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संतुलित उर्वरक ही स्वस्थ धरती की कुंजी- केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान

हरियाणा मॉडल से देश सीखेगा खेती का नया रास्ता- श्री शिवराज सिंह चौहान

नई दिल्ली 30 जून
हरियाणा के रेवाड़ी स्थित कृषि महाविद्यालय, बावल में “खेत बचाओ अभियान” के समापन एवं हरियाणा एफपीओ मिशन के शुभारंभ अवसर पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों को टिकाऊ कृषि, संतुलित उर्वरक उपयोग और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का मजबूत संदेश दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने की, जबकि हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण, पशुपालन एवं डेयरी तथा मत्स्य मंत्री श्री श्याम सिंह राणा विशिष्ट अतिथि थे।कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत को वैभवशाली, गौरवशाली, संपन्न, समृद्ध, शक्तिशाली, आत्मनिर्भर और विकसित बनाने का संकल्प तभी पूरा होगा, जब देश का किसान विकसित और समृद्ध होगा। श्री चौहान ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने का संकल्प दोहराते हुए हरियाणा सरकार की नीतियों की खुलकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि हरियाणा वह प्रांत है जहाँ 24 फसलों पर एमएसपी दी जा रही है, भावांतर भुगतान योजना लागू है, और बागवानी फसलों, सब्जियों एवं फलों पर भी भावांतर के माध्यम से किसानों को उनके पसीने की पूरी कीमत दी जा रही है। उन्होंने “मेरी फसल, मेरा खेत, मेरा ब्यौरा” तथा “मेरा पानी, मेरी विरासत” जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन प्रयासों से हरियाणा पूरे देश को नई राह दिखा रहा है और कई राज्यों को यहां से सीखने की आवश्यकता है।

केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने किसानों को याद दिलाया कि कभी भारत को लाल गेहूं अमेरिका से मंगाना पड़ता था, लेकिन आज हरियाणा जैसे राज्यों के प्रयासों से देश के अनाज भंडार भर चुके हैं। उन्होंने कहा कि चावल उत्पादन में भारत दुनिया में नंबर एक पर पहुंच गया है और इस कृषि क्रांति में हरियाणा के किसानों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। साथ ही उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि हरियाणा न केवल अनाज उत्पादन में अग्रणी है, बल्कि सीमा की सुरक्षा और खेलकूद व ओलंपिक में देश का मान बढ़ाने में भी यहां के नौजवानों की भूमिका अग्रिम पंक्ति में रहती है।
श्री शिवराज सिंह चौहान ने मिट्टी की सेहत पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि असंतुलित और अत्यधिक खाद एवं कीटनाशक के उपयोग से हमारी धरती माँ बीमार हो रही है। धरती कहे पुकार के कि इतना खाद मत डालो, इतना पेस्टिसाइड मत डालो कि मैं खुद बीमार हो जाऊँ, कहते हुए उन्होंने किसानों से अपील की कि वे मिट्टी के परीक्षण के आधार पर ही उर्वरक का उपयोग करें और केवल उतनी मात्रा में खाद डालें, जितनी जरूरत हो। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे डॉक्टर अगर जरूरत से ज्यादा या गलत दवा दे दे तो स्वास्थ्य खराब हो जाता है, वैसे ही खेत में बिना जरूरत के अधिक यूरिया और डीएपी डालने से मिट्टी का क्षरण, एसिड बढ़ना, पोषक तत्वों का असंतुलन और ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन बढ़ रहा है, जिसका असर हमारी फसलों, बीज, फल-सब्जियों और अंततः हमारे शरीर पर पड़ता है। उन्होंने आगाह किया कि यदि यही असंतुलन जारी रहा तो भविष्य में धरती अन्न उत्पादन से ही इंकार कर सकती है और आने वाली पीढ़ियों के लिए यह बड़ा संकट बन सकता है।
श्री चौहान ने टेक्नोलॉजी के उपयोग से खेती में क्रांतिकारी बदलाव की संभावना पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सरकार ऐसी व्यवस्था बना रही है कि किसानों को स्वाइल हेल्थ कार्ड की जानकारी मोबाइल ऐप के माध्यम से तुरंत उपलब्ध हो सकेगी। आप खेत में खड़े होकर मोबाइल के जरिए जान सकेंगे कि आपकी मिट्टी में कौन-कौन से तत्व हैं और कितनी खाद डालनी चाहिए।

प्राकृतिक खेती पर जोर देते हुए केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने कहा कि यदि सही तरीके से प्राकृतिक खेती की जाए तो उत्पादन कम नहीं होता। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे अपने खेत के एक छोटे हिस्से पर प्राकृतिक खेती का प्रयोग अवश्य करें। उन्होंने यह भी कहा कि अत्यधिक रासायनिक खाद और कीटनाशक के कारण धरती में सूक्ष्म जीव नष्ट हो रहे हैं और केंचुए जैसे जैव-सहयोगी अब खेतों में कम दिखाई देते हैं, जिसे बदलना होगा।

श्री चौहान ने जलवायु परिवर्तन और अल-नीनो की आशंकाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हरियाणा के कुछ जिलों में कम वर्षा की संभावना को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर कम पानी वाली, जल्दी तैयार होने वाली फसलों पर काम कर रही हैं, ताकि किसान कम जल में भी अच्छा उत्पादन ले सकें। उन्होंने हरियाणा सरकार द्वारा धान के स्थान पर दलहन लगाने पर प्रति एकड़ ₹8000 की प्रोत्साहन राशि देने की नीति को किसानों के हित में बड़ा कदम बताया।

कार्यक्रम के दौरान श्री शिवराज सिंह चौहान ने “खेत बचाओ अभियान” को केवल एक अभियान नहीं, बल्कि दीर्घकालिक मिशन के रूप में आगे बढ़ाने का संकल्प व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि आज समापन नहीं हो रहा, आज नया प्रारंभ हो रहा है। अभियान समाप्त है, लेकिन मिशन आज प्रारंभ हो रहा है। उन्होंने घोषणा की कि वे कृषि मंत्री के रूप में सप्ताह में कम से कम एक दिन किसी न किसी राज्य में “खेत बचाओ अभियान” से जुड़े कार्यक्रमों में भाग लेंगे, ताकि किसानों की सोच में संतुलित खाद, स्वस्थ मिट्टी और टिकाऊ कृषि के प्रति सकारात्मक बदलाव लाया जा सके।समारोह के अंत में केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने सभी किसानों, बहनों और युवाओं को खेत बचाओ, धरती बचाओ अभियान से जुड़ने और संतुलित उर्वरक उपयोग का संकल्प दिलाया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के संकल्प को पूरा करने के लिए सरकार और किसान मिलकर काम करेंगे और हरियाणा जैसे राज्यों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर पूरे देश के कृषि विकास के लिए रोडमैप तैयार किया जाएगा।

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