“अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच” ने किया “उत्तराखंड बंद” का आह्वान

देहरादून, 08 जनवरी। अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित ‘वीआईपी’ हस्तियों की जांच और गिरफ्तारी की मांग को लेकर गठित “अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच” ने 11 जनवरी को “उत्तराखंड बंद” का आह्वान किया। आज दोपहर 12 बजे प्रेस क्लब देहरादून में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस मे मंच के नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार जांच में पारदर्शिता नहीं बरत रही है और ‘वीआईपी’ को बचाने की कोशिश हो रही है।
महिला मंच की संयोजक कमला पंत ने कहा कि निचली अदालत के जजमेंट में ‘वीआईपी’ और ‘स्पेशल सर्विस’ को लेकर उल्लेख है तथा अंकिता की व्हाट्सऐप चैट में भी ‘वीआईपी गेस्ट’ का जिक्र दिखाई देता है, लेकिन एसआईटी ने इस दिशा में गंभीरता नहीं दिखाई। कमला पंत ने कहा कि “अंकिता भंडारी मामले की ‘उत्तराखंड की एप्स्टीन फ़ाइल’ भी खुलेगी, इसलिए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार भी इस मामले में दिखाई दे रहे हैं।” मंच ने कहा कि वह लंबी लड़ाई के लिए तैयार है और न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता एवं ‘वीआईपी गिरफ्तारी’ की मांग जारी रखेगा। युवा नेता मोहित डिमरी ने आरोप लगाया कि सरकार लगातार ‘वीआईपी अपराधियों’ को बचाने की कोशिश कर रही है तथा मुख्यमंत्री द्वारा परिवार से किए गए वादे अभी तक पूरे नहीं हुए। यूकेडी उपाध्यक्ष शांति भट्ट ने दावा किया कि जांच शुरू से भटकाई गई क्योंकि कथित रूप से कुछ नाम सत्तारूढ़ दल से जुड़े होने की चर्चा रही है। राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी की प्रदेश अध्यक्ष सुलोचना इष्टवाल ने कहा कि इस मामले ने पूरे राज्य को झकझोर दिया था और सीबीआई जांच की मांग उठी थी, पर सरकार ने इसे स्वीकार नहीं किया।
मंच ने आरोप लगाया कि गठित एसआईटी ने ‘वीआईपी एंगल’ की जांच नहीं की, रिसॉर्ट के कमरे ढहाने जैसी घटनाओं में सबूत छिपाए गए लेकिन ऐसे आरोपों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। मंच ने दावा किया कि आंदोलन को लगातार सामाजिक व राजनीतिक समर्थन मिल रहा है, जिसमें कांग्रेस पार्टी का समर्थन भी शामिल बताया गया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य रूप से गढ़वाल सभा के गजेंद्र भंडारी, उत्तराखंड महिला मंच की निर्मला बिष्ट, भारत ज्ञान विज्ञान समिति की डॉ. उमा भट्ट, उत्तराखंड समतानता पार्टी के टी.एस. नेगी, अखिल भारतीय समानता मंच के प्रदेश अध्यक्ष वी.के. धस्माना आदि उपस्थित थे।




