17 अगस्त को मनाया जाएगा नाग पंचमी का पावन पर्व : डॉक्टर आचार्य सुशांत राज
सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि और सावन का तीसरा सोमवार होने का दुर्लभ संयोग

डॉक्टर आचार्य सुशांत राज
देहरादून। डॉक्टर आचार्य सुशांत राज ने जानकारी देते हुये बताया की नाग पंचमी का पर्व सावन महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। वर्ष 2026 में पंचमी तिथि दो तारीखों यानी 16 और 17 अगस्त को पड़ रही है। इसी वजह से लोगों के बीच यह सवाल है कि नाग पंचमी का व्रत और पूजन 16 अगस्त को किया जाए या 17 अगस्त को। दृक पंचांग के अनुसार सावन शुक्ल पंचमी तिथि 16 अगस्त को शाम 4 बजकर 52 मिनट पर आरंभ होगी और 17 अगस्त को शाम 5 बजे समाप्त होगी। यानी पंचमी तिथि 16 अगस्त की शाम से शुरू होकर अगले दिन शाम तक रहेगी। हिंदू धर्म में अधिकतर व्रत और त्योहार उस तिथि के आधार पर निर्धारित किए जाते हैं, जो सूर्योदय के समय मौजूद रहती है। 17 अगस्त को सूर्योदय के वक्त पंचमी तिथि विद्यमान रहेगी। इस दिन सूर्योदय सुबह 5 बजकर 51 मिनट पर होगा। इसलिए पंचांग और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नाग पंचमी का पर्व 17 अगस्त 2026 को मनाना उचित रहेगा।
नाग पंचमी का पावन पर्व 17 अगस्त 2026 (सोमवार) को मनाया जाएगा। इस दिन सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि और सावन का तीसरा सोमवार होने का दुर्लभ संयोग भी है। पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 5:53 बजे से 8:27 बजे तक (कुल अवधि 2 घंटे 34 मिनट) रहेगा। इस बार नाग पंचमी के दिन सावन सोमवार होने के कारण भगवान शिव और नाग देवता की एक साथ विशेष आराधना की जाएगी। इस दिन नाग देवता को दूध, अक्षत और फूल अर्पित करने से कालसर्प दोष तथा भय से मुक्ति मिलती है। इस दिन जमीन की खुदाई करने, नुकीली चीजें इस्तेमाल करने या सांपों को नुकसान पहुंचाने से बचना चाहिए।
डॉक्टर आचार्य सुशांत राज ने जानकारी देते हुये बताया की17 अगस्त 2026 को सावन का तीसरा सोमवार, नाग पंचमी और सूर्य देव का राशि परिवर्तन एक साथ होने जा रहा है। भगवान शिव, नाग देवता और सूर्य देव के इस दुर्लभ त्रिवेणी संगम से कई राशियों को फायदा होगा। सावन सोमवार और नाग पंचमी का यह दुर्लभ संयोग शिव भक्तों के लिए अत्यंत कल्याणकारी माना जा रहा है। इसी दिन आत्मा व मान-सम्मान के कारक सूर्य देव का राशि परिवर्तन (सूर्य गोचर) भी होने जा रहा है। भगवान शिव की कृपा, नाग देव के आशीर्वाद और सूर्य देव के तेज का यह त्रिवेणी संगम ज्योतिषीय दृष्टिकोण से बेहद कल्याणकारी माना जा रहा है। इस महासंयोग के प्रभाव से 3 विशेष राशियों के जीवन में सुख, समृद्धि और तरक्की के नए द्वार खुलने जा रहे हैं।
मेष राशि :- मेष राशि के जातकों के लिए यह महासंयोग भाग्य में वृद्धि लेकर आ रहा है. भगवान शिव और सूर्य देव की कृपा से आपके आत्मविश्वास में जबरदस्त बढ़ोतरी होगी. आय के नए स्रोत बनेंगे. बिजनेस में किए गए पुराने निवेश से बड़ा मुनाफा मिल सकता है.
सिंह राशि :- सूर्य देव आपकी ही राशि के स्वामी हैं. नाग पंचमी, सावन सोमवार और सूर्य गोचर का यह अद्भुत संयोग आपके लिए वरदान समान सिद्ध होगा. समाज और कार्यक्षेत्र में आपका मान-सम्मान व पद-प्रतिष्ठा बढ़ेगी. सरकारी कार्यों या उच्च अधिकारियों के सहयोग से अटके हुए काम पूरे होंगे.
धनु राशि :- धनु राशि वालों के लिए यह त्रिग्रही व पावन संयोग करियर और व्यापार में सफलता के द्वार खोलेगा. लंबे समय से चली आ रही आर्थिक तंगी या रुकावटें समाप्त होंगी. घर-परिवार में मांगलिक कार्यों का आयोजन हो सकता है और पैतृक संपत्ति से लाभ मिलने की संभावना है.
पंचमी तिथि आरंभ: 16 अगस्त 2026 को दोपहर 4:52 बजे
पंचमी तिथि समाप्त: 17 अगस्त 2026 को शाम 5:00 बजे
पूजा का शुभ समय: प्रातः 05:53 से 08:27 बजे तक
नाग पंचमी पर राहुकाल का समय :- 17 अगस्त को राहुकाल सुबह 7:30 बजे से 9:08 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार राहुकाल में राहु-केतु से संबंधित दोषों की शांति के लिए भगवान शिव की आराधना की जाती है। कालसर्प दोष को भी राहु और केतु से जुड़ा माना जाता है। ऐसे में इस दिन शिव पूजन, मंत्र जाप और दोष निवारण से जुड़े धार्मिक उपाय किए जा सकते हैं।
शुभ फल प्राप्ति के लिए उपाय
नाग पंचमी और सावन सोमवार के दिन शिवलिंग पर दूध, जल और बेलपत्र अर्पित करें.
सुबह तांबे के लोटे में जल और रोली मिलाकरसुबह तांबे के लोटे में जल और रोली मिलाकर सूर्य देव को अर्घ्य दें.
नाग देवता की पूजा कर राहु-केतु के दोषों से मुक्ति के लिए प्रार्थना करें.




