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भारतीय नौसेना में तीन स्वदेशी नौसैनिक प्लेटफॉर्म को कमीशन करने के लिए तैयार

नई दिल्ली। भारतीय नौसेना कोलकाता में देश में बने तीन अहम युद्धपोतों–दूनागिरी, संशोधक और अग्रय – को सेवा में शामिल करने जा रही है। भारतीय नौसेना के वॉरशिप डिज़ाइन ब्यूरो द्वारा डिज़ाइन किए गए और कोलकाता की गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स द्वारा बनाए गए ये जहाज़ समुद्री युद्ध, हाइड्रोग्राफिक सर्वे और पनडुब्बी-रोधी युद्ध में अहम ऑपरेशनल क्षमताएं दिखाते हैं। ये सभी मिलकर क्षमता विकास, ब्लू-वॉटर ऑपरेशन्स को मज़बूत करने, समुद्री क्षेत्र की जानकारी (मैरिटाइम डोमेन अवेयरनेस) बढ़ाने और बदलते खतरों के खिलाफ तटीय जल की सुरक्षा के प्रति नौसेना के संतुलित नज़रिए को दर्शाते हैं। प्रोजेक्ट 17A के तहत बना पांचवां स्टील्थ फ्रिगेट ‘दूनागिरी’ आधुनिक हथियारों और सेंसर से लैस है, जिसमें ब्रह्मोस सतह-से-सतह पर मार करने वाली मिसाइलें और मीडियम रेंज की सतह-से-हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली शामिल है, जो नौसेना की युद्ध क्षमता को काफी बढ़ाती है। चौथा सर्वे वेसल (बड़ा), ‘संशोधक’, तटीय और गहरे पानी में हाइड्रोग्राफिक सर्वे करने और रक्षा व नागरिक कार्यों के लिए समुद्र-विज्ञान और भू-भौतिकीय डेटा इकट्ठा करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह ऑटोनॉमस अंडरवाटर व्हीकल्स और रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल्स जैसी आधुनिक सर्वे प्रणालियों से लैस है। ‘अग्रय’ (Agray), जो अर्नाला-क्लास एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट का चौथा जहाज़ है, हल्के टॉरपीडो, देश में बने रॉकेट लॉन्चर और उथले पानी में पनडुब्बी जैसे खतरों का पता लगाने और उनसे निपटने के लिए शैलो-वॉटर सोनार सिस्टम से लैस है। ये तीनों जहाज़ भारत के स्वदेशी जहाज-निर्माण इकोसिस्टम की बढ़ती परिपक्वता को दिखाते हैं, जिसमें 75 प्रतिशत से ज़्यादा हिस्सेदारी स्वदेशी है। इनके निर्माण में भारतीय उद्योगों, जिनमें 200 से ज़्यादा MSME शामिल हैं, ने बड़ी भूमिका निभाई और इससे काफी संख्या में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोज़गार पैदा हुए। इन जहाज़ों को सेवा में शामिल करना भारत सरकार, भारतीय नौसेना, सार्वजनिक क्षेत्र के शिपयार्ड, निजी उद्योगों और MSME के मिलकर किए गए प्रयासों को दिखाता है, जिनका मकसद ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्यों को आगे बढ़ाना और भारत की समुद्री क्षमताओं को मज़बूत करना है।

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