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महासंघ ने मनाया 2100 दीपों का भव्य दीपोत्सव

देहरादून। उत्तराखंड ब्राह्मण समाज महासंघ ने हिंदू नववर्ष प्रतिपदा के अवसर पर राजधानी देहरादून के काली मंदिर, रायपुर थाना के निकट एक भव्य दीपोत्सव का आयोजन किया गया। संध्या 7 बजे शुरू हुए इस कार्यक्रम में 2100 दीप प्रज्ज्वलित कर नव संवत 2083 का स्वागत किया गया, जो सनातन परंपराओं की जीवंतता और सामाजिक एकता का प्रतीक बना। मुख्य अतिथि पूर्व मेयर सुनील यूनियाल ‘गामा’ ने दीप प्रज्ज्वलन कर शुभकामनाएं दीं। महासंघ के संरक्षक लालचंद शर्मा अति विशिष्ट अतिथि के रूप में, जबकि महंत शशिकांत दुबे एवं भाजपा पार्षद राकेश पंडित (शाहनगर) विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, इनके अतिरिक्त अन्य सम्मानित अतिथियों की उपस्थिति में यह उत्सव संपन्न हुआ। निर्धारित समय से पूर्व, शाम 6 बजे से ही भक्तों का समागम शुरू हो गया था, जिससे दीपोत्सव में व्यापक सहयोग मिला। यह आयोजन केवल धार्मिक उत्सव ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक जागरण का माध्यम भी सिद्ध हुआ।
विक्रम संवत की प्राचीन भारतीय पंचांग परंपरा को पुनर्जीवित करने से ब्राह्मण समाज ने तर्क दिया कि आधुनिक काल में भी हिंदू नववर्ष का स्वागत राष्ट्रीय एकता और पर्यावरण अनुकूल उत्सवों को मजबूत करता है। महासंघ अध्यक्ष पंडित रामप्रसाद गौतम ने कहा, “2100 दीपों का प्रज्ज्वलन हमारी सनातन विरासत की रोशनी है, जो अंधकार मिटाकर नवीन ऊर्जा का संचार करता है।” महासचिव डॉ. वी.डी. शर्मा ने जोर देकर बताया कि ऐसे कार्यक्रम उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करते हुए युवाओं में परंपरागत मूल्यों का संचार करते हैं। कार्यक्रम में सैकड़ों सदस्यों और स्थानीय निवासियों ने भाग लिया, जो देहरादून की सामाजिक सद्भावना का उदाहरण बना। पूर्व मेयर सुनील यूनियाल गामा ने संबोधन में कहा, “ऐसे आयोजन शहर की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित रखते हैं तथा पर्यटन को बढ़ावा देते हैं।” संरक्षक लालचंद शर्मा जी ने आशीर्वाद देते हुए हिंदू नववर्ष को समृद्धि का प्रतीक बताया। महासंघ ने सभी सहयोगियों का आभार जताया तथा भविष्य में ऐसे और आयोजनों की घोषणा की। यह दीपोत्सव न केवल धार्मिक उत्साह बढ़ाने वाला था, बल्कि सामाजिक एकजुटता का तर्कपूर्ण संदेश भी दे गया कि परंपराएं आधुनिक जीवन का अभिन्न अंग हैं। कार्यक्रम में नगर के ब्राह्मण संगठनों के प्रतिनिधि पंडित एस.पी.पाठक, आचार्य विजेंद्र ममगई, पंडित शशि कुमार शर्मा, पंडित थानेश्वर उपाध्याय, पंडित सोमदत्त शर्मा, पंडित सिद्धनाथ उपाध्याय, अरुण कुमार शर्मा, गौरव बख्शी, उमाशंकर शर्मा, पदम सिंह थापा, अशोक क्षेत्री, पुरुषोत्तम गौतम, अवनीश कांत, आचार्य हेमंतमणि, सूर्यप्रकाश भट्ट, सुनीता विद्यार्थी, पंडित पुरुषोत्तम गौतम, दिनेश्वर नाथ द्विवेदी, शशिकांत मिश्रा, रजत शर्मा आदि उपस्थित थे।

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