उत्तराखंड समाचार

स्व-नारी“ के नाम से की कार्यक्रम की शुरुआत

’स्व-नारी टेकस्प्रिंट’ के प्रथम संस्करण की शुरुआत

देहरादून, 24 मार्च। बैंक ऑफ़ बड़ौदा ने देश में महिलाओं के वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी, रिज़र्व बैंक इनोवेशन हब (आरबीआईएच) के साथ साझेदारी की घोषणा की है। आरबीआईएच ने “स्व-नारी“ के नाम से लैंगिक एवं वित्तीय सेवाओं से संबंधित एक कार्यक्रम की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य महिलाओं को केंद्र में रखते हुए, तकनीक की मदद से उनकी वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा उन्हें स्वावलंबी बनाना है। आरबीआईएच ने इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए ’स्व-नारी टेकस्प्रिंट’ के प्रथम संस्करण की शुरुआत की है, तथा बैंक ऑफ़ बड़ौदा भी लैंगिक असमानता को दूर करने के लिए डिजिटल समाधान तैयार करने के लिए स्केल-अप पार्टनर के रूप में इसमें अपना सहयोग दे रहा है। टेकस्प्रिंटस समस्या-समाधान हेतु ऐसे सत्र हैं, जो तकनीक की मदद से जटिल समस्याओं के समाधान के लिए नवोन्मेषिता और परस्पर सहयोग को बढ़ावा देते हैं। स्व-नारी टेकस्प्रिंट का मुख्य उद्देश्य तकनीक का उपयोग करके भारत में महिलाओं के वित्तीय समावेशन की स्थिति को बेहतर बनाना है और यह महिलाओं द्वारा शुरू किए गए स्टार्ट-अप्स तथा तकनीकी क्षेत्र में महिलाओं को बढ़ावा देने वाले मंच के रूप में काम करेगा, जो भारत में निम्न एवं मध्यम आय वर्ग की वंचित महिलाओं और उनके स्वामित्व वाले उद्यमों के लिए स्मार्ट, रचनात्मक एवं सस्टनेबल समाधान तैयार करेगा। ’स्व-नारी टेकस्प्रिंट’ का आयोजन 18 अप्रैल से 22 अप्रैल, 2022 के दौरान किया जाएगा। इस अवसर पर, विक्रमादित्य सिंह खीची, कार्यपालक निदेशक, बैंक ऑफ़ बड़ौदा, ने कहा, “तकनीक की मदद से देश की गंभीर समस्याओं का समाधान का विचार सचमुच बेहद प्रभावशाली है। बैंक ऑफ़ बड़ौदा को आरबीआईएच की ’स्व-नारी टेकस्प्रिंट’ पहल में अपना सहयोग देने पर गर्व है, जो भारत में लैंगिक असमानता को दूर करने में बेहद मददगार है। नवोन्मेषिता एवं परस्पर-सहयोग पर केंद्रित इस मुहिम से महिलाओं के लिए सर्वोत्तम परिणाम सुनिश्चित होंगे, जो उनके वित्तीय समावेशन में गति लाएगा और इससे देश में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलेगा।” स्व-नारी टेकस्प्रिंट देश के फिनटेक, वित्तीय सेवा प्रदाताओं, नवप्रवर्तकों और विषय-विशेषज्ञों को एकजुट करेगा, ताकि इसके माध्यम से सभी के सहयोग और परस्पर विचार-विमर्श के माध्यम से विशिष्ट समस्याओं का समाधान निकाला जा सके तथा वास्तविक समय में प्रोटोटाइप सॉल्यूशन की कोडिंग की जा सके। इस संबंध में 7 ऐसी समस्याओं की पहचान की गई है एवं उनका विवरण तैयार किया गया है, तथा इनमें भागीदारी के लिए 2 इवेंट ट्रैक उपलब्ध कराए गए हैं। एक ट्रैक उपयोगकर्ताओं द्वारा परीक्षण एवं सत्यापन के लिए उपयोगी पर्याप्त सुविधाओं के साथ न्यूनतम व्यवहार्य उत्पाद (एमवीपी) बनाने पर केंद्रित होगा। दूसरा ट्रैक अन्य लोगों के सहयोग से समस्याओं को हल करने और प्रोटोटाइप तैयार करने पर केंद्रित होगा।

 

 

 

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