उत्तराखंड

अयोध्या राम मंदिर ध्वजारोहण की भव्य तैयारियां

ध्वजारोहण के अनुष्ठान से पहले 501 कलशों के साथ भव्य शोभायात्रा

अयोध्या/देहरादून, 23 नवंबर। अयोध्या राम मंदिर ध्वजारोहण की भव्य तैयारियां हैं। ध्वजारोहण के अनुष्ठान से पहले 501 कलशों के साथ भव्य शोभायात्रा से उत्सव का आगाज हुआ है। इसी भव्य तैयारी की कड़ी में शुक्रवार से शुरू हो रहा पांच दिवसीय वैदिक अनुष्ठान, जिसकी अयोध्या में राम मंदिर ध्वजारोहण की भव्य तैयारियाँ चरम पर हैं। 501 कलशों की अद्भुत शोभायात्रा ने पूरे अयोध्या धाम को राममय कर दिया। रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद अब 25 नवंबर का ध्वजारोहण का शुभ क्षण एक और ऐतिहासिक अध्याय जोड़ने जा रहा है। यह सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि करोड़ों भक्तों की आस्था, परंपरा और रामायणकालीन संस्कृति का पुनर्जागरण है। पांच दिवसीय वैदिक अनुष्ठान इस दिव्य उत्सव की भव्यता को और बढ़ा रहा है। अयोध्या में उत्सव का नया प्रभात उदय हो रहा है।

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में नवनिर्मित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर पर ध्वजारोहण समारोह की शुरुआत हो गई है। अयोध्या धाम एक बार फिर एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक क्षण का साक्षी बनने जा रहा है। रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद अब 25 नवंबर को होने वाला ध्वजारोहण समारोह शहर को एक बार फिर रामभक्ति की अनन्य छटा में रंगने वाला है। 501 कलशों के साथ निकली भव्य कलश यात्रा ने इस आध्यात्मिक आयोजन की शुरुआत कर दी। भव्य कलश यात्रा के दौरान सरयू तट से लेकर जन्मभूमि मंदिर तक राममय माहौल नजर आया। अयोध्या में दोपहर ढाई बजे सरयू नदी के संत तुलसीदास घाट से 501 कलशों के साथ शोभायात्रा शुरू हुई। इस यात्रा में महर्षि वशिष्ठ वेद विद्यालय, मांझा तिहुरा, कारसेवकपुरम आदि गुरुकुलों के बटुक ब्रह्मचारी अग्रिम पंक्ति में चल रहे थे। उनके पीछे मंदिर निर्माण प्रभारी गोपाल राव, मुख्य यजमान डा. मिश्र, आचार्य चंद्र भानु शर्मा, आचार्य इंद्रदेव मिश्र और आचार्य रविन्द्र पैठाढ़े और अंत में पीतवस्त्र धारी 501 कलश धारण किए महिलाएं कतारबद्ध होकर चल रही थीं। आगे चल रहे रथ पर फूल-मालाओं से सजी सजावट के बीच मंदिर आंदोलन के गीतों ने वातावरण को राममय बना दिया। रास्ते में जगह-जगह पुष्प वर्षा, झंडियों और वंदनवारों से सजे मार्ग ने शोभायात्रा को एक दिव्य स्वरूप दे दिया। शोभायात्रा लता मंगेशकर चौक, राम पथ, हनुमानगढ़ी, कनक भवन, रामलीला देवस्थानम होते हुए रंगमहल बैरियर तक पहुंची। वहां से महिलाओं को सुरक्षा जांच के बाद जन्मभूमि परिसर भेजा गया। यज्ञमंडप में कलशों को स्थापित कराया गया। इसके बाद महिलाओं ने रामलला के दर्शन किए।

संत तुलसीदास घाट पर महिलाओं के बैठने के लिए बड़ी व्यवस्था की गई थी। वहां कुर्सियां, कालीन और विश्राम की सुविधा उपलब्ध कराई गई। तिवारी मंदिर, कोतवाली क्षेत्र और अन्य स्थानों पर नगर निगम और मंदिर समितियों ने पुष्प वर्षा के बीच स्वागत किया। विश्व हिंदू परिषद विभाग संयोजक धीरेश्वर वर्मा के अनुसार, करीब 700 महिलाओं ने इस यात्रा में भाग लिया। राम मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण के पांच दिवसीय अनुष्ठान में पूरे देश के 108 वैदिक आचार्य भाग ले रहे हैं। काशी से आए मुख्य आचार्य जयप्रकाश त्रिपाठी इस अनुष्ठान का संचालन करेंगे। सबसे पहले कलश पूजन, वरुण पूजन और इसके बाद कलश यात्रा का आयोजन किया जा रहा है। क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार चतुर्वेदों और अन्य ग्रंथों का जप, हवन और पारायण किया जाएगा।

ध्वजारोहण समारोह में भाग लेने वाले विशेष अतिथियों के लिए नई एंट्री योजना तैयार की गई है। अब सभी अतिथि एक ही प्रवेश द्वार से नहीं आएंगे। उन्हें चार अलग-अलग स्थानों पर एकत्र किया जाएगा। वे राम पथ पूर्वी क्षेत्र, कारसेवकपुरम, जानकी घाट स्थित कनक महल और बाग बिजैसी में एकत्र होंगे। ये सभी अतिथि तीर्थ क्षेत्र की ओर से उपलब्ध कराए गए वाहनों से निर्धारित मार्ग से मंदिर परिसर तक पहुंचेंगे। मोबाइल फोन, लाइसेंसी हथियार, अंगरक्षक को कार्यक्रम स्थल पर प्रवेश नहीं दिया जाएगा।

लगभग 1800 अतिथियों के लिए 100 आश्रमों एवं अतिथि गृहों में विशेष व्यवस्था की गई है। 25 नवंबर की सुबह राम मंदिर में दर्शन बंद रहेगा। शाम से आम श्रद्धालुओं को दर्शन मिलेगा। 25 नवंबर को विवाह पंचमी के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने के कारण सुबह 6 बजे से दोपहर 2:30 बजे तक मंदिर में आम जनता का प्रवेश बंद रहेगा। सीएम योगी आदित्यनाथ ने आग्रह किया कि श्रद्धालु निराश न हों।

सीएम योगी के श्रद्धालुओं की सुविधा पर चर्चा के बाद तय किया गया कि राम मंदिर शाम से शयन आरती तक दर्शन खोले जा सकते हैं। अगले दिन 26 नवंबर को कोई भी वीआईपी पास जारी नहीं होगा। सभी आम श्रद्धालु बिना बाधा दर्शन कर सकेंगे। आवश्यकता पड़ी तो मंदिर 15–16 घंटे तक भी खुला रखा जाएगा। नृपेन्द्र मिश्र ने स्पष्ट किया कि प्राण-प्रतिष्ठा के समय जैसी भीड़ की आशंका को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है ताकि हर श्रद्धालु को रामलला के दर्शन मिल सकें।

ध्वजारोहण के इस ऐतिहासिक अनुष्ठान ने अयोध्या को फिर से आध्यात्मिक केंद्र बना दिया है। सड़कों की सजावट से लेकर महिलाओं के कलशों तक हर दृश्य में अयोध्या रामायण कालीन परंपरा के पुनर्जागरण का अनुभव करा रही है। 25 नवंबर को होने वाला यह ध्वजारोहण समारोह करोड़ों भक्तों की आस्था को नया उत्सव प्रदान करेगा और अयोध्या एक बार फिर विश्व के आध्यात्मिक मानचित्र पर जगमगाएगी।

 

 

 

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