत्याधुनिक सिस्टम से लैस करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि युद्ध में सफलता सिर्फ़ तकनीकी श्रेष्ठता से ही पक्की नहीं होती; बड़े पैमाने पर उत्पादन की क्षमता भी उतनी ही ज़रूरी है। उन्होंने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन, सेनाओं और इंडस्ट्री से एक इंटीग्रेटेड इकोसिस्टम के तौर पर काम करने का आह्वान किया ताकि तकनीकों को तेज़ी से डेवलपमेंट से बड़े पैमाने पर उत्पादन तक ले जाया जा सके और समय पर उन्हें शामिल किया जा सके।
रक्षा मंत्री ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन से उत्पादन को डेवलपमेंट प्रोसेस का एक अहम हिस्सा मानने का आग्रह किया। उन्होंने डेवलपमेंट से उत्पादन के समय को कम करने, मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस को आसान बनाने, स्वदेशी कंटेंट को बढ़ाने और ऐसे सिस्टम विकसित करने पर ज़ोर दिया जिनका ज़रूरत पड़ने पर रक्षा बलों के लिए तेज़ी से बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जा सके।
श्री राजनाथ सिंह ने इस बात पर ज़ोर दिया कि सरकार ने पिछले 12 वर्षों में रक्षा तकनीकों के क्षेत्र में ‘मेक-इन-इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विज़न को साकार करने के मकसद से R&D को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं। उन्होंने इस प्रयास में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के योगदान की सराहना की और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन की प्रयोगशालाओं, रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, निजी उद्योग, स्टार्ट-अप, MSME और शिक्षा जगत के बीच बेहतर सहयोग के कारण रक्षा इकोसिस्टम में आए बदलाव को रेखांकित किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह मिलकर काम करने का मॉडल भारत को इनोवेशन से प्रोडक्शन और प्रोडक्शन से ऑपरेशनल क्षमता तक के सफर को तेज़ करने में मदद करेगा। उन्होंने भरोसा जताया कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन देश की क्षमताओं को मज़बूत करना, टेक्नोलॉजी के लिए दूसरों पर निर्भरता कम करना और रक्षा बलों की ऑपरेशनल क्षमता को बढ़ाना जारी रखेगा। रक्षा मंत्री ने एक टेक्निकल प्रदर्शनी का भी दौरा किया, जिसमें रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन द्वारा विकसित अत्याधुनिक रक्षा टेक्नोलॉजी, एडवांस्ड हथियार सिस्टम और स्वदेशी मिसाइल प्लेटफॉर्म दिखाए गए थे। इस मौके पर डायरेक्टर जनरल (मिसाइल और स्ट्रैटेजिक सिस्टम) श्री यू. राजा बाबू, DRDL के डायरेक्टर डॉ. अंकांथी राजू और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

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