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रक्षा मंत्री ने किया‘नौसेना शौर्य वाटिका’का उद्घाटन

सुरक्षित समुद्री मार्ग वैश्विक शांति और समृद्धि की कुंजी : रक्षा मंत्री

देहरादून 30 मई। रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में संयुक्त रूप से ‘नौसेना शौर्य वाटिका’ का उद्घाटन किया। दो एकड़ से अधिक क्षेत्र में 19 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह खुला संग्रहालय भारतीय नौसेना की भावना, वीरता और पराक्रम को समर्पित है। इसमें आईएनएस गोमती के उपकरण और हथियार प्रणाली प्रदर्शित हैं, जिसे 34 वर्षों की सेवा के बाद 29 मई, 2022 को सेवामुक्त कर दिया गया था। इस अवसर पर बोलते हुए, रक्षा मंत्री ने नौसेना शौर्य वाटिका को न केवल एक पर्यटन स्थल, बल्कि प्रेरणा का प्रतीक बताया, जो आने वाली पीढ़ियों को स्वतंत्रता और सुरक्षा की वास्तविक कीमत याद दिलाएगा। उन्होंने कहा कि यह पार्क देश की सुरक्षा और संरक्षा की निरंतर याद दिलाता रहेगा, जिसे इसके वीर जवानों की वीरता और बलिदानों के माध्यम से सुरक्षित रखा गया है। “यह महज एक वास्तुशिल्पीय डिजाइन या संरचनात्मक शिल्प कौशल का नमूना नहीं है; यह हमारे सैनिकों के प्रति हमारी कृतज्ञता की भावना को पुनर्जीवित करता है। इसका उद्देश्य हमारे युवाओं में राष्ट्र निर्माण का उत्साह जगाना है,” उन्होंने कहा। श्री राजनाथ सिंह ने समुद्र में भारतीय नौसेना की मजबूत उपस्थिति और परिचालन तत्परता की सराहना करते हुए कहा कि वर्तमान भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच वैश्विक शांति और समृद्धि की कुंजी समुद्री मार्गों की सुरक्षा में निहित है। उन्होंने भारतीय सेना और भारतीय वायु सेना के साथ मिलकर ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय नौसेना के असाधारण योगदान की प्रशंसा की। उन्होंने कहा, “अरब सागर में हमारी नौसेना की दुर्जेय स्थिति ने शत्रु के मन में निरंतर भय का भाव पैदा किया। परिणामस्वरूप, पाकिस्तानी नौसेना अपने बंदरगाहों तक ही सीमित रही।” रक्षा मंत्री ने मजबूत सेना और आत्मनिर्भर रक्षा उद्योग के माध्यम से राष्ट्र को सुरक्षित और समृद्ध बनाने पर सरकार के विशेष जोर का उल्लेख किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय रक्षा बलों की बढ़ती ताकत प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के निरंतर प्रयासों और रणनीतिक योजना का परिणाम है। श्री राजनाथ सिंह ने कहा, “भारत को सही मायने में शक्तिशाली तभी माना जा सकता है जब हमारी रक्षा बलों को अपने हथियारों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर न रहना पड़े। यही कारण है कि हमारे प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना प्रस्तुत की। मेक-इन-इंडिया, रक्षा औद्योगिक गलियारे, इनोवेशन फॉर डिफेंस एक्सीलेंस (आईडेक्स) और एडीआईटीआई (आईडेक्स के साथ नवीन तकनीकों के विकास में अग्रणी) जैसी पहलों के माध्यम से हम अत्याधुनिक हथियारों का स्वदेशी निर्माण कर रहे हैं और उन्हें विभिन्न मित्र देशों को निर्यात कर रहे हैं। भारत हमेशा से हथियारों और उपकरणों का आयातक देश रहा है। हालांकि, आज स्थिति पूरी तरह बदल गई है और हमारा रक्षा क्षेत्र पूर्ण आत्मनिर्भरता की ओर निरंतर अग्रसर है।”रक्षा मंत्री ने कहा कि पिछले एक दशक के निरंतर प्रयासों का फल मिल रहा है, क्योंकि घरेलू रक्षा उत्पादन, जो 2014 में मात्र 46,000 करोड़ रुपये था, बढ़कर 1.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है और जल्द ही 1.75 लाख करोड़ रुपये के एक और रिकॉर्ड को छूने की ओर अग्रसर है। उन्होंने आगे कहा कि रक्षा निर्यात 2014 में 1,000 करोड़ रुपये से कम से बढ़कर आज लगभग 40,000 करोड़ रुपये हो गया है। इस सफलता को प्राप्त करने में उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हुए, श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि जहां राज्य के सैनिक देश भर के सैनिकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर राष्ट्रीय हितों की रक्षा करते हैं, वहीं रक्षा औद्योगिक गलियारा रक्षा विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को महत्वपूर्ण रूप से मजबूत कर रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, व्यापार एवं वाणिज्य, सड़कों, राजमार्गों और हवाई अड्डों जैसे अन्य क्षेत्रों में भी नई ऊंचाइयों को छू रहा है। अपने संबोधन में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने देश के वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनकी सुरक्षा के कारण ही प्रत्येक नागरिक चैन से सो पाता है। उन्होंने कहा कि विकास योजनाएं केवल एक सुरक्षित और मजबूत राष्ट्र में ही आगे बढ़ सकती हैं, जो अपने सैनिकों द्वारा संरक्षित हो। उन्होंने आगे कहा कि रक्षा बलों के कर्मियों के कल्याण के प्रति सम्मान और प्रतिबद्धता, प्रधानमंत्री के 2047 तक विकसित भारत के विजन का एक अनिवार्य हिस्सा है। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य और श्री ब्रजेश पाठक, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी और अन्य वरिष्ठ नागरिक एवं सैन्य अधिकारी उपस्थित थे।
इस पार्क में नौसेना युद्धपोत पर लगी AK 726 तोप, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों के लिए ZIF 101 लॉन्चर, सतह से सतह पर मार करने वाली और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें, साथ ही जहाज का रडार, टॉरपीडो लॉन्चर, लंगर, जहाज के मस्तूल और INS गोमती की अन्य कलाकृतियाँ प्रदर्शित हैं। इसमें TU 142M का एक वॉकथ्रू संग्रहालय भी है, जो एक लंबी दूरी का समुद्री गश्ती विमान है और अब सेवा में नहीं है। नौसेना शौर्य संग्रहालय के द्वितीय चरण के तहत निर्मित इस पार्क में भोजनालय, स्मृति चिन्ह की दुकान और उन्नत प्रकाश व्यवस्था और ध्वनि प्रणाली जैसी कई पर्यटक सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।
INS गोमती का नाम जीवंत गोमती नदी से लिया गया है और इसे 16 अप्रैल, 1988 को तत्कालीन रक्षा मंत्री द्वारा मझगांव डॉक लिमिटेड में सेवा में शामिल किया गया था। गोदावरी श्रेणी के निर्देशित मिसाइल फ्रिगेटों में से तीसरा, आईएनएस गोमती, पश्चिमी बेड़े का सबसे पुराना युद्धपोत था जब इसे सेवामुक्त किया गया।
अपनी सेवा के दौरान, इसने ऑपरेशन कैक्टस, पराक्रम और रेनबो में भाग लिया और कई द्विपक्षीय और बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यासों में भी शामिल रहा। राष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा में इसके उल्लेखनीय साहस और उत्कृष्ट योगदान के लिए, इसे दो बार प्रतिष्ठित यूनिट प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया गया, एक बार 2007-08 में और फिर 2019-20 में।

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