उत्तराखंड समाचार

घोड़े पर सवार होकर आ रहीं माँ : डॉक्टर आचार्य सुशांत राज

। मंगलवार और शनिवार को नवरात्रि शुरू होने पर माता घोड़े पर सवार होकर पधारती हैं।

देहरादून, 4 अप्रैल। डॉक्टर आचार्य सुशांत राज ने बताया की नवरात्रि जिस दिन से शुरू होती है उसके आधार पर ही माता की सवारी निश्चित होती है। धर्म शास्त्रों के अनुसार, मंगलवार और शनिवार को नवरात्रि की शुरूआत शुभ संकेत वाली नहीं होती है। इस बार चैत्र नवरात्रि 9 अप्रैल यानी मंगलवार को शुरू होगी। मंगलवार और शनिवार को नवरात्रि शुरू होने पर माता घोड़े पर सवार होकर पधारती हैं। माता की सवारी घोड़ा होना सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में बड़े बदलावों की ओर संकेत करता है। इसे युद्ध और प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़ या अकाल जैसी परेशानियों का भी संकेत माना जाता है। इस बार चैत्र नवरात्रि 17 अप्रैल को राम नवमी के दिन समाप्त होगी और उस दिन बुधवार है। नवरात्रि की समाप्ति बुधवार को होने पर माता हाथी पर सवार होकर प्रस्थान करती हैं। हाथी की सवारी पर प्रस्थान के शुभ संकेत वाला माना जाता है. यह अच्छी बारिश, अच्छी फसल और किसानों को भरपूर फसल प्राप्त करने का संकेत देती है। इस बार चैत्र नवरात्रि को घट स्थापना का मुहूर्त 9 अप्रैल को सुबह 6 बजकर 12 मिनट से 10 बजकर 23 मिनट तक है। चैत्र नवरात्रि के प्रथ्रम दिन पूजा पाठ के लिए 4 घंटे 11 मिनट का समय होगा।. इस दिन घट स्थापना के लिए अभिजीत मुहूर्त भी है। दोपहर 12 बजकर 3 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक यानी 50 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त में घट स्थापना की जा सकती है।

 

 

 

 

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