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दिवाकर भट्ट का संघर्षशील व्यक्तित्व जनराजनीति की सशक्त पहचान : मुख्यमंत्री

देहरादून, 10 मार्च। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज विधानसभा में देवप्रयाग के पूर्व विधायक स्वर्गीय दिवाकर भट्ट को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका संघर्षशील व्यक्तित्व और निर्भीक नेतृत्व उत्तराखण्ड की जनराजनीति की सशक्त पहचान रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड की राजनीति में उन्हें “फील्ड मार्शल” के नाम से जाना जाता था, जो उनके दृढ़ और संघर्षशील नेतृत्व का परिचायक था। स्वर्गीय भट्ट जी का जीवन इस बात की प्रेरणा देता है कि राजनीति केवल सत्ता प्राप्ति का माध्यम नहीं, बल्कि सेवा और समर्पण का मार्ग भी है।
उन्होंने कहा कि टिहरी जनपद के बडियारगढ़ क्षेत्र के सुपार गांव में वर्ष 1946 में जन्मे दिवाकर भट्ट जी ने कम उम्र में ही जन आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू कर दी थी। मात्र 19 वर्ष की आयु से ही वे जनहित के मुद्दों को लेकर आंदोलनों में जुट गए थे। उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन के कठिन दौर में उन्होंने अग्रिम पंक्ति में खड़े होकर आंदोलन को नई ऊर्जा और दिशा दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1995 का श्रीयंत्र टापू आंदोलन और खैट पर्वत पर किया गया उनका अनशन राज्य आंदोलन के इतिहास में आज भी याद किया जाता है। ट्रेड यूनियन आंदोलन से अपनी पहचान बनाने वाले दिवाकर भट्ट ने बीएचईएल की नौकरी छोड़कर उत्तराखण्ड आंदोलन को मजबूत करने का निर्णय लिया और पहाड़ की आवाज को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वर्गीय भट्ट ने “घेरा डालो-डेरा डालो” जैसे प्रभावी नारों के माध्यम से जनआंदोलन को नई धार दी। यह नारा केवल एक आह्वान नहीं, बल्कि जनदबाव की प्रभावी रणनीति बन गया, जिसने युवाओं और आम लोगों को आंदोलन से जोड़ने का काम किया।
उन्होंने कहा कि राज्य गठन के बाद वर्ष 2007 में देवप्रयाग विधानसभा क्षेत्र की जनता ने उन्हें अपना प्रतिनिधि चुनकर विधानसभा भेजा। विधायक के रूप में उन्होंने क्षेत्र और राज्य के मुद्दों को सदन में प्रभावी ढंग से उठाया। बाद में उन्होंने राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में राजस्व, भू-प्रबंधन, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति तथा सैनिक कल्याण जैसे महत्वपूर्ण विभागों का दायित्व संभाला। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य निर्माण, वन कानूनों में संशोधन, पंचायत परिसीमन, हिल कैडर के क्रियान्वयन और पर्वतीय क्षेत्रों के अधिकारों के मुद्दों पर दिवाकर भट्ट हमेशा मजबूती से खड़े रहे। उन्होंने कहा कि 25 नवंबर 2025 को उनका निधन हुआ , जो प्रदेश के सार्वजनिक जीवन के लिए अपूरणीय क्षति है। मुख्यमंत्री ने सदन की ओर से दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शोक-संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की।

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