दून में वर्ष 1767 में स्थापित हुआ था भारतीय सर्वेक्षण विभाग
भारतवर्ष का सबसे पुराना वैज्ञानिक विभाग है भारतीय सर्वेक्षण विभाग

देहरादून। भारतीय सर्वेक्षण विभाग, भारत की नक्शे बनाने और सर्वेक्षण करने वाली केन्द्रीय एजेंसी है। इसका गठन 1767 में ब्रिटिश इंडिया कम्पनी के क्षेत्रों को संगठित करने हेतु किया गया था। यह भारत सरकार के पुरातनतम अभियांत्रिक विभागों में से एक है। सर्वेक्षण विभाग की अद्भुत इतिहास रचना में व्याल/मैमथ महान त्रिकोणमितीय सर्वेक्षण भी आते हैं। भारतीय सर्वेक्षण विभाग भारत का सबसे प्राचीन वैज्ञानिक विभाग है। वर्ष 1767 में स्थापित यह संस्था देश की राष्ट्रीय मानचित्रण और सर्वेक्षण एजेंसी है, जो विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन कार्य करती है। विभाग की जड़ें 1757 में प्लासी की लड़ाई के बाद ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा जीते गए क्षेत्रों के राजस्व संग्रह और भौगोलिक ज्ञान की आवश्यकता से जुड़ी हैं। 1767 में बंगाल के भू-कर और अन्य सर्वेक्षणों के लिए ‘सर्वे ऑफ बंगाल’ के रूप में इसकी स्थापना की गई। मेजर जेम्स रेनेल को बंगाल का प्रथम सर्वेयर जनरल नियुक्त किया गया था। 10 अप्रैल 1802 को मद्रास (अब चेन्नई) के पास कर्नल विलियम लैंबटन द्वारा ‘महान त्रिकोणमितीय सर्वेक्षण’ शुरू किया गया। यह पृथ्वी की सतह का अब तक का सबसे लंबा और सटीक माप प्रोजेक्ट था। 1815 में सभी क्षेत्रीय सर्वेक्षणों को मिलाकर ‘भारतीय सर्वेक्षण विभाग’ का रूप दिया गया और कर्नल कोलिन मैकेंजी को भारत का पहला महासर्वेक्षक बनाया गया। उनके उत्तराधिकारी, कर्नल जॉर्ज एवरेस्ट के नेतृत्व में इस प्रोजेक्ट ने अभूतपूर्व ऊंचाइयों को छुआ। उन्हीं के नाम पर दुनिया की सबसे ऊंची चोटी का नाम ‘माउंट एवरेस्ट’ रखा गया। 1852 में विभाग के भारतीय गणितज्ञ राधाननाथ सिकदर द्वारा हिमालय की ‘पीक एक्सवी ‘ की ऊंचाई 29,002 फीट (वर्तमान में 29,037 फीट या 8,848 मीटर) मापी गई जिसे बाद में माउंट एवरेस्ट का नाम दिया गया। 1942 में द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान इसके कार्यालयों को देहरादून स्थानांतरित कर दिया गया। आजादी के बाद, विभाग ने भाखड़ा बांध, भिलाई स्टील प्लांट और नागार्जुन सागर जैसी विशाल परियोजनाओं के लिए सटीक निर्देशांक और मानचित्र प्रदान करके राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभाई।




