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“टटपूंजिये चैनल” कहने वाले मंत्री शायद ये भूल गए की पत्रकार यूं ही नहीं बन जाते

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म : पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री 3 वर्ष की होती है

संदीप गोयल/ एस.के.एम. न्यूज सर्विस
देहरादून, 22 मई। “टटपूंजिये चैनल…” कहने वाले कैबिनेट मंत्री शायद भूल गए कि भारत में पत्रकार यूं ही नहीं बन जाते, यहां पढ़ना लिखना पड़ता हैं, तब जाकर पत्रकार बना जाता हैं। जो पढ़-लिखकर आता हैं वो “टटपूंजिये चैनल…” कैसे चला सकते हैं। कैबिनेट मंत्री शायद ये भूल गये हैं की जिन्हे वो “टटपूंजिये चैनल…” कह रहे हैं उन्हीं ने इन्हे मंत्री की कुर्सी तक पहुंचाने मे मदद की होंगी। शायद कैबिनेट मंत्री ये भी भूल गये होंगे की वो जिस उत्तराखंड राज्य मे कैबिनेट मंत्री बन कर घूम रहे हैं उस उत्तराखंड राज्य निर्माण के आंदोलन को सड़क से सदन तक पहुंचाने मे मीडिया का बहुत बड़ा योगदान रहा हैं। आज “टटपूंजिये चैनल” कहना मंत्री जी के लिये आसान हो गया हैं, अगर पढ़-लिखकर पत्रकारिता पाठ्यक्रम मे अवल आकर “टटपूंजिये चैनल” जैसे शब्दों को सुनना पड़े तो मंत्री जी को ये भी बता देना चाहिये की यदि कोई जो अनपढ़ व्यक्ति नेता बन जाये उसे क्या बोला जाये।
मंत्री जी को ये जानकारी होनी चाहिये की पत्रकार अनपढ़ नहीं होता, पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री 3 वर्ष की होती है। पत्रकार के ऊपर प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (Press Council of India (PCI) ) होती है। प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) संसद द्वारा 1978 के प्रेस काउंसिल अधिनियम के तहत स्थापित एक वैधानिक, अर्ध-न्यायिक स्वायत्त निकाय है। इसके प्रमुख उद्देश्य प्रेस की स्वतंत्रता को संरक्षित करना और भारत में समाचार पत्रों और समाचार एजेंसियों के मानकों को बनाए रखना और उनमें सुधार करना है। परिषद में 29 सदस्य 1 अध्यक्ष और 28 अतिरिक्त सदस्य होते हैं। भारत के सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश इसके अध्यक्ष होते हैं।
“टटपूंजिये चैनल…” या हजारों पत्रकार रोज आते हैं बोलने वाले भाजपा के नेताओ को याद रखना चाहिये की कोई भी पत्रकार अनपढ़ नहीं होता, वह पढ़ा-लिखा होता हैं, यदि भाजपा नेताओ को पत्रकारिता पाठ्यक्रम की जानकारी नहीं हैं तो इसकी जानकारी देना हमारा फर्ज हैं। कृपया इस जानकारी को पढ़े और याद रखे हर नेता पत्रकार नहीं बन सकता, लेकिन हर पत्रकार नेता बन सकता हैं।
बैचलर ऑफ जर्नलिज्म :- भारत में, पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री 3 वर्ष की होती है। भारत में पत्रकारिता पाठ्यक्रम विभिन्न नामों से जाने जाते हैं जैसे बीजे (बैचलर ऑफ जर्नलिज्म), बीजे (ऑनर्स) (बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (ऑनर्स)), बीसीजे (बैचलर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म), बीएमएम (बैचलर ऑफ मास मीडिया), बीए-जेएमसी (बैचलर ऑफ आर्ट्स इन जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन), बीए-मास कम्युनिकेशन (बैचलर ऑफ आर्ट्स इन मास कम्युनिकेशन)।
हिंदी में पत्रकारिता स्नातक (Bachelor of Journalism) तीन वर्षीय डिग्री कोर्स है, जो प्रिंट, डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए प्रशिक्षित करता है। इसे अक्सर बीजे (BJ), बीएजे (BAJ) या बीजेएमसी (BJMC) कहा जाता है, जहाँ हिंदी माध्यम से शिक्षा प्रदान की जाती है।
मुख्य विशेषताएं :-
कोर्स की अवधि : ३ वर्ष (६ सेमेस्टर)।
योग्यता : किसी भी स्ट्रीम में १२वीं (10+2) उत्तीर्ण।
माध्यम : हिंदी (कुछ विश्वविद्यालय अंग्रेजी और क्षेत्रीय भाषाओं के विकल्प भी देते हैं)।
समाचार लेखन और संपादन: (News Writing and Editing)
रिपोर्टिंग: (Reporting) – खोजी, अपराध, और राजनीतिक रिपोर्टिंग
रेडियो और टीवी पत्रकारिता: (Radio and TV Journalism / A/V Production)
जनसंचार के सिद्धांत: (Principles of Mass Communication)
मीडिया कानून और आचार: (Media Laws and Ethics)
डिजिटल मीडिया और सोशल मीडिया
पत्रकारिता में स्नातक (बीजे Bachelor of Journalism) या पत्रकारिता और जनसंचार में कला स्नातक (बीएजेएमसी) 3 से 4 वर्ष की स्नातक डिग्री है। यह सैद्धांतिक मीडिया अध्ययन को रिपोर्टिंग, संपादन, डिजिटल स्टोरीटेलिंग और मीडिया कानून में व्यावहारिक प्रशिक्षण के साथ जोड़ती है ताकि छात्रों को समाचार कक्ष, विज्ञापन, जनसंपर्क और सामग्री निर्माण में करियर के लिए तैयार किया जा सके।
मुख्य पाठ्यक्रम की विशेषताएं :-
अवधि: आमतौर पर 3 वर्ष, हालांकि आधुनिक शिक्षा नीतियों के अनुरूप कई विश्वविद्यालय अब 4 वर्षीय ऑनर्स या अनुसंधान के साथ ऑनर्स का विकल्प प्रदान करते हैं।
मुख्य पाठ्यक्रम: छात्र समाचार लेखन, रिपोर्टिंग, मीडिया नैतिकता, फोटोग्राफी, प्रसारण पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया उत्पादन में पाठ्यक्रम लेते हैं।
पात्रता: उम्मीदवारों को किसी भी स्ट्रीम (कला, वाणिज्य या विज्ञान) से 10+2 उत्तीर्ण होना चाहिए, जिसमें न्यूनतम कुल अंक आमतौर पर 45% और 50% के बीच हों।
मास कम्युनिकेशन :- मास कम्युनिकेशन (Mass Communication) का हिंदी अर्थ ‘जनसंचार’ होता है। इसके तहत एक साथ तकनीक या मीडिया के माध्यम से विशाल जनसमूह तक सूचना, विचार और मनोरंजन पहुँचाया जाता है। इसमें पत्रकारिता, विज्ञापन (Advertising), जनसंपर्क (PR), और फिल्म निर्माण शामिल हैं।
मास कम्युनिकेशन (Mass Communication) का हिंदी अर्थ ‘जनसंचार’ होता है। इसके तहत एक साथ तकनीक या मीडिया के माध्यम से विशाल जनसमूह तक सूचना, विचार और मनोरंजन पहुँचाया जाता है। इसमें पत्रकारिता, विज्ञापन (Advertising), जनसंपर्क (PR), और फिल्म निर्माण शामिल हैं।
मास कम्युनिकेशन के माध्यम :-
प्रिंट मीडिया : समाचार पत्र, पत्रिकाएं, और किताबें।
इलेक्ट्रॉनिक मीडिया : टेलीविजन और रेडियो।
डिजिटल मीडिया : सोशल मीडिया, यूट्यूब, वेब पोर्टल्स, और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म।
फिल्म और विज्ञापन : सिनेमा और ब्रांड प्रमोशन।
कोर्स और योग्यता
स्नातक (UG) : BA/BSC इन मास कम्युनिकेशन या जर्नलिज्म (अवधि: 3-4 साल)। 12वीं पास छात्र आवेदन कर सकते हैं।
स्नातकोत्तर (PG) : MA या MSc (अवधि: 2 साल)।
डिप्लोमा : 1 साल के शॉर्ट-टर्म सर्टिफिकेट और डिप्लोमा कोर्स भी उपलब्ध हैं।

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