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कांग्रेस की यात्रा ना कभी रुकी थी, ना कभी रुकेगी : डॉक्टर प्रतिमा सिंह

देहरादून, 28 दिसंबर। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की प्रखर प्रवक्ता डॉक्टर प्रतिमा सिंह ने कहा की आज से १४१ साल पहले देश में एक क्रांति का जन्म हुआ था, इस क्रांति को हम भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नाम से जानते हैं। हिंदुस्तान अंग्रेजों की गुलामी की बेड़ियों में जकड़ा हुआ था, लोग अंग्रेजों के इन अत्याचारों से आजिस आ चुके थे और दूर दूर तक इन अत्याचारों से बचने का कोई रास्ता नज़र नहीं आ रहा था, तभी २७ दिसम्बर १८८५ को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना हुई।

कांग्रेस देश की उस आज़ादी की लड़ाई में सफल हुई, फिर इसने देश के लोगों की भलाई उनकी उन्नति के साथ-साथ शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीक़े से संसदीय लोकतंत्र पर आधारित एक समाजवादी राष्ट्र की स्थापना को अपना उद्देश्य बनाया और उसी दिशा में काम भी किया। कांग्रेस एक विचार है जिसने १९० सालों से देश को अंग्रेजों की गुलामी से आज़ाद कराया। कांग्रेस वो विचार है जिसके साथ देशवासी एक जुट हुए और अंग्रेजों को भारत से खदेड़ा कांग्रस। कांग्रेस की यात्रा १४१ साल पहले शुरू जरूर हुई थी पर कांग्रेस आज भी यात्रा पर ही है देश को जोड़ने की यात्रा। देशवासियों के दिलों को मोहब्बत से जोड़ने की यात्रा आइडिया ऑफ़ इंडिया को बचाने की यात्रा और तानाशाही को खत्म करने की यात्रा। कांग्रेस की ये यात्रा ना कभी रुकी थी ना कभी रुकेगी।

1947 में भारत की स्वतन्त्रता के बाद से भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस भारत के मुख्य राजनैतिक दलों में से एक रही है। इस दल के कई प्रमुख नेता भारत के प्रधानमन्त्री रह चुके हैं। पंडित जवाहरलाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री,पण्डित नेहरू की पुत्री इन्दिरा गाँधी एवं उनके नाती राजीव गाँधी इसी दल से थे। कांग्रेस पार्टी सामाजिक समानता, स्वतंत्रता, धर्मनिरपेक्षता और समान अवसर पर जोर देती है। इसकी राजनीतिक स्थिति सामान्यत: मध्य में मानी जाती है। कांग्रेस ने खुद को हिंदू समर्थक और अल्पसंख्यकों के रक्षक के रूप में पेश किया है। पार्टी महात्मा गांधी के सिद्धांत सर्व धर्म समभाव का समर्थन करती है, जिसे इसके सदस्य धर्मनिरपेक्षता के रूप में देखते हैं। “भारत सभी धर्मों का है, जो इसकी ताकत है, और कांग्रेस इसकी प्रिय धर्मनिरपेक्षता के मूल्यों को नष्ट नहीं होने देगी।” स्वतंत्रता के बाद, कांग्रेस ने हिंदी को भारत की एकमात्र राष्ट्रीय भाषा के रूप में स्थापित करने का समर्थन किया।

 

 

 

 

 

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