लड़ाई मजदूरों की ही नहीं किसान की भी :राकेश टिकैत
18 नवंबर काे किसान फैक्ट्री के गेट पर अपने ट्रैक्टर लेकर बैठ जाएगा

किच्छा : राकेश टिकैत की गठित कमेटी से वार्ता के प्रस्ताव पर इंटरार्क प्रबंधन के सिर्फ श्रमिक संगठन से वार्ता पर सहमति पर टिकैत भड़क गए। उन्होंने 18 नवंबर तक का समय कंपनी और प्रशासन को वार्ता के लिए दिया। कहा अब यह लड़ाई मजदूरों की नहीं किसान की हो गई है और 18 नवंबर काे किसान फैक्ट्री के गेट पर अपने ट्रैक्टर लेकर बैठ जाएगा।पिछले 13 माह से इंटरार्क श्रमिक अपनी मांगों को लेकर लगातार आंदोलन कर रहे है। मंगलवार को इंटरार्क श्रमिक संघ के अध्यक्ष दलजीत सिंह व राकेश कुमार के प्रयास से कंपनी के आगे किसान मजदूर महापंचायत का ऐलान किया था। दोपहर लगभग डेढ़ बजे के करीब भाकियू राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत किसान यूनियन के पदाधिकारियों के साथ सभा स्थल पर पहुंचे।उद्योगों की स्थापना के पीछे के खेल पर प्रहार करते हुए टिकैत ने कहा कंपनी टैक्स का लाभ उठा कर बाद में घाटा दिखा कर भाग जाती है और फिर कंपनी के स्थान पर प्लाटिंग कर मोटा मुनाफा कमाया जाता है। कहा अब यह खेल नहीं चलने दिया जाएगा। उनके द्वारा मंच से वार्ता का प्रस्ताव दिए जाने पर तहसीलदार सुदेश चंद्र बुधलाकोटी व श्रम प्रवर्तन अधिकारी अनिल पुरोहित मंच पर पहुंचे और उन्होंंने मामला न्यायालय में चलने की जानकारी टिकैत को दी।उसके बाद टिकैत के वार्ता के प्रस्ताव के बाद किसानों और श्रमिक संगठन की संयुक्त कमेटी बना कर प्रबंधन से वार्ता के लिए प्रशासन को मध्यस्थता के लिए कहा। जब प्रशासन ने इंटरार्क प्रबंधन से वार्ता की तो उन्होंने श्रमिक संगठन से वार्ता पर सहमति दी। इस पर किसान यूनियन ने वार्ता से मना कर आंदोलन तेज करने का ऐलान किया।उसके बाद राष्ट्रीय प्रवक्ता टिकैत ने किसान यूनियन के पदाधिकारियों से वार्ता कर प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोलने का ऐलान किया। कहा 18 नवंबर से किसान ट्रैक्टर ट्राली लेकर फैक्ट्री के बाहर बैठ जाएगा। 18 नवंबर तक का समय प्रबंधन के पास है वह गठित कमेटी से वार्ता कर ले या फिर फैक्ट्री में ताला लगवाने के लिए तैयार रहे।



